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राज्य कृषि समाचार (State News)

केले से समृद्धि-केले से सेहत की ओर बढ़ेगा बुरहानपुर – विधायक चिटनिस

केला-हल्दी महोत्सव-2024 का हुआ समापन

23 फरवरी 2024, बुरहानपुर: केले से समृद्धि-केले से सेहत की ओर बढ़ेगा बुरहानपुर – विधायक चिटनिस – हमें कच्चे केले एवं पक्के केले से निर्मित खाद्य उत्पादों को प्रमोट करना है। जिले को बनाना फूड पार्क बनाना है। इसके मीठे एवं नमकीन दोनों ही श्रेणी के खाद्य उत्पादों को आगे लाना है। केले के रस एवं वेस्ट मटेरियल से फर्टिलाइजर, फाईबर से कपड़ा एवं लेदर निर्माण के साथ-साथ व्यापक बी-टू-सी एवं बी-टू-बी मार्केटिंग को बढ़ावा देना है।केले की फसल के प्रसंस्करण के लिए हम रिसर्चर, उद्योगपति एवं किसानों के साथ मिलकर कार्य करेंगे। आशान्वित हैं कि केले से समृद्धि-केले से सेहत की ओर बढ़ेगा बुरहानपुर । यह बात बुरहानपुर विधायक श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) ने यहाँ आयोजित केला-हल्दी फेस्टिवल के दूसरे दिन आयोजित समापन सत्र को संबोधित करते हुए कही।

केले की फसल का अन्य उत्पाद निर्माण में उपयोग – श्रीमती चिटनिस ने कहा कि दुनिया में कुछ स्थानों पर केले की फसल को फल के लिए नहीं लगाते बल्कि इसके अन्य उत्पाद निर्माण हेतु लगाई जाती है। केले के फल की बाहर भी बहुत संभावनाएं है। बुरहानपुर में जहाँ जलस्तर बहुत तेजी से गिर रहा है, वहीं  मिट्टी की उर्वरक क्षमता भी घट रही है। इसलिए हमें मिट्टी और पानी दोनों को संभालना होगा। जून 2024 के अंतिम सप्ताह में आयोजित होने वाले बनाना इकोनॉमिक्स की तैयारी के लिए  अभी से जुट जाएं । विधायक ने कहा कि त्रुटिवश बुरहानपुर हॉर्टिकल्चर मिशन से छूट गया था। किन्तु हमारे प्रयासों से अब इसे आउट ऑफ द वे जाकर जोड़ दिया  गया है।  जिले में  सिंचाई का रकबा बढ़ा है, इसलिए आज बुरहानपुर 24 से 25 हजार एकड़ में केले की खेती कर रहा है। प्रयास करेंगे तो आने वाले वर्षों में क्षेत्र में दुगुनी सिंचाई क्षमता हो सकेंगी। कॉमन सेशन में  बाहर से जिले में पधारे वैज्ञानिक, विषय-विशेषज्ञ एवं अतिथियों ने अपने-अपने विषयों पर व्याख्यान दिए।

सभी को साथ में काम करने की ज़रूरत – बनाना फेस्टिवल के समापन पर कलेक्टर सुश्री भव्या मित्तल ने संभावनाएं एवं प्रयास के संबंध में कहा कि सभी को आगे आकर साथ में काम करने की जरूरत है। जिले में  नई तकनीक को अपनाते हुए एनआरसीबी के सहयोग से ट्रायल एवं डेमो स्टेशन यूनिट स्थापित करने की आवश्यकता है। हमें बनाना तक ही नहीं बल्कि बेम्बू क्रॉफ्ट कलस्टर एवं टेराकोटा को भी निर्यात तक ले जाना है। सभी से सहयोग की अपेक्षा है। बनाना फाइबर से उत्पादों के निर्माण के साथ-साथ बायोमास की दिशा में भी अग्रसर होना चाहिए। कलेक्टर ने बताया कि स्वयं सहायता समूह की लगभग 90 महिलाओं को केले के तने से रेशे निकालने के लिए योजनान्तर्गत मशीन उपलब्ध कराने हेतु पंजीकृत किया गया है।

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अतिथियों ने दी अहम जानकारी – एनआरसीबी-आईसीएआर के प्रिसिंपल साईंटिस्ट डॉ.सुरेश ने फूड प्रोसेसिंग, सेलिंग पाईंट, विभिन्न उत्पादों, उत्पाद क्वॉलिटी एवं केले के महत्व पर प्रकाश डाला और अपने संस्थान में किए जा रहे  कार्यों  एवं तकनीकी के बारे में भी जानकारी दी। श्री राजेश्वराव गोरखेड़े ने एमएसएमई अंतर्गत दी जाने वाली सुविधाओं एवं योजनाओं के बारे में  विस्तार से बताया । श्री गौरव गोयल ने एमएसएमई पोर्टल के बारे में जानकारी देते हुए मार्केटिंग सपोर्ट, एसटी एससी हब स्कीम से रूबरू कराया। उन्होंने बताया कि, एमएसएमई  रजिस्ट्रेशन निःशुल्क है। श्री अमित बरहेटा ने  एक्सपोर्ट एवं मार्केटिंग की जानकारी दी। उन्होंने इंडियन  ट्रेड  पोर्टल, इंडियन बिजनेस पोर्टल, एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल इत्यादि पर प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रकाश डाला। श्री उमाकांत शाक्यवार ने डाकघर निर्यात केन्द्र के कार्य एवं उपयोगिता बताई। समापन अवसर पर अतिथियों के सुझाव भी आमंत्रित किए गए । श्रीमती चिटनिस, सुश्री मित्तल एवं  श्रीमती देशमुख द्वारा बनाना फेस्टिवल में पधारे अतिथियों को केले के रेशे से निर्मित घड़ी, पर्स एवं अन्य उत्पाद भेंट कर सम्मानित किया गया।

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