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फसल की खेती (Crop Cultivation)

उड़द, मूँगफली की उन्नत किस्में लगाएं

27 जून 2022, भोपाल । उड़द, मूँगफली की उन्नत किस्में लगाएं  – खरीफ मौसम में मुख्यत: उड़द, मूँगफली, तिल, सोयाबीन, ज्वार की खेती की जाती है। विगत 2-3 वर्षों से मूँगफली का क्षेत्रफल बढ़ रहा है और तिल, सोयाबीन एवं उड़द का क्षेत्रफल एवं उत्पादन जलवायु परिवर्तन के कारण घट रहा है। फसलों का चयन समय के अनुरूप माँग एवं जलवायु सहनशीलता कृषि पद्धति को अपनाकर फसलों के गिरते क्षेत्रफल एवं उत्पादकता को कम कर सकते हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र टीकमगढ़ के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी.एस. किरार, वैज्ञानिक, डॉ. आई.डी. सिंह, डॉ. यू.एस. धाकड़, डॉ. एस.के. जाटव द्वारा किसानों को खरीफ फसलों की विपुल उत्पादन हेतु ये समसामायिकी सलाह दी गयी।

उड़द, मूँगफली की उन्नत किस्में

उड़द की उन्नत किस्में प्रताप उड़द-1, आई.पी.यू. 94-1, मुकुन्दरा, शेखर-2, शेखर-3, पी.यू.-30 आदि पीला मौजेक रोग प्रतिरोधी किस्में हैं। मूँगफली की उन्नत किस्में टी.जी.-37ए, जे.जी.एन-23, आर.जी.-578, गिरनार-2, टी.जी.-39, जी.जी.-20 आदि। टी.जी.-37ए, टी.जी.-39, गिरनार-2, एच.एन.जी.-123, आर.जी.-578 आदि गुच्छेदार, अधिक उत्पादन देने वाली किस्में हैं। इन सभी में तेल की मात्रा 48 से 51 प्रतिशत तक है।

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तिल की अधिक उत्पादन वाली नई किस्में

तिल की अधिक उत्पादन वाली नई किस्में टी.के.जी.-306 (दाना सफेद), टी.के.जी.-308 (दाना सफेद), जवाहर तिल-14 (काला बीज), जवाहर तिल-12 (दाना सफेद) आदि का चयन कर बीज की 1.5 से 2 कि.ग्रा. प्रति एकड़ व्यवस्था करें। सोयाबीन की नई किस्मों में  जे.एस. 20-34, जे.एस. 20-29, आर.वी.एस. 2001-04, जे.एस. 20-69 एवं जे.एस. 20-98 आदि किस्में बहुरोग रोधी हैं। जे.एस. 20-69 एवं जे.एस. 20-34 कम पानी एवं कम वर्षा वाले क्षेत्रों हेतु उपयुक्त हैं। मूँग की उन्नत किस्में सिखा, विराट, आई.पी.एम. 2-3, एम.एच.-421 आदि पीला मौजेक प्रतिरोधी एवं अधिक उत्पादन देने वाली किस्में हैं।

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बीजोपचार

सभी फसलों के बीजों को बुवाई से पूर्व बीजोपचार कार्बोक्सीन + थायरम दवा 2 ग्रा./कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार कर बुवाई करें, जिससे बीज जनित फफूँदनाशक बीमारियों से फसल को बचाया जा सके। दलहनी एवं तिलहनी फसलों की बुवाई रिज्ड एवं फरौ पद्धति या बी.बी.एफ. (चौड़ी क्यारी नाली) विधि से कतारों में बुवाई करने से कम पानी एवं अधिक पानी दोनों ही स्थिति में फसल सुरक्षित रहती है। जिले में अधिकांशतः किसान छिडकवा विधि से बोते हैं इसलिए दलहन एवं तिलहन फसल में नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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