जशपुर में तसर रेशम उद्योग को मिलेगी नई रफ्तार, MRMA 2.0 के तहत बनेगी 5 वर्षीय योजना; उत्पादन बढ़ाने पर रहेगा फोकस
28 जुलाई 2026, जशपुर: जशपुर में तसर रेशम उद्योग को मिलेगी नई रफ्तार, MRMA 2.0 के तहत बनेगी 5 वर्षीय योजना; उत्पादन बढ़ाने पर रहेगा फोकस – छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में एमआरएमए (MRMA) पहल 2.0 के अंतर्गत हितधारक परामर्श बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का समन्वय केंद्रीय रेशम बोर्ड के केंद्रीय तसर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (सीएसबी-सीटीआरटीआई), राँची की वैज्ञानिक-बी डॉ. निधि सुखीजा तथा सहायक संचालक, रेशम जशपुर श्याम कुमार ने किया।
बैठक में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अजय राय, सहायक उद्यान अधीक्षक श्रीमती सुरबाला पैकरा, फील्ड ऑफिसर (रेशम) जेवियर टोप्पो तथा फील्ड मैन श्रीमती उषा पैकरा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं क्षेत्रीय कार्मिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कुल 28 हितधारकों, जिनमें तसर कृषक भी शामिल थे, ने सक्रिय सहभागिता की।
किसानों की समस्याओं का किया गया विस्तृत आकलन
बैठक के दौरान सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन (PRA) और बेसलाइन सर्वे के माध्यम से तसर किसानों की प्रमुख समस्याओं और आवश्यकताओं का विस्तृत अध्ययन किया गया। सर्वेक्षण में सामने आया कि क्षेत्र में तसर पालन के दौरान चींटियों, ततैया (वास्प) के प्रकोप और वायरोसिस रोग के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए किसानों से सुझाव भी लिए गए।
नौ आवश्यकता आधारित कार्यक्रम होंगे लागू
सर्वेक्षण और हितधारकों से प्राप्त सुझावों के आधार पर किसानों की जरूरतों के अनुरूप नौ आवश्यकता-आधारित कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। इन कार्यक्रमों को आगामी वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि तसर उत्पादन बढ़ाने के साथ गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और किसानों की आय में सुधार सुनिश्चित किया जा सके।
हितधारक परामर्श एवं आधारभूत सर्वेक्षण से प्राप्त निष्कर्ष जशपुर जिले के लिए पाँच वर्षीय तसर रेशम विकास कार्ययोजना तैयार करने का महत्वपूर्ण आधार बनेंगे। यह कार्ययोजना स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी हस्तक्षेप, क्षमता निर्माण, रोग एवं कीट प्रबंधन तथा विस्तार गतिविधियों को सुदृढ़ कर तसर रेशम उद्योग के सतत, समावेशी एवं दीर्घकालिक विकास को नई गति प्रदान करेगी।
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