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पशुपालन (Animal Husbandry)राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

पशुधन बीमा के लिए सरकार लॉन्च करेगी नया पोर्टल, हिंदी-अंग्रेजी समेत 13 भाषाओं में मिलेंगी सेवाएं

28 सितंबर 2026, नई दिल्ली: पशुधन बीमा के लिए सरकार लॉन्च करेगी नया पोर्टल, हिंदी-अंग्रेजी समेत 13 भाषाओं में मिलेंगी सेवाएं – पशुधन बीमा सेवाओं को डिजिटल और आसान बनाने की दिशा में केंद्र सरकार 28 सितंबर 2026 को नया ‘लाइवस्टॉक इंश्योरेंस पोर्टल’ लॉन्च करेगी। भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएसडी) की ओर से नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में इस पोर्टल का शुभारंभ किया जाएगा। केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी और पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह पोर्टल को लॉन्च करेंगे।

पशुधन बीमा के लिए मिलेगा एकीकृत डिजिटल मंच

यह पोर्टल पशुधन बीमा के लिए एक एकीकृत डिजिटल मंच के रूप में काम करेगा। इसके जरिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग की पशुधन बीमा योजना के तहत बीमित पशुओं की पॉलिसी जारी करने, दावों के निपटान, निगरानी और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जा सकेगा। पोर्टल को पशुपालकों के लिए अधिक सुलभ बनाने के उद्देश्य से इसे हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 11 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जाएगा। यानी पशुपालक किसान अपनी परिचित भाषा में पोर्टल पर उपलब्ध सूचनाओं और सेवाओं तक पहुंच सकेंगे।

बीमा सेवाओं में पारदर्शिता और निगरानी पर जोर

इस पहल का उद्देश्य पशुधन बीमा सेवाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी, सुलभ और टेक्नोलॉजी आधारित बनाना है। इसके साथ ही पशुपालकों के लिए जोखिम सुरक्षा को मजबूत करने और उनकी आजीविका की स्थिरता को समर्थन देने पर जोर दिया गया है। पोर्टल के जरिए पशुधन बीमा कार्यक्रमों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा रियल-टाइम निगरानी और डेटा-संचालित प्रबंधन की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे देशभर में बीमा सेवाओं के वितरण में सुधार किया जा सकेगा।

पॉलिसी से क्लेम तक की प्रक्रिया होगी सुव्यवस्थित

नए डिजिटल मंच के माध्यम से पशुधन बीमा से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और संस्थागत दक्षता मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। पॉलिसी जारी करने से लेकर दावों के निपटान और उनकी निगरानी तक की प्रक्रिया को एक ही डिजिटल मंच पर सुव्यवस्थित किया जा सकेगा। सरकार के अनुसार, यह पोर्टल पशुधन बीमा सेवाओं को पशुपालकों के और करीब लाने तथा समावेशी और प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवा व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

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