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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

खाद्य तेलों पर आयात शुल्क घटा, सूरजमुखी तेल पर अब शून्य शुल्क

27 सितंबर 2026, नई दिल्ली: खाद्य तेलों पर आयात शुल्क घटा, सूरजमुखी तेल पर अब शून्य शुल्क – त्योहारी सीजन से ठीक पहले केंद्र सरकार ने खाने के तेल पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती कर दी है। वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने 23 सितंबर को अधिसूचना जारी कर सोयाबीन, पाम और सूरजमुखी तेल पर सीमा शुल्क घटाने का ऐलान किया। नई दरें 24 सितंबर से पूरे देश में लागू हो चुकी हैं।

सबसे बड़ी राहत सूरजमुखी तेल को मिली है। कच्चे सूरजमुखी तेल पर अब तक 10 प्रतिशत शुल्क लगता था, जिसे घटाकर पूरी तरह शून्य कर दिया गया है। खाद्य ग्रेड रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर शुल्क 32.5 प्रतिशत से घटाकर 22.5 प्रतिशत किया गया है। कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे पाम तेल पर शुल्क 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि इन दोनों के रिफाइंड खाद्य ग्रेड रूप पर शुल्क 32.5 प्रतिशत से घटाकर 27.5 प्रतिशत किया गया है।

सरकार का तर्क, उपभोक्ताओं को राहत

सरकार ने इस फैसले के पीछे तर्क दिया है कि आयात शुल्क कम होने से खाद्य तेलों की लागत घटेगी और खुदरा बाजार में कीमतें नीचे आएंगी। मंत्रालय के अनुसार, यह कदम त्योहारी सीजन में महंगाई पर लगाम कसने और आम उपभोक्ता को राहत देने के मकसद से उठाया गया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाद्य तेल आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए वैश्विक बाजार से सस्ता तेल मंगाने पर घरेलू बाजार में असर जल्दी दिखता है।

सरकार ने यह भी कहा है कि शुल्क घटाने का मकसद घरेलू रिफाइनिंग उद्योग को प्रोत्साहित करना भी है, ताकि किसानों को उचित मुआवजा देते हुए संतुलन बनाया जा सके। हालांकि व्यापार जगत और किसान संगठनों की राय इस पर बंटी हुई है।

सोयाबीन-सरसों किसानों की चिंता क्यों बढ़ी

आयात शुल्क में कटौती की खबर सामने आते ही सोयाबीन, सरसों और अन्य तिलहन उगाने वाले किसानों में चिंता की लहर है। तर्क सीधा है — जब सस्ता आयातित तेल बाजार में उपलब्ध होगा, तो घरेलू तिलहन की मांग और कीमतों पर दबाव बन सकता है। बीते कुछ महीनों से सोयाबीन के दाम पहले से ही समर्थन मूल्य के आसपास या उससे नीचे बने हुए हैं, ऐसे में यह कटौती किसानों के लिए एक नई चुनौती बन सकती है।

दूसरी तरफ खाद्य तेल उद्योग और उपभोक्ता वर्ग के लिए यह राहत की खबर है। पिछले कुछ समय से खाने के तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर आम लोगों में नाराजगी थी, और त्योहारी मांग बढ़ने से पहले सरकार ने इसी दबाव में यह कदम उठाया है। अब देखना होगा कि आयातक और रिफाइनरी कंपनियां शुल्क कटौती का पूरा फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचाती हैं या नहीं।

भारत अपनी घरेलू खपत के लिए काफी हद तक खाद्य तेल आयात पर निर्भर रहता है, और यही वजह है कि आयात शुल्क में मामूली फेरबदल का असर भी घरेलू मंडियों और खुदरा बाजार दोनों पर जल्दी दिखता है। सोयाबीन, पाम और सूरजमुखी तेल तीनों मिलाकर देश की कुल खाद्य तेल खपत का बड़ा हिस्सा पूरा करते हैं, इसलिए इन तीनों पर एक साथ शुल्क घटाना सरकार की तरफ से एक सुनियोजित कदम माना जा रहा है।

सीबीआईसी की अधिसूचना में यह बदलाव सीमा शुल्क टैरिफ के अलग-अलग एचएस कोड के तहत किया गया है। कच्चा सोयाबीन तेल (1507 10 00) और खाद्य ग्रेड सोयाबीन तेल (1507 90 10), कच्चा पाम तेल (1511 10 00) और अन्य पाम तेल (1511 90), तथा कच्चा सूरजमुखी तेल (1512 11 10) और खाद्य ग्रेड सूरजमुखी तेल (1512 19 10) — इन सभी श्रेणियों में अलग-अलग दरें तय की गई हैं। व्यापार जगत के लिए यह स्पष्टता जरूरी थी क्योंकि आयात होने वाला तेल किस श्रेणी में आता है, इसी आधार पर लागत की गणना होती है।

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