बस्तर के किसान ने मछली बीज उत्पादन से दो महीने में कमाए 30 हजार रुपये
28 सितंबर 2026, सिवनी (हिरलाभाटा), बस्तर, छत्तीसगढ़: बस्तर के किसान ने मछली बीज उत्पादन से दो महीने में कमाए 30 हजार रुपये – बस्तर जिले की ग्राम पंचायत सिवनी के हिरलाभाटा गांव के किसान रयतु राम ने पारंपरिक खेती से हटकर मछली बीज (स्पॉन) उत्पादन का रास्ता चुना और महज दो महीने में अच्छी कमाई कर दिखाई। उनकी यह कहानी सरकारी मत्स्य पालन योजना और थोड़ी सी आधुनिक तकनीक अपनाकर आत्मनिर्भर बनने की मिसाल बन गई है।
रयतु राम के पास कुल पांच एकड़ जमीन है। इसमें से एक एकड़ हिस्से में उन्होंने तालाब बनवाया और मत्स्य विभाग की सरकारी योजना की मदद से मछली बीज उत्पादन शुरू किया। शुरुआती दो महीनों में ही उन्होंने 60 किलोग्राम मछली बीज ₹500 प्रति किलोग्राम की दर से बेचा, जिससे उन्हें करीब 30,000 रुपये की आमदनी हुई।
अभी और कमाई की उम्मीद
रयतु राम के पास अभी भी 40 से 50 किलोग्राम मछली बीज बचा हुआ है। इसे भी इसी दर पर बेचने पर उन्हें आने वाले दिनों में 20,000 से 25,000 रुपये की अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है। इस तरह सिर्फ एक एकड़ के तालाब से कुछ ही महीनों में उन्हें करीब 50,000 रुपये तक की कमाई हो सकती है।
स्थानीय मत्स्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि छोटे तालाबों में मछली बीज उत्पादन कम लागत में शुरू होने वाला और जल्दी नकद आय देने वाला व्यवसाय है, जो बस्तर जैसे आदिवासी बहुल इलाकों के छोटे किसानों के लिए खासतौर पर उपयुक्त है। सरकारी योजना के तहत तालाब निर्माण और तकनीकी मार्गदर्शन में मिली मदद ने रयतु राम के लिए यह शुरुआत आसान बनाई।
बस्तर जैसे इलाकों में ज्यादातर छोटे किसानों के पास सिंचित जमीन सीमित होती है, और पारंपरिक फसलों से साल में एक ही बार आमदनी हो पाती है। ऐसे में मछली बीज उत्पादन का यह मॉडल खास इसलिए अहम है क्योंकि यह सिर्फ दो-तीन महीनों के भीतर ही नकद आय दे देता है, जबकि धान या दूसरी फसलों की कमाई के लिए किसानों को पूरे सीजन का इंतजार करना पड़ता है।
दूसरे किसानों के लिए भी बना उदाहरण
रयतु राम की सफलता के बाद आसपास के गांवों के कई किसान भी मत्स्य विभाग से संपर्क कर अपने खेतों में इसी तरह के छोटे तालाब बनवाने की जानकारी ले रहे हैं। विभागीय अधिकारी बताते हैं कि मछली बीज की स्थानीय मांग लगातार बढ़ रही है, क्योंकि जिले में बड़ी संख्या में किसान अब मत्स्य पालन की ओर रुख कर रहे हैं और उन्हें गुणवत्तापूर्ण बीज की जरूरत पड़ती है। इस वजह से रयतु राम जैसे छोटे उत्पादकों को अपने ही इलाके में आसानी से खरीदार मिल जाते हैं, और उन्हें बीज बेचने के लिए दूर मंडी जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
बस्तर जैसे इलाकों में जहां बड़ी सिंचित जमीन कम है, वहां छोटे तालाबों में मछली बीज उत्पादन जैसे कम-निवेश वाले विकल्प किसानों की अतिरिक्त आय का जरिया बन सकते हैं। जो किसान अपनी जमीन के छोटे हिस्से का बेहतर इस्तेमाल ढूंढ रहे हैं, उनके लिए यह मॉडल एक व्यावहारिक उदाहरण पेश करता है कि सरकारी योजना और थोड़ी तकनीकी जानकारी मिलकर कैसे भरोसेमंद कमाई का जरिया बन सकती है।
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