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राज्य कृषि समाचार (State News)

उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती में धान पर भूरा फुदका और गंधी बग का हमला, कृषि विभाग ने बताया बचाव

28 सितंबर 2026, श्रावस्ती, (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती में धान पर भूरा फुदका और गंधी बग का हमला, कृषि विभाग ने बताया बचाव – जिले में धान की फसल इस समय बालियां बनने की अवस्था में है, और ठीक इसी दौर में भूरा फुदका (ब्राउन प्लांटहॉपर) और गंधी बग के प्रकोप ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी नत्थू लाल ने किसानों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी करते हुए बचाव के उपाय बताए हैं।

भूरा फुदका के हमले की पहचान आसान है — पौधों के गुच्छे अचानक सूखने लगते हैं, जिसे किसान अक्सर “हॉपर बर्न” कहते हैं। वहीं गंधी बग बालियों में बन रहे दानों का रस चूसकर उन्हें खोखला और बदबूदार बना देता है, जिससे उपज की गुणवत्ता और बाजार भाव दोनों पर असर पड़ता है।

किस दवा की कितनी मात्रा डालें

भूरा फुदका के नियंत्रण के लिए कृषि विभाग ने इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एसएल का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। इसकी मात्रा 50 मिलीलीटर प्रति एकड़ रखी गई है, जिसे 500 लीटर पानी में घोलकर छिड़कना चाहिए। इसके विकल्प के तौर पर थायामेथोक्साम 25% डब्ल्यूजी को 40 ग्राम प्रति एकड़ की दर से इस्तेमाल किया जा सकता है।

गंधी बग के लिए मिथाइल पैराथियान 5% धूल या फेनवेलरेट 0.4% डीपी का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है, जिसे 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की मात्रा में खेत में बुरकना चाहिए। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि छिड़काव सुबह या शाम के समय करें, जब धूप की तीव्रता कम हो, ताकि दवा का असर बेहतर तरीके से हो सके।

जिला कृषि रक्षा अधिकारी नत्थू लाल ने बताया कि खेतों में लगातार निगरानी रखने और शुरुआती लक्षण दिखते ही उपचार शुरू करने से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

धान की बाली बनने की अवस्था में पौधे की जड़ों के पास नमी और गर्मी बढ़ने पर भूरा फुदका तेजी से पनपता है, खासकर उन खेतों में जहां घना बोया गया हो और खेत में लगातार पानी भरा रहता हो। ऐसे में खेत की मेड़ों की नियमित सफाई और बीच-बीच में खेत को हल्का सूखने देना भी कीट के प्रकोप को कम करने में मदद करता है।

सावधानी से करें दवा का इस्तेमाल

कृषि विभाग ने किसानों को यह भी सलाह दी है कि छिड़काव करते समय बताई गई मात्रा से ज्यादा दवा का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे फसल में दवा का अवशेष बढ़ सकता है और मित्र कीटों को भी नुकसान पहुंच सकता है। छिड़काव से पहले खेत में पानी की गहराई कम करने और छिड़काव के दो-तीन दिन बाद तक तेज बारिश की आशंका न होने पर ही दवा डालने की सलाह दी गई है, ताकि दवा बह न जाए और उसका पूरा असर हो सके।

धान की बाली बनने की अवस्था फसल की उपज तय करने में सबसे नाजुक समय होती है। भूरा फुदका जैसे कीट कुछ ही दिनों में पूरे खेत को बर्बाद करने की क्षमता रखते हैं, इसलिए सही समय पर सही दवा और मात्रा की जानकारी किसानों की आमदनी बचाने में सीधे काम आती है। कृषि-रसायन कारोबार से जुड़े लोगों के लिए भी यह जानकारी उपयोगी है, क्योंकि आने वाले हफ्तों में पूर्वांचल के इलाकों में इन दवाओं की मांग बढ़ सकती है।

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