राज्य कृषि समाचार (State News)

‘सुपरफूड’ सहजन बनेगा किसानों की आय का नया आधार, बीकानेर में तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

04 अगस्त 2026, जयपुर: ‘सुपरफूड’ सहजन बनेगा किसानों की आय का नया आधार, बीकानेर में तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू – किसानों की आय बढ़ाने और शुष्क क्षेत्रों में टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी), बीकानेर में नाबार्ड वित्तपोषित परियोजना के तहत “बीकानेर जिले में सतत एवं आर्थिक विकास के लिए सहजन आधारित कृषि प्रणाली” विषय पर तीन दिवसीय कृषक कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार से शुरू हो गया। प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को सहजन (मोरिंगा) की वैज्ञानिक खेती, मूल्य संवर्धन और विपणन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन जिला जनसंपर्क अधिकारी सुरेश बिश्नोई ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। इस अवसर पर नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) अरविंद चाहर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

सहजन में आय बढ़ाने की अपार संभावनाएं

मुख्य अतिथि सुरेश बिश्नोई ने कहा कि सहजन एक बहुउपयोगी, पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर पौधा है, जिसमें किसानों की आय बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि सहजन से तैयार होने वाले विभिन्न उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि बीकानेर की भुजिया इंडस्ट्री के साथ सहजन उत्पादों को जोड़कर ‘बीकानेरी सहजन’ को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई जा सकती है।

जलवायु परिवर्तन के दौर में टिकाऊ खेती का विकल्प

नाबार्ड के डीडीएम अरविंद चाहर ने कहा कि सहजन आधारित कृषि प्रणाली रोजगार सृजन, आर्थिक समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम बन सकती है। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच सहजन कम पानी में भी अच्छी पैदावार देने वाली फसल है और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने किसानों से इस परियोजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।

पशुपालन और पोषण सुरक्षा में भी उपयोगी

काजरी के अध्यक्ष डॉ. नवरत्न पंवार ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में सहजन आधारित खेती खाद्य और आर्थिक सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। उन्होंने बताया कि सहजन का उपयोग पशु आहार के रूप में भी किया जा सकता है, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य के साथ दूध और मांस उत्पादन में भी सुधार होता है। उन्होंने जानकारी दी कि काजरी से पौधे प्राप्त कर कई किसान सहजन की खेती और उसके उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर विपणन भी शुरू कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का अंतिम प्रशिक्षण 10 से 12 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जाएगा।

प्रशिक्षण पूरा होने पर मिलेंगे 1,000 पौधे

परियोजना के मुख्य समन्वयक डॉ. बीरबल मील ने सहजन को ‘सुपरफूड’ बताते हुए कहा कि आयुर्वेद में इसके अनेक औषधीय गुण बताए गए हैं। उन्होंने किसानों से सहजन की पत्तियों, फलियों और पाउडर को दैनिक आहार में शामिल करने की अपील की। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के 23वें बैच में बीकानेर जिले की विभिन्न तहसीलों से 35 किसान भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रत्येक किसान को प्रमाण-पत्र के साथ 1,000 सहजन के पौधे निःशुल्क दिए जाएंगे। नाबार्ड वित्तपोषित इस परियोजना के तहत अब तक 250 किसान लाभान्वित होकर अपने खेतों में सहजन की खेती शुरू कर चुके हैं। कार्यक्रम के संचालन एवं आयोजन में काजरी के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉ. मनोज गोरा और डॉ. सीताराम जाट ने सहयोग प्रदान किया।

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