सोयाबीन कृषक इस सप्ताह यह सावधानियां रखें

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06 सितम्बर 2022, इंदौर: सोयाबीन कृषक इस सप्ताह यह सावधानियां रखें – भा.कृ .अनु.प.-भारतीय सोयाबीन अनुसन्धान संस्थान, इंदौर ने इस सप्ताह (5 से 11 सितंबर ) के लिए  सोयाबीन कृषकों को  निम्न सावधानियां रखने की उपयोगी सलाह दी है, जो इस प्रकार हैं –

इस वर्ष सोयाबीन की बोवनी की तिथियों में भिन्नता (जून माह के दूसरे सप्ताह से लेकर जुलाई माह के दूसरे सप्ताह तक) तथा सोयाबीन किस्मों की परिपक्वता अवधि के परिप्रेक्ष्य  में कई क्षेत्रों की सोयाबीन फसल इस समय फूल आने की अवस्था से लेकर फसलों  में दाने भरने की स्थिति  में हैं।  कुछेक क्षेत्रों में फसल पर पत्ती खाने वाली इल्लियां  विशेषकर  तम्बाकू की इल्ली सेमीलूपर इल्ली व चने की इल्ली के साथ-साथ चक्र भृंग का प्रकोप देखा जा रहा है। जबकि मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र के कुछ जिलों में फफूंदजनित रोग जैसे रायजोक्टोनिया  एरिअल ब्लाइट,एन्थ्राक्नोज तथा पीला मोज़ेक वायरस नामक रोगों के संक्रमण कि स्थिति बनी हुई है। ऐसी स्थिति में सोयाबीन कृषकों  को कीट एवं रोग नियंत्रण के निम्न उपाय अपनाने की सलाह है –

1 – ऐसे क्षेत्र जहाँ  सोयाबीन कि बोवनी जुलाई माह के दूसरे सप्ताह में या उसके बाद हुई है, चक्र भृंग के नियंत्रण  हेतु टेट्रानिलिप्रोल 18.18 एस.सी.(250-300 मि ली/हे) या थायक्लोप्रिड 21.7 एस.सी .( 750 मि ली/हे) या प्रोफेनोफॉस 50 ई.सी . (1 ली/.है) या इमामेक्टीन बेन्जोएट ( 425मिली  /है) का प्रारंभिक  अवस्था में ही छि ड़काव करें। यह भी सलाह दी जाती है कि इसके फैलाव की रोकथाम हेतु प्रारंभिक अवस्था में ही पौधे के ग्रसित भाग को तोड़कर नष्ट करें।

2 -ऐसे क्षेत्र जहाँ सोयाबीन की फसल फूल आने की स्थिति  में हों, कृषकों को सलाह है कि वे फसल की नियमित  निगरानी  करते रहें और देखे  कि  फसल पर पत्ती खाने वाली इल्लियां विशेषकर  सेमीलूपर इल्ली , तम्बाकू की इल्ली या चने की इल्ली  का प्रादुर्भाव है या नहीं? क्योंकि यह देखने में आ रहा है कि कुछ इल्लियां फूलों को खाकर नुकसान पहुँचाती है .अतः तुरंत इनके नियंत्रण के उपाय अपनाएं।  इसके लिए निम्न में से किसी भी एक रसायन का छिड़काव  करें(बाद की अवस्था में भी इल्लियों के नियंत्रण के लिए इन कीटनाशकों का उपयोग किया  जा सकता है) :

ब्रोफ्लानिलाईड 300 एस.सी. (42-62 ग्राम/हे), या फ्लूबेंडियामाइड 39.35एस.सी ( 150 मि .ली.) या इंडोक्साकार्ब  15.8ई.सी. (333  मि .ली/हे), या टेट्रानिलिप्रोल 18.18 एस.सी., (250-300 मि ली/हे) या नोवाल्यू रोन + इन्डोक्साकार्ब 04.50 % एस. सी. (825-875 मि ली/हे)
या क्लोरएन्ट्रा निलिप्रोल 18.5 एस.सी, ( 150 मि .ली./हे ) या इमामेक्टिन  बेंजोएट 01.90 (425 मि .ली./हे), या फ्लूबेंडियामाइड 20डब्ल्यूजी (250-300 ग्राम/हे) या लैम्बडा सायहेलोथ्रिन  04.90 सी. एस. (300 मि ली/हे) या प्रोफेनोफॉस 50ई.सी.(1 ली/हे) या स्पायनेटोरम
11.7 एस.सी (450 मि ली/हे) का छिडकाव करें।

3 – ऐसे क्षेत्र जहाँ सोयाबीन की फसल में दाने भरने के पूर्व  अथवा दाना भरने की अवस्था में है, सेमीलूपर या चने की इल्ली  द्वारा फसलों /दाने खाने की सम्भावना को देखते हुए सलाह है कि  फसल पर इंडोक्साकार्ब  15.8ई.सी. (333 मि .ली/हे) या टेट्रानिलिप्रोल 18.18 एस.सी. (250-300 मि ली/हे) या इमामेक्टीन बेन्जोएट ( 425समली /है) या लैम्बडा सायहेलोथ्रिन  04.90 सी. एस. (300 मि ली/हे) का छिडकाव करें।

4-  फफूंदजनित  रोगों (रायजोक्टोनिया एरिअल ब्लाइट तथा एन्थ्राक्नोज ) के नियंत्रण हेतु अनुशंसित फफूंदनाशकों टेबूकोनाझोल 25.9% ई.सी .( 625 मि .ली/.हे). या टेबूकोनाझोल़+सल्फर  (1.25 कि .ग्रा/हे.) यापायरोक्लोस्ट्रोबीन %20 डब्लयू.जी. (375-500 ग्रा/.हे.) या पायरोक्लोस्ट्रोबीन + इपिक्साकोनाजोल 50g/l एस.ई . ( 750मि .ली/.हे.) या फ्लुक्सापग्रोक्साड + पायरोक्लोस्ट्रोबीन ( 300ग्रा/.हे) का छिडकाव किया जा सकता ह।  दाने भरने की अवस्था में फफूंदनाशक के छिडकाव से बीज गुणवत्ता वृद्धि हेतु लाभ  मिलता है।

5  – पीला मोज़ेक रोग के नि यंत्रण हेतु सलाह है कि तत्काल रोगग्रस्त पौधों को खेत से उखाड़कर निष्कासित  करें तथा इन रोगों को फ़ैलाने वाली वाहक सफ़ेद मक्खी की रोकथाम हेतु पूर्व मिश्रित  कीटनाशक थायोमिथोक्सम + लैम्ब्डा सायहेलो थ्रिन  (125 मि ली/हे) या बीटासायफ्लुथ्रिन +इ मिडाक्लोप्रिड  ( 350 मि ली/.हे) का छिड़काव करें।  इनके छिड़काव से तना मक्खी का भी नि यंत्रण किया जा सकता है। यह भी सलाह है कि  सफ़ेद मक्खी के नियंत्रण हेतु कृषकगण अपने खेत में विभिन्न स्थानों पर पीला स्टिकी  ट्रैप लगाएं।

फसल सुरक्षा के अन्य उपाय

1 -खेत के विभिन्न स्थानों पर नि गरानी करते हुए यदि  आपको कोई ऐसा पौधा मिले जिस पर  झुण्ड में अंडे या इल्लियां  हों, ऐसे पौधों को खेत से उखाड़कर निष्कासित  करें।

2 – सोयाबीन की फसल में पक्षियों  की बैठने हेतु  टी आकार के बर्ड -पर्चेस  लगाएं। इससे कीट-भक्षी पक्षियों द्वारा भी इल्लियों की संख्या कम करने में सहायता मिलती है।

3 – -कीट या रोग नियंत्रण के लिए केवल उन्हीं रसायनों का प्रयोग करें जो सोयाबीन की फसल में अनुशंसित हों।

4 – उन रसायनों या रसायनों के मिश्रण  का उपयोग नहीं करें, जो सोयाबीन फसल के लिए अनुशंसित नहीं हैं। इससे सोयाबीन की फसल पूर्णतः ख़राब होने की सम्भावना होती है। .

5 – कीटनाशक या फफूंदनाशक के छिड़काव के लिए पानी की अनुशंसित मात्रा का उपयोग करें (नेप्सेक स्प्रेयर  से 450 लीटर/हे या पॉवर स्प्रेयर से 120 लीटर/हे न्यूनतम)।  

6 – किसी भी प्रकार का कृषि -आदान क्रय करते समय दुकानदार से हमेशा पक्का बिल लें,  जिस पर बैच नंबर एवं एक्सपायरी दिनांक स्पष्ट लिखी  हो ।

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