राज्य कृषि समाचार (State News)

सॉफ्टवेयर इंजीनियर बने गौ-सेवक  

प्रह्लाद जाट बना रहे ‘केमिकल मुक्त गौ -आहार ‘ का मॉडल

28 जुलाई 2026, (दिलीप दसौंधी, कृषक जगत, मंडलेश्वर): सॉफ्टवेयर इंजीनियर बने गौ-सेवक  – जीवन की दिशा कब और कैसे बदल जाय , कुछ कहा नहीं जा सकता है।  ऐसी ही एक कहानी  सॉफ्टवेयर इंजीनियर श्री प्रहलाद जाट की है जो , सालों तक कोड और कंप्यूटर की दुनिया में रहे। लेकिन अब समाज में गौवंश की दुर्दशा देखकर  नौकरी छोड़कर  इन्होंने  गौमाता को अपना जीवन समर्पित कर दिया। श्री जाट श्री खेड़ापति बजरंग गौशाला, काटकूट के सेवक के रूप में न  केवल 15-20 निराश्रित गौवंश को सहारा दे रहे हैं, बल्कि ‘केमिकल मुक्त हरा चारा ‘ का एक नया मॉडल  तैयार करने की दिशा में कदम उठाते हुए गौशाला की 1 एकड़ जमीन पर केमिकल मुक्त हरा चारा  लगाना शुरू  किया । जहां बिना किसी सरकारी मदद के, सिर्फ गौ भक्तों के सहयोग से रोजाना उस चारे को काटकर काटकूट क्षेत्र में भटकने वाले 15-20 निराश्रित गौवंश  को खिलाया जा रहा है।

श्री जाट को इस नए क्षेत्र में इंजीनियरिंग बैकग्राउंड का फायदा मिला। उन्होंने सिंचाई, कटाई और प्रबंधन को  व्यवस्थित  किया। दवाइयों और केमिकल पर निर्भरता  शून्य कर  सिर्फ गोबर खाद, जीवामृत और देसी तरीके को अपनाया। गौभक्त साथियों के सहयोग से गौशाला की 4 एकड़ जमीन पर बड़े स्तर पर हरा चारा लगाया जा चुका है। जहां 1 अक्टूबर 2026 से  इस चारे का उत्पादन शुरू हो जाएगा। इस कार्य को करने के लिए उन्होंने कुछ लक्ष्य भी तय किए हैं , जिनमें आत्मनिर्भर गौशाला बनाना,ताकि  बाहर से चारा खरीदने पर हर महीने होने वाला खर्च बचे। दूसरा  लक्ष्य गौवंश  बढ़ाने का है।अभी 15-20 गौवंश हैं। चारा बढ़ेगा तो 100+ निराश्रित गौवंश को भी सहारा दे पाएंगे और तीसरा लक्ष्य है,आदर्श मॉडल तैयार कर यह  दिखाना कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी अगर चाहे तो गांव में रहकर  ‘ गौ-आधारित अर्थव्यवस्था ‘ खड़ी कर सकता है। उनका कहना है कि अब असली नौकरी शुरू की है। गौ-सेवा की।

श्री  जाट श्री गौ सेवा समिति, बड़वाह  के मार्गदर्शन  में रोजाना सुबह – शाम  श्री खेड़ापति बजरंग गौशाला, काटकूट आकर खुद चारे और गौवंश की देखरेख करते हैं। उनका मानना है  कि गौशाला चलाना चैरिटी नहीं है। ये ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उनका संदेश है कि अपनी  मिट्टी के खुद मालिक बनो ।आने वाले समय में वो युवाओं और कॉरपोरेट कर्मचारियों को प्रेरित करना चाहते हैं, कि वो वीकेंड पर गौशाला आएं, खेती सीखें और  ‘केमिकल मुक्त जीवन ‘ अपनाएं।  श्री जाट का कहना है कि  लैपटॉप से हल तक का सफर आसान नहीं था, पर जब गौ माता की आंखों में संतुष्टि दिखती है, तो लगता है यही असली सफलता है।

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