सफेद मूसली बनी किसान की तरक्की की राह, खेती की कमाई से बेटे को पढ़ाई के लिए भेजा अमेरिका
28 जुलाई 2026, भोपाल: सफेद मूसली बनी किसान की तरक्की की राह, खेती की कमाई से बेटे को पढ़ाई के लिए भेजा अमेरिका – मध्यप्रदेश में लाभकारी खेती किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बन रही है। इसका उदाहरण खरगोन के किसान अनिल वर्मा हैं, जिन्होंने सफेद मूसली की खेती से अच्छी आमदनी हासिल कर अपने बेटे को उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका भेजा। वहीं, बलराम कृषि महोत्सव में जैविक खेती करने वाले किसान अविनाश दांगी ने भी अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि उनके जैविक उत्पाद आज देश के 13 राज्यों तक पहुंच रहे हैं।
सफेद मूसली की खेती से मिली नई पहचान
बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से संवाद के दौरान अनिल वर्मा ने बताया कि राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों और सहयोग से उन्हें नई दिशा मिली। वे सफेद मूसली के साथ पपीता, प्याज और सोयाबीन की भी खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि खेती से हुई आय के दम पर उन्होंने अपने बेटे प्रीतेश को अमेरिका के ओहियो विश्वविद्यालय में कंप्यूटर साइंस (एआई) में मास्टर्स की पढ़ाई के लिए भेजा, जहां वह पढ़ाई के साथ शिक्षण कार्य भी कर रहा है।
सफेद मूसली से खरगोन के किसानों की हो रही 7 लाख तक की कमाई
अनिल वर्मा ने बताया कि उनके क्षेत्र में करीब 1,500 एकड़ में सफेद मूसली की खेती की जा रही है, जिसमें लगभग 1,000 किसान जुड़े हैं। अच्छी गुणवत्ता वाली सफेद मूसली की बाजार में लगातार मांग बनी रहती है। इस खेती से किसानों को हर साल 5 से 7 लाख रुपये तक का मुनाफा हो जाता है।
मशीन मिलने से आसान हुआ काम
उन्होंने बताया कि पहले सफेद मूसली के छिलके हाथ से निकालने पड़ते थे, जिससे अधिक मजदूर और समय लगता था। बाद में केंद्र सरकार से 35 प्रतिशत सब्सिडी पर छिलका निकालने की मशीन मिली। अब क्षेत्र के 50 से 60 किसान इस मशीन का उपयोग कर रहे हैं, जिससे श्रम लागत कम हुई है और काम तेजी से होने लगा है।
54 एकड़ में जैविक खेती, 13 राज्यों तक पहुंच रहे उत्पाद
कार्यक्रम में जैविक खेती करने वाले किसान अविनाश दांगी ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से 54 एकड़ भूमि पर पूरी तरह जैविक खेती कर रहे हैं। उनके खेत पर करीब 40 गौवंश हैं और परिवार के आठ सदस्य खेती से जुड़े हैं।
वे हल्दी, धनिया और मिर्च जैसी मसाला फसलों का उत्पादन करते हैं और उनके जैविक उत्पाद आज देश के 13 राज्यों तक भेजे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सरकार की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाली योजनाओं से छोटे किसानों को काफी लाभ मिला है। उनका मानना है कि जैविक खेती करने वाले किसानों को भी प्रोत्साहन के रूप में अतिरिक्त सहायता मिलनी चाहिए।
जैविक और प्राकृतिक खेती को मिल रहा बढ़ावा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में कहा कि मध्यप्रदेश जैविक खेती के क्षेत्र में देश में अग्रणी है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत प्रदेश के 1,513 क्लस्टरों में 1.89 लाख किसानों को जोड़ा गया है। प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए देशी गोपालन पर 900 रुपये प्रतिमाह अनुदान का भी प्रावधान किया गया है। उन्होंने किसानों से आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक खेती अपनाकर आय बढ़ाने का आह्वान किया।
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