राज्य कृषि समाचार (State News)

कृषि में जल एवं संसाधन संरक्षण की आवश्यकता – वाटर रिसोर्स ग्रुप

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सीधी बिजाई तकनीक सें पानी एवं समय की बचत- डाॅ अंजलि परासनिस

20 अप्रैल 2024, सीतापुर: कृषि में जल एवं संसाधन संरक्षण की आवश्यकता – वाटर रिसोर्स ग्रुप – 2030 वाटर रिसोर्सेज ग्रुप (2030 WRG ) और कृषि विज्ञान केंद्र, कटिया , सीतापुर के संयुक्त तत्वावधान में धान की सीधी बुवाई तकनीक एवं कृषि-जल पारिस्थितिकी तंत्र, कृषि जल दोहन को कम करने व संसाधन संरक्षण तकनीक पर कृषक उत्पादन संगठनों की सहभागिता एवं क्षमता निर्माण विषय पर कार्यशाला आयोजित की गयी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ अंजलि परासनिस (वाटर रिसोर्सेज ग्रुप 2030) ने कहा कि कृषि में जल संसाधन संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, कृषि में अभियांत्रिकी का प्रयोग व जलवायु-स्मार्ट जल प्रबंधन तकनीक के साथ प्रकृति को पुनर्जीवित करने में पर्यावरण हितैशी तकनीकों का समावेश जरूरी है। उन्होने बताया कि एक किलो चावल पैदा करने में लगभग 2500 – 3000 लीटर पानी खर्च हो जाता है अत्यधिक पानी लगाने की प्रथा से जहां एक ओर पानी का दुरुपयोग अत्यधिक हो जाता है वहीं दूसरी ओर फसल लागत वृद्धि के साथ साथ उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ दयाशंकर श्रीवास्तव ने बताया कि अनुसंधान अध्ययनों से संकेत मिलता है कि – अन्य सिंचाई प्रथाओं की तुलना में – विशिष्ट फसलों में सूक्ष्म सिंचाई से डीएसआर – पारंपरिक तौर पर रोपित धान जो ग्रीन हाउस गैस का एक प्रमुख स्रोत है के विपरीत पानी और श्रम की बचत के अलावा, मीथेन उत्सर्जन से बचने में मदद करता है।

कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न कृषक उतपादन संगठनों के निदेशकों ने प्रतिभाग कर जल संसाधन संरक्षण एवं प्राकृतिक हितैषी तकनीकियो पर चर्चा की एवं सीधी बिजाई तकनीक में खरपतवार प्रबंधन की चुनौतियों पर संवाद स्थापित कर अनुभवों को साझा किया।

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