प्राकृतिक और जैविक खेती से बदल रही किसानों की तस्वीर, मध्यप्रदेश देश में अग्रणी
27 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी के साथ जैविक खेती में प्रदेश पहले स्थान पर; 1,513 क्लस्टर से जुड़े 1.89 लाख किसान
28 जुलाई 2026, भोपाल: प्राकृतिक और जैविक खेती से बदल रही किसानों की तस्वीर, मध्यप्रदेश देश में अग्रणी – पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर प्राकृतिक और जैविक खेती आज किसानों की आय और जीवनशैली में बदलाव का माध्यम बन रही है। मध्यप्रदेश देश में जैविक खेती के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। सरकार के अनुसार देश की जैविक खेती में प्रदेश की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत से अधिक है। वहीं, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत अब तक 1,513 क्लस्टर बनाए जा चुके हैं, जिनसे 1.89 लाख किसान जुड़े हैं।
खरगौन में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से ऑनलाइन संवाद किया। उन्होंने प्राकृतिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए किसानों से टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल खेती अपनाने की अपील की।
प्राकृतिक खेती के लिए 900 रुपये प्रतिमाह अनुदान
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए देशी गोपालन करने वाले किसानों को 900 रुपये प्रतिमाह अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित करना, रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करना और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है।
54 एकड़ में जैविक खेती, 13 राज्यों तक पहुंच रहे उत्पाद
प्रदेश के प्रगतिशील किसान अविनाश दांगी जैविक खेती की सफलता का उदाहरण हैं। वे पिछले कई वर्षों से 54 एकड़ भूमि पर पूरी तरह जैविक खेती कर रहे हैं। उनके खेत पर करीब 40 गोवंश हैं और परिवार के आठ सदस्य खेती से जुड़े हुए हैं।
अविनाश दांगी अपने खेतों में हल्दी, धनिया और मिर्च सहित विभिन्न मसाला फसलों का उत्पादन करते हैं। उनके जैविक उत्पाद देश के 13 राज्यों तक पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार प्राकृतिक खेती करने वाले छोटे किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं करने वाले जैविक किसानों को भी उर्वरक सब्सिडी के स्थान पर प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए।
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