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राज्य कृषि समाचार (State News)

मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड में इंटीग्रेटेड फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम से वित्तीय कार्यों में आएगी पारदर्शिता और गति

सभी मंडी समितियों में एकीकृत डिजिटल वित्तीय प्रबंधन प्रणाली

30 जुलाई 2026, भोपाल: मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड में इंटीग्रेटेड फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम से वित्तीय कार्यों में आएगी पारदर्शिता और गति – मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री कुमार पुरुषोत्तम ने कहा है कि मंडी बोर्ड की वित्तीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी एवं तकनीक आधारित बनाने के लिए इंटीग्रेटेड फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (आईएफएमएस) का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस प्रणाली के माध्यम से मंडी बोर्ड मुख्यालय, सातों आंचलिक कार्यालयों तथा प्रदेश की सभी मंडी समितियों की वित्तीय गतिविधियों का संचालन एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा।

इससे मंडी बोर्ड की कार्यप्रणाली आधुनिक तकनीक के अनुरूप सुदृढ़ होगी और किसानों, व्यापारियों एवं अन्य हितधारकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में भी सहायता मिलेगी।

प्रबंध संचालक श्री कुमार पुरुषोत्तम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आईएफएमएस के क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी वित्तीय प्रक्रियाओं को निर्धारित समय-सीमा में डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रणाली के सफल संचालन के लिए संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी प्रशिक्षण प्राप्त कर इसकी सभी कार्यप्रणालियों में दक्षता हासिल करें।

उन्होंने बताया कि आईएफएमएस के माध्यम से बजट निर्माण, आय-व्यय का लेखांकन, भुगतान एवं प्राप्तियों का प्रबंधन, वित्तीय अभिलेखों का संधारण, लेखा प्रतिवेदन तैयार करना तथा अंकेक्षण संबंधी कार्य अधिक सरल, पारदर्शी एवं प्रभावी ढंग से संपादित किए जा सकेंगे। इससे वित्तीय सूचनाएं रियल टाइम में उपलब्ध होंगी तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक सुदृढ़ और समयबद्ध बनेगी।

मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री कुमार पुरुषोत्तम ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में कुल 259 मंडी समितियाँ कार्यरत हैं, जिनमें 39 ए-ग्रेड, 42 बी-ग्रेड, 56 सी-ग्रेड तथा 122 डी-ग्रेड मंडी समितियाँ शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि वित्तीय अनुशासन एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ए एवं बी-ग्रेड मंडी समितियों के बजट की स्वीकृति मंडी बोर्ड मुख्यालय द्वारा प्रदान की जाती है, जबकि सी एवं डी-ग्रेड मंडी समितियों के बजट की स्वीकृति संबंधित आंचलिक कार्यालयों एवं मंडी स्तर से जारी की जाती है।
श्री पुरुषोत्तम ने कहा कि प्रत्येक मंडी समिति को स्वीकृत बजट के अनुरूप ही व्यय करना होगा। इस व्यवस्था से न केवल वित्तीय अनुशासन सुदृढ़ होगा, बल्कि व्ययों पर प्रभावी निगरानी भी सुनिश्चित की जा सकेगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित होगा कि कोई भी मंडी समिति स्वीकृत बजट से अधिक राशि व्यय न करे। इससे वित्तीय संसाधनों का नियोजित, पारदर्शी एवं उत्तरदायित्वपूर्ण उपयोग सुनिश्चित होगा तथा मंडी समितियों की वित्तीय कार्यप्रणाली और अधिक सुदृढ़ एवं जवाबदेह बनेगी।उन्होंने सभी मंडी सचिवों, आंचलिक संयुक्त संचालकों तथा वित्तीय अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे आईएफएमएस के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय सहयोग दें तथा शासन की मंशा के अनुरूप वित्तीय प्रबंधन को पूर्णतः डिजिटल एवं पारदर्शी बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

IFMS मंडी बोर्ड और उसकी 259 मंडी समितियों के लिए एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिस पर लेखा, बजट, भुगतान, ऑडिट और वित्तीय रिपोर्टिंग का पूरा कार्य एकीकृत रूप से संचालित किया जा सकता है। इससे मैनुअल लेखांकन पर निर्भरता कम होती है और वित्तीय जानकारी तत्काल उपलब्ध हो जाती है। 

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