किसान आंदोलन के बाद सरकार का बड़ा फैसला: मध्य प्रदेश में उर्वरक वितरण अब हाइब्रिड मोड से होगा
लेखक: सचिन बोंद्रिया
30 जुलाई 2026, इंदौर: किसान आंदोलन के बाद सरकार का बड़ा फैसला: मध्य प्रदेश में उर्वरक वितरण अब हाइब्रिड मोड से होगा – मध्य प्रदेश में उर्वरक वितरण व्यवस्था को लेकर किसानों के आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। मूंग खरीदी को लेकर किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ मंत्री समूह की बैठक में किसानों ने ई-विकास पोर्टल की तकनीकी समस्याओं और उर्वरक वितरण में आ रही परेशानियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद सरकार ने तत्काल निर्णय लेते हुए प्रदेश में 30 जुलाई 2026 से उर्वरक वितरण हाइब्रिड मोड में करने के आदेश जारी कर दिए। देर रात किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के सचिव श्री निशांत वरवड़े ने इस संबंध में सभी कलेक्टरों को विस्तृत निर्देश जारी किए। शासन ने नई व्यवस्था के संचालन के लिए आवश्यक प्रोफार्मा भी जारी कर दिया है, जिसमें प्रत्येक बिक्री का विवरण दर्ज किया जाएगा।
आदेश के अनुसार, प्रदेश में 1 अप्रैल 2026 से ई-विकास प्रणाली के माध्यम से उर्वरक वितरण किया जा रहा था। लेकिन ई-विकास प्रणाली के सरलीकरण के लिए गठित समिति की अनुशंसाएं प्राप्त होने तक किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हाइब्रिड व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया है।
किसानों और विक्रेताओं के लिए नई व्यवस्था – नई व्यवस्था के तहत 30 जुलाई तक ई-विकास प्रणाली से वितरित उर्वरकों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा। इसके बाद किसानों को किए जाने वाले प्रत्येक उर्वरक विक्रय में किसान के आधार कार्ड की छायाप्रति, मोबाइल नंबर तथा कंपनीवार उर्वरकों (यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी, एमओपी आदि) की मात्रा का रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से संधारित करना होगा।
बाद में पोर्टल पर होगी ऑनलाइन प्रविष्टि– हाइब्रिड मोड में उर्वरक वितरण के दौरान बिक्री ऑफलाइन दर्ज की जाएगी, जबकि उसका पूरा विवरण बाद में ई-विकास पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इसके लिए पैक्स, विपणन संघ के डबल लॉक केंद्र, एमपी एग्रो तथा निजी उर्वरक विक्रेताओं को निर्धारित रजिस्टर में सभी प्रविष्टियां संधारित करने के निर्देश दिए गए हैं। व्यवस्था के प्रभावी संचालन के लिए शासन ने किसान का आधार नंबर, मोबाइल नंबर, उर्वरक का नाम, मात्रा तथा बिक्री संबंधी जानकारी दर्ज करने हेतु निर्धारित प्रोफार्मा भी जारी किया है।
बैठक कर देंगे जानकारी, होगी नियमित समीक्षा– शासन ने सभी शासकीय संस्थाओं, पैक्स, एमपी एग्रो तथा निजी उर्वरक विक्रेताओं की बैठक आयोजित कर नई व्यवस्था की विस्तृत जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही इस व्यवस्था की नियमित समीक्षा भी की जाएगी, ताकि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता में किसी प्रकार की बाधा न आए।
किसानों को राहत, विक्रेताओं की बढ़ेगी जिम्मेदारी– खरीफ सीजन के दौरान प्रदेश के कई जिलों से ई-विकास पोर्टल पर तकनीकी समस्याओं, सर्वर की धीमी गति तथा उर्वरक वितरण में विलंब की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। कई स्थानों पर पोर्टल पर एंट्री नहीं होने से किसानों को उर्वरक मिलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे समय में सरकार द्वारा हाइब्रिड मोड लागू करने का निर्णय किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि अब तकनीकी बाधाओं के कारण उर्वरक वितरण नहीं रुकेगा। हालांकि, विक्रेताओं को पहले ऑफलाइन रिकॉर्ड संधारित करना होगा और बाद में उसी जानकारी को पोर्टल पर अपलोड करना होगा, जिससे उनके प्रशासनिक कार्य का दायित्व बढ़ जाएगा।
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