कस्टम हायरिंग सेंटर से बदली युवा किसान अमन की तकदीर, 215 किसान परिवारों को भी मिल रहा फायदा
30 जुलाई 2026, भोपाल: कस्टम हायरिंग सेंटर से बदली युवा किसान अमन की तकदीर, 215 किसान परिवारों को भी मिल रहा फायदा – सरकारी योजनाओं का सही उपयोग और नई सोच किसानों की जिंदगी बदल सकती है। इसका उदाहरण मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के भितरवार विकासखंड के ग्राम चीनौर के युवा किसान अमन गौर ने पेश किया है। कृषि अभियांत्रिकी विभाग की कस्टम हायरिंग सेंटर योजना का लाभ लेकर उन्होंने आधुनिक कृषि यंत्रों का केंद्र स्थापित किया, जिससे न केवल उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, बल्कि गांव के 215 किसान परिवारों को भी समय पर कृषि यंत्र उपलब्ध होने लगे हैं।
सरकारी अनुदान से शुरू किया कस्टम हायरिंग सेंटर
अमन गौर ने वर्ष 2022-23 में करीब 25 लाख रुपये की लागत से रिवर्सिबल प्लाऊ, रोटावेटर, कल्टीवेटर, सीड ड्रिल और स्ट्रॉ रीपर जैसे आधुनिक कृषि यंत्र खरीदे। इस परियोजना के लिए कृषि अभियांत्रिकी विभाग से उन्हें 9.37 लाख रुपये (9,37,800 रुपये) का अनुदान मिला। इसी सहयोग से उन्होंने गांव में कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना की, जहां से किसान किराये पर आधुनिक कृषि यंत्र लेकर खेती के कार्य आसानी से कर रहे हैं।
215 किसान परिवारों को मिल रहा सीधा लाभ
अमन गौर के कस्टम हायरिंग सेंटर से क्षेत्र के किसान समय पर बुवाई, जुताई और कटाई जैसे कृषि कार्य कर पा रहे हैं। वर्षभर में कृषि यंत्रों का करीब 960 घंटे उपयोग किया गया, जिससे 215 किसान परिवारों को सीधा लाभ मिला। महंगे कृषि यंत्र खरीदने में असमर्थ किसानों के लिए यह केंद्र आधुनिक खेती का बड़ा सहारा बन गया है।
सालभर में करीब 5 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा
आर्थिक रूप से भी यह पहल सफल साबित हुई है। वर्ष 2025-26 में कस्टम हायरिंग सेंटर से 11.54 लाख रुपये की आय हुई, जबकि संचालन पर 6.60 लाख रुपये खर्च हुए। इस तरह अमन गौर को एक वर्ष में लगभग 4.94 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। इससे यह मॉडल किसानों के लिए अतिरिक्त आय का अच्छा माध्यम बनकर सामने आया है।
नरवाई जलाने की समस्या भी हुई कम
कस्टम हायरिंग सेंटर में उपलब्ध स्ट्रॉ रीपर जैसे आधुनिक यंत्रों की मदद से अब फसल अवशेष (नरवाई) का बेहतर प्रबंधन किया जा रहा है। पहले जहां किसान नरवाई जलाने को मजबूर होते थे, वहीं अब मशीनों के उपयोग से खेतों की मिट्टी की उर्वरता बनी रहने के साथ वायु प्रदूषण में भी कमी आई है।
दूसरे किसानों और युवाओं के लिए बने प्रेरणा
अमन गौर की सफलता से प्रेरित होकर क्षेत्र के अन्य किसान और युवा भी आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करने और कृषि को लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं। इच्छुक किसान जे-फार्म (J-Farm) ऐप पर पंजीकरण कर कस्टम हायरिंग सेंटर की सेवाओं का लाभ ले सकते हैं।
अमन गौर ने अपनी सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली राज्य सरकार और कृषि अभियांत्रिकी विभाग की कस्टम हायरिंग सेंटर योजना को दिया। उनका कहना है कि इस योजना ने न केवल उनकी आय बढ़ाई, बल्कि पूरे गांव में आधुनिक खेती को बढ़ावा देने का रास्ता भी खोला है।
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