राज्य कृषि समाचार (State News)

जहां गेहूं-चना के खेतों की जगह अब खिल रहे हैं अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता के फूल, संरक्षित खेती से किसानों ने लिखी समृद्धि की नई इबारत

मध्यप्रदेश का ‘मिनी हॉलैंड’

रूपाखेड़ा ने बदली खेती की तस्वीर

03 अगस्त 2026, भोपाल: जहां गेहूं-चना के खेतों की जगह अब खिल रहे हैं अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता के फूल, संरक्षित खेती से किसानों ने लिखी समृद्धि की नई इबारत – धार जिले के बदनावर विकासखंड का छोटा-सा गांव रूपाखेड़ा इन दिनों केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर के प्रगतिशील किसानों के बीच चर्चा का विषय है। कभी पारंपरिक खेती और मौसम की अनिश्चितताओं से जूझने वाला यह गांव आज पॉलीहाउस और शेडनेट हाउस में होने वाली आधुनिक फूल एवं सब्जी उत्पादन प्रणाली के कारण ‘मध्यप्रदेश का मिनी हॉलैंड’ कहलाने लगा है। यह परिवर्तन केवल खेती का नहीं, बल्कि किसानों की सोच, तकनीक के प्रति विश्वास और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का भी परिणाम है।

संघर्ष से सफलता तक की यात्रा

लगभग 1,930 की आबादी और 391 परिवारों वाले रूपाखेड़ा में कुछ वर्ष पहले तक अधिकांश किसान गेहूं, चना, मक्का और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे। वर्षा पर आधारित खेती, बढ़ती उत्पादन लागत और बाजार की अनिश्चितता ने खेती की लाभप्रदता को सीमित कर दिया था। ऐसे समय में उद्यानिकी विभाग ने किसानों को संरक्षित खेती की तकनीक से परिचित कराया। किसानों ने जोखिम उठाया, आधुनिक तकनीक अपनाई और धीरे-धीरे गांव की तस्वीर बदलने लगी।

पॉलीहाउस बने समृद्धि के द्वार

आज रूपाखेड़ा में लगभग 1,44,407 वर्गमीटर क्षेत्र में 44 पॉलीहाउस संचालित हैं। यहां गुलाब, जरबेरा, लिलियम, जिप्सोफिला, ब्लू डेजी और व्हाइट डेजी जैसे उच्च गुणवत्ता वाले फूलों का उत्पादन किया जा रहा है, जिनकी मांग देश के अनेक बड़े शहरों में है। नियंत्रित तापमान और आर्द्रता के कारण फूलों की गुणवत्ता, रंग, आकार और शेल्फ लाइफ बेहतर रहती है, जिससे किसानों को बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त होता है।

शेडनेट हाउस से बढ़ी सब्जियों की गुणवत्ता

गांव में लगभग 42 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में 13 शेडनेट हाउस स्थापित हैं, जहां उन्नत किस्म की सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है। नियंत्रित वातावरण में होने वाली खेती से उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ी है, कीट एवं रोगों का प्रकोप कम हुआ है तथा रासायनिक दवाओं का उपयोग भी घटा है।

सरकारी योजना बनी परिवर्तन की आधारशिला

रूपाखेड़ा की सफलता के पीछे भारत सरकार की मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) योजना की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस योजना के तहत पॉलीहाउस निर्माण पर 19 लाख रुपये तक तथा शेडनेट हाउस निर्माण पर 14.20 लाख रुपये तक का अनुदान किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। इस वित्तीय सहायता ने आधुनिक तकनीक अपनाने का जोखिम कम किया और किसानों का आत्मविश्वास बढ़ाया।

केवल उत्पादन नहीं, आय भी बढ़ी

संरक्षित खेती ने किसानों को अनेक स्तरों पर लाभ पहुंचाया है। पानी की बचत, उर्वरकों का संतुलित उपयोग, कीट एवं रोग नियंत्रण, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन तथा आधुनिक पैकिंग और विपणन व्यवस्था ने खेती को अधिक लाभकारी बनाया है। अब किसान केवल अधिक उत्पादन नहीं कर रहे, बल्कि गुणवत्ता आधारित बाजार से बेहतर मूल्य भी प्राप्त कर रहे हैं। इससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।

प्रदेश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल

रूपाखेड़ा यह सिद्ध करता है कि यदि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सलाह, सरकारी सहायता और किसानों का साहस एक साथ मिल जाए, तो खेती की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। यह गांव आज उन हजारों किसानों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाना चाहते हैं।

अब लक्ष्य—वैश्विक पहचान

यदि रूपाखेड़ा में उत्पादित फूलों के लिए कोल्ड चेन, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात की समुचित व्यवस्था विकसित की जाए, तो यह गांव न केवल मध्यप्रदेश बल्कि देश के प्रमुख फ्लोरीकल्चर हब के रूप में स्थापित हो सकता है। जिस तरह नीदरलैंड (हॉलैंड) दुनिया में फूलों की खेती के लिए प्रसिद्ध है, उसी तरह रूपाखेड़ा भी भविष्य में भारतीय फ्लोरीकल्चर का एक सशक्त मॉडल बन सकता है।

रूपाखेड़ा मॉडल : एक नजर में

  • जिला: धार
  • विकासखंड: बदनावर
  • जनसंख्या: लगभग 1,930
  • परिवार: 391
  • पॉलीहाउस: 44 (1,44,407 वर्गमीटर)
  • शेडनेट हाउस: 13 (लगभग 42,000 वर्गमीटर)
  • मुख्य फसलें: गुलाब, जरबेरा, लिलियम, जिप्सोफिला, ब्लू डेजी, व्हाइट डेजी एवं उन्नत सब्जियां
  • प्रमुख योजना: मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH)

रूपाखेड़ा की कहानी बताती है कि खेती का भविष्य केवल अधिक उत्पादन में नहीं, बल्कि तकनीक, गुणवत्ता, मूल्य संवर्धन और बाजार से बेहतर जुड़ाव में छिपा है। यही सोच किसानों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बना सकती है।


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