राज्य कृषि समाचार (State News)

वैज्ञानिक तकनीक का कमाल! 5 दुधारू गायों से हर महीने 25 हजार रुपये कमा रहीं प्रेम कुमारी, जानिए कैसे  

30 जुलाई 2026, रायपुर: वैज्ञानिक तकनीक का कमाल! 5 दुधारू गायों से हर महीने 25 हजार रुपये कमा रहीं प्रेम कुमारी, जानिए कैसे – छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की एक महिला पशुपालक ने वैज्ञानिक तकनीक और पशुपालन विभाग के सहयोग से डेयरी व्यवसाय में सफलता की नई मिसाल कायम की है। बरमकेला विकासखंड के ग्राम कंचनपुर निवासी प्रेम कुमारी सारथी आज सिर्फ पांच दुधारू गायों के सहारे हर महीने करीब 25 हजार रुपये की नियमित आय अर्जित कर रही हैं। उनकी सफलता ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक पशुपालन और वैज्ञानिक तकनीकों की उपयोगिता को भी साबित कर रही है।

कृत्रिम गर्भाधान तकनीक से मिली नई पहचान

प्रेम कुमारी की सफलता की शुरुआत पशुपालन विभाग की कृत्रिम गर्भाधान  तकनीक से हुई। विभागीय पशु चिकित्सकों के मार्गदर्शन में कराए गए कृत्रिम गर्भाधान से पैदा हुई बछिया आज उच्च उत्पादक दुधारू गाय बन चुकी हैं। वर्तमान में उनके पास एचएफ (होल्स्टीन फ्रिजियन) और जर्सी नस्ल की कुल पांच दुधारू गायें हैं, जो उनके डेयरी व्यवसाय की मुख्य आधार हैं।

रोजाना 25 लीटर दूध का उत्पादन

वैज्ञानिक तरीके से पशुओं की देखभाल और बेहतर प्रबंधन का परिणाम यह है कि प्रेम कुमारी की डेयरी से प्रतिदिन लगभग 25 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। वे यह दूध बरमकेला स्थित अमृत डेयरी को 40 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचती हैं। इससे उन्हें हर महीने लगभग 25 हजार रुपये की नियमित आय प्राप्त हो रही है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है।

विभागीय मार्गदर्शन से बढ़ी उत्पादकता

प्रेम कुमारी बताती हैं कि पशुपालन विभाग और पशु चिकित्सालय बरमकेला की टीम ने उन्हें समय-समय पर कृत्रिम गर्भाधान, नियमित टीकाकरण, कृमिनाशन, स्वास्थ्य परीक्षण और संतुलित आहार प्रबंधन जैसी वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी। इन उपायों को अपनाने से पशु स्वस्थ रहे और दूध उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी हुई।

दूसरे पशुपालकों के लिए बनी प्रेरणा

प्रेम कुमारी का कहना है कि विभाग के निरंतर सहयोग और आधुनिक तकनीकों को अपनाने से उनका डेयरी व्यवसाय नई ऊंचाइयों पर पहुंचा है। इससे उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता मिली है और परिवार का जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है।

आज उनकी सफलता से प्रेरित होकर आसपास के कई किसान और ग्रामीण पारंपरिक पशुपालन छोड़कर उन्नत नस्ल सुधार और वैज्ञानिक पशुपालन तकनीकों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

वैज्ञानिक पशुपालन से बढ़ रही ग्रामीण आय

पशुपालन विभाग का मानना है कि कृत्रिम गर्भाधान, नस्ल सुधार, नियमित स्वास्थ्य प्रबंधन और वैज्ञानिक देखभाल जैसी तकनीकों को अपनाकर ग्रामीण पशुपालक कम संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। प्रेम कुमारी की सफलता इसी का उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं और आधुनिक तकनीक का सही उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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