वैज्ञानिकों ने दी टमाटर उत्पादन की सलाह

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02 नवम्बर 2020, टीकमगढ़। वैज्ञानिकों ने दी टमाटर उत्पादन की सलाह कृषि विज्ञान केन्द्र, टीकमगढ़ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी. एस. किरार वैज्ञानिक डॅा. एस. के. सिंह, डॉ. यू. एस. धाकड़, डॉ. आई डी. सिंह एवं जयपाल छिगरा द्वारा टमाटर के विपुल उत्पादन पर कृषको को तकनीकी सलाह दी गयी । टमाटर की बहुत सी किस्में अलग-अलग कम्पनियों एवं आई.सी.ए.आर.-आई.आई.एच.आर. बैंगलोर द्वारा अधिक उत्पादन देने वाली एवं त्रिगुणित रोगरोधी किस्म अर्कारक्षक एवं अर्कासम्राट विकसित की है लेकिन किसान को उत्पादन तकनीक का सही तकनीकी जानकारी न होनेे के कारण या समय पर कीट-व्याधियों का उचित प्रबंधन न करने के कारण काफी नुकसान उठाना पड़ता है । टमाटर की रोपणी ठीक तैयार कर रोपाई से पहले फफूंदनाशक दवा कार्बेण्डाजिन 12 प्रतिशत $मेकोजेब 63 प्रतिशत, डब्ल्यू. जी. 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर जड़ों को उपचरित करने के साथ ही सहारा (स्टेकिंग) पद्धति से रोपाई करे वैज्ञानिकों ने बताया कि टमाटर में पत्ताधब्बा व फलसडऩ, लघुपत्र रोग उकठा या म्लानि जीवाणु रोग ज्यादा फसल को हानि पहुंचाते है पत्तीधब्बा व फलसडऩ से पौधों की पत्तियों पर भूरे रंग के गोल एवं अनियमित आकार के धब्बे एवं इन पर काले रंग की बिन्दू के समान फफूंदी संरचनायें दिखाई देती है फलों में गड्ढेदार धब्बे व फल सडऩे लगते है । लघुपत्र रोग से ग्रासित पत्तियॉं अत्याधिक छोटी एवं समूह में दिखाई देती है तथा पौधों मे फूल नहीं लगते है और म्लानि जीवाणु रोग से अचानक पौधा मुरझा कर सूख कर मर जाते है, इन बीमारी से बचाव के लिये रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन एवं बीज और रोपणी का फफूंदनाशक दवा मेंकोजेब 3 ग्राम प्रति ली. पानी के घोल से उपचार कर रोपाई करे और चूसक कीड़ों से बचाव के लिये मेटासिस्टॉक्स या डाइमेथोएट या इमिडाक्लोप्रिड दवाओं का छिड़काव करे ।
फल मक्खी कीट के नियंत्रण हेतु फ्लूबेन्डामाइड 20 प्रतिशत डब्ल्यू जी. या नोवालुरोन 10 प्रतिशत ई.सी. दवाओं का छिड़काव करें।

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