सतना: धान की सीधी बुवाई पद्धति अपनाने के लिए दिशा-निर्देश जारी
कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी
13 जून 2026, सतना: सतना: धान की सीधी बुवाई पद्धति अपनाने के लिए दिशा-निर्देश जारी – जिले में धान की खेती को अधिक लाभकारी और संसाधन-सक्षम बनाने के उद्देश्य से किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) पद्धति अपनाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग के अनुसार यह विधि न केवल पानी और श्रम की बचत करती है, बल्कि समय पर बुवाई होने से उत्पादन में भी वृद्धि होती है।
कृषि विज्ञान केंद्र मझगवां के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख ने बताया कि बेहतर जमाव और सिंचाई प्रबंधन के लिए खेत का समतल होना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए लेजर लैंड लेवलर का उपयोग सर्वाेत्तम माना गया है, हालांकि पारम्परिक जुताई और पाटा विधि से भी खेत समतल किया जा सकता है। डीएसआर के अंतर्गत नम और सूखी दो विधियां अपनाई जा सकती हैं। नम विधि में बुवाई से पहले सिंचाई कर खेत तैयार किया जाता है, जबकि सूखी विधि में पहले बुवाई कर बाद में सिंचाई या वर्षा पर निर्भर रहा जाता है। दोनों ही स्थितियों में सीड ड्रिल या जीरो टिलेज मशीन का उपयोग उपयुक्त बताया गया है। धान की सीधी बुवाई के लिए 15 से 25 जून का समय सबसे उपयुक्त माना गया है, जो मानसून आगमन से 10-15 दिन पूर्व होता है। जिले के लिए एमटीयू-1010, जेआर-206 और जेआर-21 किस्मों की अनुशंसा की गई है। सामान्य किस्मों के लिए 20-25 किलोग्राम तथा संकर धान के लिए 8-10 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ पर्याप्त बताया गया है।
बीज को बुवाई से पूर्व फफूंदनाशी घोल (कार्बेन्डाजिम $ मैन्कोजेब) से उपचारित करने की सलाह दी गई है। बुवाई के समय बीज की गहराई 2-3 सेमी तथा पंक्ति दूरी 18-22.5 सेमी रखने की अनुशंसा की गई है। खरपतवार नियंत्रण के लिए रासायनिक और यांत्रिक दोनों उपाय सुझाए हैं। जमाव पूर्व और जमाव के बाद अनुशंसित खरपतवारनाशियों के उपयोग के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर हाथ से निराई करने की भी सलाह दी गई है, ताकि प्रतिरोधकता विकसित न हो। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे प्रमाणित बीज का उपयोग करें और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर अधिक उत्पादन प्राप्त करें।
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