पशुपालन (Animal Husbandry)राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

10 साल में 70% बढ़ा देश का दूध उत्पादन, राज्यसभा में ललन सिंह ने गिनाईं पशुपालन क्षेत्र की उपलब्धियां

07 अगस्त 2026, नई दिल्ली: 10 साल में 70% बढ़ा देश का दूध उत्पादन, राज्यसभा में ललन सिंह ने गिनाईं पशुपालन क्षेत्र की उपलब्धियां – केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि केंद्र सरकार पशुधन विकास को मजबूत करने, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, पशु स्वास्थ्य में सुधार और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने के लिए कई लक्षित योजनाओं का प्रभावी ढंग से संचालन कर रही है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम), राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम), पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (एएचआईडीएफ) और पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी) जैसी योजनाओं के माध्यम से पशुधन क्षेत्र में अवसंरचना विकास, वैज्ञानिक प्रजनन, रोग नियंत्रण, चारा विकास और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है।

असम में सुअर पालन को मिला बढ़ावा

मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय पशुधन मिशन और पशुपालन अवसंरचना विकास कोष के तहत असम में आधुनिक सुअर पालन फार्म और सुअर मांस प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना के लिए सहायता दी जा रही है। पिछले तीन वर्षों में राष्ट्रीय पशुधन मिशन के उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत 23 सुअर पालन फार्म सहित 50 पशुधन परियोजनाओं के लिए 4.98 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी की गई है।

इसके अलावा पशुपालन अवसंरचना विकास कोष के तहत एक सुअर पालन फार्म सहित आठ परियोजनाओं के लिए 1.44 करोड़ रुपये की ब्याज सब्सिडी उपलब्ध कराई गई है।

आनुवंशिक सुधार और पशु स्वास्थ्य पर निवेश

ललन सिंह ने बताया कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत मवेशियों के आनुवंशिक सुधार के लिए 41.67 करोड़ रुपये, पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 124.29 करोड़ रुपये तथा राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत विभिन्न गतिविधियों के लिए 7.74 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक सुअर पालन को बढ़ावा देने के लिए असम में सुअर वीर्य संग्रहण एवं प्रसंस्करण प्रयोगशाला की स्थापना हेतु 1.80 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसका उद्देश्य कृत्रिम गर्भाधान और आनुवंशिक सुधार को बढ़ावा देना है। विभाग ने ‘सुअर पालन में सुचारू पशुपालन पद्धतियां’ नामक पुस्तिका भी प्रकाशित की है। इसके अलावा राज्य में 9,92,863 क्लासिकल स्वाइन फीवर टीके नि:शुल्क लगाए गए हैं, जिससे रोग नियंत्रण, रोजगार सृजन और निर्यात क्षमता को बढ़ावा मिला है।

10 वर्षों में 70 प्रतिशत बढ़ा दूध उत्पादन

मंत्री ने कहा कि भारत में दुग्ध उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2014-15 में प्रति गाय औसत दूध उत्पादकता 1,648 किलोग्राम प्रति वर्ष थी, जो 2024-25 में बढ़कर 2,251 किलोग्राम प्रति वर्ष हो गई है। इसी अवधि में राष्ट्रीय दूध उत्पादन 146 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर 248 मिलियन मीट्रिक टन पहुंच गया, जो लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

चारा विकास के लिए कई कदम

उन्होंने बताया कि चारे की कमी दूर करने के लिए राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत गुणवत्तापूर्ण चारा बीज उत्पादन, घास, साइलेज और टोटल मिक्स्ड रेशन (टीएमआर) के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा दिया जा रहा है। पिछले पांच वर्षों में 1,152.40 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिससे 1.6 लाख टन गुणवत्तापूर्ण चारा बीज का उत्पादन हुआ।

राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम-ईडीपी) के तहत चारा विकास से जुड़ी 204 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। वहीं पशुपालन अवसंरचना विकास कोष के माध्यम से 3,602.47 करोड़ रुपये के निवेश से 174 पशु आहार संयंत्रों को सहायता प्रदान की गई है।

एफपीओ, अनुसंधान और डिजिटल सेवाओं पर जोर

मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) ने 100 चारा-समृद्ध किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) स्थापित किए हैं। वहीं आईसीएआर-भारतीय घासभूमि एवं चारा अनुसंधान संस्थान ने उच्च उत्पादकता वाली चारा किस्में विकसित की हैं, राज्यवार चारा विकास योजनाएं तैयार की हैं और 10 लाख से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए लू प्रबंधन दिशानिर्देश भी जारी किए हैं तथा अधिक तापमान सहन करने वाली स्वदेशी मवेशी नस्लों को बढ़ावा दिया जा रहा है। भारत पशुधन योजना के तहत 1962 किसान ऐप के माध्यम से डिजिटल परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे किसानों को वैज्ञानिक राशन संतुलन पद्धतियां अपनाने में मदद मिल रही है।

एफएमडी और ब्रुसेलोसिस टीकाकरण के लिए 100% केंद्रीय सहायता

आंध्र प्रदेश से जुड़े एक अन्य प्रश्न के उत्तर में ललन सिंह ने बताया कि पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत खुरपका एवं मुंहपका रोग (एफएमडी) और ब्रुसेलोसिस के खिलाफ टीकाकरण के लिए केंद्र सरकार राज्यों को 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता प्रदान कर रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य पशुधन क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, बेहतर अवसंरचना, वैज्ञानिक प्रबंधन और प्रभावी रोग नियंत्रण के माध्यम से मजबूत बनाना है, ताकि पशुपालकों की आय बढ़े, दुग्ध उत्पादन में निरंतर वृद्धि हो और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।

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