बिहार में 86 कृषि यंत्रों पर 80% तक सब्सिडी, 30 सितंबर तक करें ऑनलाइन आवेदन
19 सितंबर 2026, पटना: बिहार में 86 कृषि यंत्रों पर 80% तक सब्सिडी, 30 सितंबर तक करें ऑनलाइन आवेदन – बिहार सरकार के कृषि विभाग ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन के तहत किसानों से आवेदन मांगे हैं। इसके तहत ट्रैक्टर से लेकर ड्रोन तक 86 तरह के कृषि यंत्रों पर 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। ऑनलाइन आवेदन 8 सितंबर से शुरू हो चुके हैं और अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 है।
विभाग की ओर से जारी सूची में ट्रैक्टर, पावर ट्रेलर, कल्टीवेटर, सीड ड्रिल, हैप्पी सीडर, कंबाइन हार्वेस्टर, थ्रेशर, रीपर, मल्चर, श्रेडर, स्ट्रॉ रीपर, स्प्रे मशीन और पंप सेट जैसे यंत्र शामिल हैं। योजना का नाम केंद्र प्रायोजित कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन (सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाइजेशन) है, जिसे राज्य में कृषि विभाग लागू करता है।
बिहार में ज्यादातर किसानों के पास एक-दो एकड़ की छोटी जोत है, जिस वजह से महंगे कृषि यंत्र अकेले खरीदना मुश्किल होता है। यही वजह है कि सरकार व्यक्तिगत खरीद के साथ-साथ सामूहिक इस्तेमाल वाले मॉडल पर भी जोर दे रही है।
पिछले कुछ वर्षों से बिहार सरकार हर साल खरीफ और रबी सीजन शुरू होने से पहले यंत्रीकरण योजना के तहत आवेदन मंगाती रही है, ताकि किसान समय पर मशीनें खरीद सकें। इस बार अनुदान का दायरा 86 यंत्रों तक बढ़ाकर मल्चर, स्ट्रॉ रीपर और ड्रोन जैसी नई तकनीकों को भी शामिल किया गया है, जो फसल अवशेष प्रबंधन और सटीक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम है।
कस्टम हायरिंग सेंटर पर सबसे ज्यादा मदद
व्यक्तिगत किसानों के अलावा किसान समूह और सहकारी संस्थाएं भी इस योजना का लाभ उठा सकती हैं। कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने पर लागत का 40 प्रतिशत, अधिकतम 4 लाख रुपये तक की सहायता मिलेगी। कृषि यंत्र बैंक के लिए 80 प्रतिशत तक और अधिकतम 8 लाख रुपये की मदद तय है।
विशेष कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए अधिकतम 12 लाख रुपये तक अनुदान का प्रावधान है, जिसका मकसद छोटे व सीमांत किसानों को महंगे यंत्र खरीदे बिना किराये पर आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराना है। ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए भी अलग से सरकारी सहायता दी जा रही है, ताकि खेतों में कीटनाशक और उर्वरक छिड़काव के लिए ड्रोन सेवा गांव स्तर पर ही उपलब्ध हो सके।
इन केंद्रों से न सिर्फ मशीन के मालिक किसान को किराये से आमदनी होती है, बल्कि आसपास के छोटे किसान भी बुवाई और कटाई के व्यस्त समय में समय पर यंत्र किराये पर लेकर काम पूरा कर पाते हैं, जिससे फसल की बर्बादी कम होती है।
ऐसे करें आवेदन
इच्छुक किसान कृषि विभाग के फार्म मैकेनाइजेशन पोर्टल (ओएफमास) पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। चयन लॉटरी के जरिए होता है और चुने गए किसानों को यंत्र खरीदने के लिए 15 दिन का परमिट मिलता है।
किसान को पहले यंत्र की पूरी कीमत खुद चुकानी होती है, इसके बाद तय अनुदान राशि सीधे लाभार्थी बैंक खाते (डीबीटी) में भेजी जाती है। योजना का मकसद खेती की लागत और मजदूरों पर निर्भरता घटाकर जुताई, बुवाई और कटाई जैसे काम समय पर पूरे कराना है।
आवेदन के समय किसान को आधार कार्ड, जमीन के कागजात या स्व-घोषणा पत्र और बैंक खाता विवरण पोर्टल पर अपलोड करना होता है। आवेदन की स्थिति किसान पोर्टल पर लॉगिन करके कभी भी देखी जा सकती है।
कृषि विभाग के अनुसार आवेदन करने वाले किसानों की संख्या ज्यादा होने और यंत्रों की सीमित उपलब्धता की वजह से लॉटरी प्रणाली अपनाई जाती है, ताकि चयन प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। जिन किसानों का चयन नहीं होता, वे अगले चरण के लिए दोबारा आवेदन कर सकते हैं।
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