सरलाबेन एआई ऐप: भारत के डेयरी किसानों तक पहुंची पशु देखभाल की नई तकनीक
09 सितंबर 2026, नई दिल्ली: सरलाबेन एआई ऐप: भारत के डेयरी किसानों तक पहुंची पशु देखभाल की नई तकनीक- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अब प्रयोगशालाओं और तकनीकी केंद्रों से निकलकर भारत के गांवों तक पहुंच रही है। सरलाबेन नाम का नया ऐप इसका एक उदाहरण है कि किस तरह एआई को बड़े पैमाने पर किसानों और पशुपालन क्षेत्र की मदद के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।अमूल के डेयरी सहकारी नेटवर्क के लिए विकसित यह एआई आधारित सहायक किसानों को पशु स्वास्थ्य, आहार, प्रजनन, दुग्ध उत्पादन तथा कृषि और सरकारी सेवाओं से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया है। गुजरात में लाखों डेयरी उत्पादक पहले से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं और इसके उपयोगकर्ताओं में महिलाओं की भी महत्वपूर्ण भागीदारी है।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान इस ऐप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान मिला, जब इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी ने सरलाबेन को इस बात के उदाहरण के रूप में पेश किया कि किस तरह कृत्रिम बुद्धिमत्ता किसी विचार से आगे बढ़कर कम समय में बड़े पैमाने पर ग्रामीण उपयोग की सेवा बन सकती है।नीलेकणी ने बताया कि जब उन्होंने 8 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से किसानों के लिए एआई के इस्तेमाल पर चर्चा की, तो प्रधानमंत्री ने सवाल किया कि ऐसी तकनीक का इस्तेमाल पशुओं के लिए क्यों नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री ने बताया कि किसान अपनी समस्या बता सकता है, लेकिन पशु यह नहीं बता सकता कि वह बीमार है। इस बातचीत के बाद डेयरी क्षेत्र के लिए एआई आधारित समाधान विकसित करने की दिशा में काम शुरू हुआ। नीलेकणी के अनुसार, यह ऐप 11 फरवरी को शुरू हुआ, यानी प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक के लगभग तीन सप्ताह बाद।
किसान सलाह से पशुओं की समझ तक
सरलाबेन के पीछे विचार अपेक्षाकृत सरल है: डेयरी किसानों को जरूरत के समय उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना, ताकि उन्हें हर छोटी समस्या के लिए केवल पशु चिकित्सक के पास जाने या अन्य माध्यमों पर निर्भर रहने की आवश्यकता न हो।किसान अपने पशुओं से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं, गर्भावस्था, प्रजनन, चारे और दुग्ध उत्पादन जैसे विषयों पर सलाह ले सकते हैं। ऐप स्थानीय भाषाओं में जानकारी उपलब्ध कराता है, जिससे उन किसानों के लिए भी इसका इस्तेमाल आसान हो जाता है, जो अंग्रेजी भाषा में डिजिटल सेवाओं का उपयोग करने में सहज नहीं हैं।भारत के डेयरी क्षेत्र के लिए इस पहल का संभावित महत्व काफी बड़ा है। समिट के दौरान नीलेकणी द्वारा बताए गए आंकड़ों के अनुसार, अमूल का सहकारी नेटवर्क लगभग 36 लाख दुग्ध उत्पादकों, करीब 4 करोड़ पशुओं और हर साल लगभग 2 अरब दूध लेन-देन से जुड़ा है।यह व्यापक पहुंच इस परियोजना को कृषि के लिहाज से विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। सरलाबेन को केवल एक स्वतंत्र तकनीकी उत्पाद के रूप में विकसित करने के बजाय ऐसी मौजूदा सहकारी व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है, जिसके किसानों, पशु चिकित्सकों और दूध संग्रह नेटवर्क के साथ पहले से संबंध हैं।
भारत के कृषि आंकड़ों का इस्तेमाल
इस पहल की एक खास विशेषता सहकारी व्यवस्था में उपलब्ध बड़ी मात्रा में परिचालन संबंधी आंकड़ों पर इसकी संभावित निर्भरता है।दूध खरीद, पशु चिकित्सा सेवाओं, प्रजनन और पशु प्रबंधन से प्राप्त जानकारी एआई प्रणालियों को अधिक स्थानीय और परिस्थितियों के अनुरूप जवाब देने में मदद कर सकती है। नीलेकणी ने अमूल के आंकड़ों को भारत में रखने और सहकारी संस्था के आंकड़ा ढांचे पर नियंत्रण बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया।कृषि क्षेत्र में एआई के विस्तार के साथ यह दृष्टिकोण और महत्वपूर्ण हो सकता है। किसानों को ऐसी सलाह की आवश्यकता होती है, जो स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखे—जैसे पशुओं की नस्ल, चारे की उपलब्धता, मौसम, बीमारी के स्वरूप और खेती-पशुपालन की स्थानीय पद्धतियां। विश्वसनीय स्थानीय आंकड़ों से जुड़े एआई सिस्टम सामान्य डिजिटल सूचना स्रोतों की तुलना में अधिक उपयोगी सहायता उपलब्ध करा सकते हैं।
कृषि में एआई के लिए पशुपालन क्यों महत्वपूर्ण है
सरलाबेन का उदाहरण कृषि में एआई की परिभाषा को भी व्यापक बनाता है। कृषि में एआई को लेकर दुनिया भर में होने वाली चर्चा अब तक मुख्य रूप से फसल निगरानी, सटीक छिड़काव, उपग्रह चित्रों, मौसम पूर्वानुमान और स्वचालित मशीनरी पर केंद्रित रही है। लेकिन पशुपालन भी एआई के इस्तेमाल का एक बड़ा क्षेत्र बन सकता है।पशुओं में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की शुरुआती पहचान से संभावित नुकसान कम किया जा सकता है और किसान समय रहते पशु चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं। वहीं, प्रजनन और पोषण से जुड़ी बेहतर जानकारी पशुओं के प्रबंधन और दुग्ध उत्पादन में मदद कर सकती है।छोटे डेयरी उत्पादकों के लिए, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां पशु चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच सीमित है, हर समय उपलब्ध रहने वाला डिजिटल सहायक जानकारी हासिल करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।प्रधानमंत्री मोदी ने बाद में सरलाबेन को जमीनी स्तर पर एआई के इस्तेमाल के उदाहरण के रूप में भी सामने रखा। भारत सरकार ने इसे आम नागरिकों, विशेष रूप से ग्रामीण समुदायों के लिए एआई को अधिक सुलभ और उपयोगी बनाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा बताया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में एआई अपनाने का मॉडल
8 जनवरी को विचार सामने आने से लेकर 11 फरवरी को ऐप के शुरू होने तक सरलाबेन की यात्रा, एआई इम्पैक्ट समिट में नंदन नीलेकणी की प्रस्तुति का एक प्रमुख बिंदु रही।भारत के लिए यह परियोजना डेयरी किसानों के लिए केवल एक नई तकनीकी सुविधा से कहीं अधिक है। यह एक ऐसे मॉडल को दर्शाती है, जिसमें सरकार की सोच, एक बड़ा कृषि सहकारी संगठन, तकनीकी संस्थान और मौजूदा ग्रामीण आंकड़ा ढांचा मिलकर एआई आधारित सेवाओं को तेजी से बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचा सकते हैं।अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इसी तरह के मॉडल को पशु स्वास्थ्य और डेयरी उत्पादन से आगे कृषि के अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है, जैसे फसल सलाह, कीट और रोग प्रबंधन, सिंचाई, बाजार संबंधी जानकारी, मौसम आधारित निर्णय और सरकारी योजनाओं तक पहुंच।
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