पशुपालन (Animal Husbandry)

एंथ्रेक्स रोग की पहचान और एंथ्रेक्स से मृत पशु का सुरक्षित प्रबंधन

लेखक: डॉ. निर्भय भावसार¹,डॉ.आशीष वर्मा2,डॉ.संतोष मौर्य3, ¹एम.वी. एससी.–प्रसार शिक्षा विभाग, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली, 2,3बी.वी.एससी.एवं ए.एच.- पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय, रीवा

03 सितंबर 2026, भोपाल: एंथ्रेक्स रोग की पहचान और एंथ्रेक्स से मृत पशु का सुरक्षित प्रबंधन – पशुओं में होने वाली कुछ बीमारियाँ ऐसी होती हैं जिनमें बीमारी की पहचान जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतना ही महत्वपूर्ण होता है मृत पशु का सही तरीके से प्रबंधन। एंथ्रेक्स (Anthrax) ऐसी ही एक गंभीर बीमारी है। यह रोग गाय, भैंस, भेड़, बकरी जैसे पशुओं को प्रभावित कर सकता है और संक्रमित पशु से मनुष्य में भी संक्रमण फैल सकता है। इसकी एक विशेष चिंता यह है कि संक्रमित पशु के शव से निकलने वाले जीवाणु पर्यावरण में लंबे समय तक टिके रहने वाले बीजाणु बना सकते हैं। इसलिए एंथ्रेक्स से हुई पशु मृत्यु को सामान्य पशु मृत्यु मानकर शव को खोलना या इधर-उधर ले जाना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

एंथ्रेक्स क्या है?- एंथ्रेक्स एक गंभीर और तीव्र जीवाणुजनित जूनोटिक रोग है। इसका कारण बैसिलस एन्थ्रेसिसनामक जीवाणु है। यह रोग मुख्य रूप से चरने वाले पशुओं में देखा जाता है और कई बार स्वस्थ दिखने वाला पशु अचानक बीमार होकर थोड़े समय में मर सकता है।

एंथ्रेक्स की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका बीजाणु (spore) बनाना है। संक्रमित पशु के शव को यदि खुले में काटा जाए या शव से रक्त और अन्य संक्रमित पदार्थ मिट्टी में फैल जाएं, तो जीवाणु बीजाणु बना सकते हैं। ये बीजाणु लंबे समय तक पर्यावरण में बने रह सकते हैं और भविष्य में दूसरे पशुओं तथा मनुष्यों के लिए संक्रमण का स्रोत बन सकते हैं।

एंथ्रेक्स की पहचान कैसे करें?-  एंथ्रेक्स में बीमारी बहुत तेजी से बढ़ सकती है। विशेष रूप से गाय और भैंस जैसे बड़े पशुओं में कभी-कभी पशुपालक को बीमारी के स्पष्ट लक्षण देखने का अवसर ही नहीं मिलता और पशु अचानक मृत पाया जाता है।जीवित पशु में तेज बुखार, बेचैनी, कमजोरी, सांस लेने में कठिनाई, कंपकंपी और शरीर की सामान्य स्थिति में तेजी से गिरावट जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में नाक, मुंह या अन्य प्राकृतिक छिद्रों से गहरा या रक्तमिश्रित तरल निकल सकता है तथा शरीर में सूजन भी दिखाई दे सकती है।

हालांकि इन लक्षणों के आधार पर अकेले एंथ्रेक्स की निश्चित पुष्टि नहीं की जा सकती। अचानक हुई मृत्यु और संदिग्ध रक्तस्राव की स्थिति में एंथ्रेक्स की संभावना को गंभीरता से लेना चाहिए।

सबसे जरूरी सावधानी—शव को न खोलें- यदि किसी पशु की अचानक मृत्यु हुई है और एंथ्रेक्स की आशंका है, तो शव को काटकर खोलना, पोस्टमार्टम करना या अनावश्यक रूप से छेड़छाड़ करना नहीं चाहिए। शव को खोलने से ऑक्सीजन के संपर्क में जीवाणु बीजाणु बना सकते हैं और संक्रमित सामग्री आसपास की मिट्टी तथा पर्यावरण में फैल सकती है। इससे बीमारी भविष्य में उसी क्षेत्र में दोबारा दिखाई देने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए संदिग्ध शव के मामले में सबसे पहला कदम है—शव को न खोलें और तुरंत पशु चिकित्सक या संबंधित पशु स्वास्थ्य अधिकारी को सूचना दें।

एंथ्रेक्स से मृत पशु का प्रबंधन कैसे करें?- एंथ्रेक्स से मृत या संदिग्ध पशु के शव का प्रबंधन प्रशिक्षित अधिकारियों और स्थानीय सरकारी पशु स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाना चाहिए। पशुपालक को स्वयं शव को काटना, चमड़ी उतारना, शव को वाहन में लादकर कहीं ले जाना या मांस का उपयोग करना नहीं चाहिए। जहां आवश्यक हो, अधिकारी उपयुक्त जैव-सुरक्षा उपायों के साथ शव के सुरक्षित निस्तारण, संक्रमित स्थान की सफाई और संक्रमण नियंत्रण की व्यवस्था करते हैं। निस्तारण की विधि स्थानीय नियमों, पर्यावरणीय परिस्थितियों और उपलब्ध सरकारी प्रोटोकॉल के अनुसार तय की जानी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शव को कुत्तों, जंगली जानवरों या अन्य पशुओं के संपर्क में नहीं आने देना चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमित सामग्री का फैलाव हो सकता है।

मनुष्यों के लिए भी खतराएंथ्रेक्स एक जूनोटिक रोग है। संक्रमित पशु के रक्त, ऊतक, स्राव या दूषित सामग्री के संपर्क में आने से मनुष्य संक्रमित हो सकता है। पशुपालक, पशु चिकित्सक, पशु परिचर, शव प्रबंधन में शामिल कर्मचारी और संक्रमित पशुओं के साथ काम करने वाले लोग विशेष सावधानी बरतें। संदिग्ध शव को नंगे हाथों से छूने, चमड़ी उतारने या मांस का उपयोग करने से बचना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति का संदिग्ध संक्रमित पशु या शव से संपर्क हुआ हो, तो उसे तुरंत संबंधित स्वास्थ्य अधिकारी या चिकित्सक को इसकी जानकारी देनी चाहिए।

पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण संदेशयदि कोई गाय, भैंस, भेड़ या बकरी बिना स्पष्ट कारण अचानक मर जाती है, विशेषकर ऐसे क्षेत्र में जहां पहले एंथ्रेक्स के मामले सामने आ चुके हों, तो सावधानी बरतना बहुत जरूरी है।

याद रखें—

  • अचानक हुई संदिग्ध मृत्यु को सामान्य न समझें।
  • संदिग्ध शव को न काटें और न ही पोस्टमार्टम करें।
  • शव को नंगे हाथों से न छुएं।
  • शव की चमड़ी न उतारें और मांस का उपयोग न करें।
  • शव को दूसरे स्थान पर ले जाने से बचें।
  • कुत्तों और अन्य पशुओं को शव से दूर रखें।
  • तुरंत पशु चिकित्सक या संबंधित पशु स्वास्थ्य अधिकारी को सूचना दें।
  • क्षेत्र में बीमारी की पुष्टि होने पर सरकारी निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई करें।

निष्कर्ष- एंथ्रेक्स में रोग की शीघ्र पहचान से भी अधिक महत्वपूर्ण है संदिग्ध मृत पशु का सुरक्षित प्रबंधन। अचानक हुई पशु मृत्यु को देखकर शव खोलना या उसका मांस एवं चमड़ा उपयोग करना पशुपालक, अन्य पशुओं और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।सही समय पर सूचना, उचित जैव-सुरक्षा, सुरक्षित शव निस्तारण और आसपास के पशुओं की निगरानी से एंथ्रेक्स के प्रसार को रोकने में महत्वपूर्ण सहायता मिल सकती है।

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