पशुपालन (Animal Husbandry)राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

देश में फिर बढ़ा लंपी का खतरा, 29 राज्यों के 220 जिलों पर नजर

बिहार के 27 जिले सबसे अधिक जोखिम वाले

मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में पशुपालकों को सतर्क रहने की जरूरत

02 सितंबर 2026, नई दिल्ली: देश में फिर बढ़ा लंपी का खतरा, 29 राज्यों के 220 जिलों पर नजर – देश में गोवंशीय पशुओं को प्रभावित करने वाली लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) का खतरा एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। सरकारी अलर्ट रिपोर्ट के मुताबिक करीब 29 राज्यों के 220 जिलों में इस बीमारी के फैलने की आशंका जताई गई है। इसके बाद पशुपालन विभागों और पशुपालकों को सतर्क रहने की जरूरत बताई जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार बिहार के 27 जिले सबसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। इसके अलावा तमिलनाडु, राजस्थान, झारखंड, कर्नाटक, मध्यप्रदेश और गोवा के कई जिलों को भी संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में रखा गया है। मध्यप्रदेश के करीब 10 जिलों का उल्लेख जोखिम वाली सूची में किया गया है।

लंपी स्किन डिजीज एक वायरस जनित बीमारी है, जो मुख्य रूप से गाय और अन्य गोवंशीय पशुओं को प्रभावित करती है। इसका संक्रमण मच्छर, मक्खी और किलनी जैसे खून चूसने वाले वाहकों के माध्यम से एक पशु से दूसरे पशु तक पहुंच सकता है। संक्रमित पशु में बुखार, शरीर पर गांठें, त्वचा पर घाव, कमजोरी और दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

पशुपालक बरतें सावधानी

बीमारी के संभावित प्रसार को देखते हुए पशुपालकों को पशु बाड़े की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने, पानी जमा नहीं होने देने और मच्छर-मक्खियों पर नियंत्रण के उपाय करने की सलाह दी जाती है। किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर उसे तत्काल स्वस्थ पशुओं से अलग रखना चाहिए और पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

मध्यप्रदेश में भी पूर्व में लंपी संक्रमण के मामलों के बाद पशुपालन विभाग ने टीकाकरण और संक्रमित पशुओं को अलग रखने सहित कई एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए थे।

पशुपालकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज न करें। समय पर पहचान, पशु को अलग रखना, चिकित्सीय सलाह और टीकाकरण संक्रमण के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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