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पशुपालन (Animal Husbandry)राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

पशुओं का टीकाकरण बना किसानों की ढाल, FMD के प्रकोप में आई बड़ी कमी

28 अगस्त 2026, नई दिल्ली: पशुओं का टीकाकरण बना किसानों की ढाल, FMD के प्रकोप में आई बड़ी कमी – देश में पशुपालन करने वाले किसानों के लिए पशुओं का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। पशुओं में बीमारी फैलने से न केवल दूध उत्पादन प्रभावित होता है, बल्कि किसानों की आय पर भी सीधा असर पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) के माध्यम से पशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए बड़े स्तर पर टीकाकरण और निगरानी अभियान चला रही है।

सितंबर 2019 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य मुंहपका-खुरपका रोग (FMD) और ब्रुसेलोसिस जैसी गंभीर पशु बीमारियों की रोकथाम करना और चरणबद्ध तरीके से इनके प्रकोप को खत्म करना है। कार्यक्रम के तहत पशुओं का टीकाकरण करने के साथ बीमारी की निगरानी, जांच और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

147 करोड़ से अधिक FMD वैक्सीन की खुराक

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक देशभर में FMD वैक्सीन की 147.16 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं। इसका सीधा लाभ करीब 8.04 करोड़ किसानों को मिला है। लगातार चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान के कारण पशुओं में बीमारी के प्रकोप में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

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वर्ष 2019 में देश में FMD के 132 प्रकोप सामने आए थे। वर्ष 2025 में इनकी संख्या घटकर सिर्फ 40 रह गई। इसी तरह ब्रुसेलोसिस के मामले भी 2019 के 22 से घटकर 2025 में 15 रह गए हैं।

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Asia-1 सीरोटाइप का तीन साल से कोई प्रकोप नहीं

पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह भी सामने आई है कि पिछले तीन वर्षों से देश में FMD के Asia-1 सीरोटाइप का कोई प्रकोप सामने नहीं आया है। टीकाकरण के बाद की निगरानी में विभिन्न सीरोटाइप के खिलाफ पशुओं में अच्छी प्रतिरक्षा भी देखी गई है।

सरकार का प्रयास केवल बीमारी आने के बाद उसका उपचार करना नहीं, बल्कि टीकाकरण और नियमित निगरानी के जरिए बीमारी को फैलने से पहले रोकना है। इसके लिए पशुओं की पहचान, टीकाकरण का डिजिटल रिकॉर्ड और बीमारी की निगरानी जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जा रहा है।

पशु स्वस्थ तो किसान की आय सुरक्षित

पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए गाय, भैंस और अन्य दुधारू पशु नियमित आय का प्रमुख स्रोत हैं। ऐसे में पशुओं को संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित रखना किसानों की आर्थिक सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है।

FMD और ब्रुसेलोसिस के मामलों में आई कमी इस बात का संकेत है कि बड़े स्तर पर किया जा रहा टीकाकरण अभियान प्रभावी साबित हो रहा है। आने वाले वर्षों में भी टीकाकरण, निगरानी और समय पर बीमारी की पहचान को मजबूत करने पर जोर रहेगा, ताकि पशुधन सुरक्षित रहे, दूध उत्पादन बना रहे और किसानों की आय पर बीमारी का संकट कम से कम पड़े।

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