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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

मध्य पूर्व में तनाव से भारत के बासमती चावल निर्यात पर दबाव

02 मार्च 2026, नई दिल्ली: मध्य पूर्व में तनाव से भारत के बासमती चावल निर्यात पर दबाव – मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भारत के चावल निर्यात क्षेत्र, विशेषकर बासमती व्यापार, को लेकर नई चिंताएँ पैदा कर दी हैं। ईरान, सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और यमन जैसे देशों पर निर्भरता अधिक होने के कारण निर्यातकों को आशंका है कि यदि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाज़ों की आवाजाही प्रभावित होती है या कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है तो मालभाड़ा, बीमा और आपूर्ति शृंखला पर गंभीर असर पड़ सकता है।

इसी परिप्रेक्ष्य में, भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (Indian Rice Exporters Association) ने ईरान और खाड़ी क्षेत्र में बिगड़ती स्थिति को देखते हुए अपने सदस्यों के लिए महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया है। ईरान के इस्लामी गणराज्य तथा खाड़ी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाज़ों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका के मद्देनज़र निर्यातकों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

महासंघ ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित गंतव्यों के लिए नए लागत, बीमा और भाड़ा आधारित अनुबंध फिलहाल न किए जाएं। जहां संभव हो, सौदे जहाज़ पर सुपुर्दगी शर्तों पर किए जाएं, ताकि मालभाड़ा, बीमा और परिवहन से जुड़े जोखिम अंतरराष्ट्रीय खरीदार के जिम्मे रहें।

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महासंघ के अनुसार, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात की स्थिति का सीधा असर जहाज़ी ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने पर कंटेनर तथा थोक मालवाहक जहाज़ों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इससे मालभाड़ा दरों और समुद्री बीमा प्रीमियम में अचानक वृद्धि संभव है, जिससे तय कीमत वाले निर्यात अनुबंधों में नुकसान की आशंका बढ़ सकती है।

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महासंघ ने निर्यातकों को नए आदेश लेते समय संयम बरतने और बिना जोखिम सुरक्षा के खुले अनुबंधों से बचने की सलाह दी है।

भारत का चावल निर्यात मुख्य रूप से मध्य पूर्व और अफ्रीका के देशों में होता है, जो कुल राष्ट्रीय निर्यात का लगभग आधा हिस्सा है। अप्रैल से दिसंबर 2025 की अवधि के निर्यात आंकड़े इस प्रकार हैं:

बासमती चावल निर्यात (अप्रैल–दिसंबर 2025)

क्षेत्रमात्रा (मीट्रिक टन)राशि (करोड़ रुपये)औसत दर (रुपये/मीट्रिक टन)राशि (मिलियन अमेरिकी डॉलर)औसत दर (अमेरिकी डॉलर/मीट्रिक टन)
मध्य पूर्व32,05,925.0023,771.3974,148.292,724.81849.93
अफ्रीका3,21,324.002,375.3573,923.87271.22844.07

मध्य पूर्व बासमती चावल का सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है, जहां औसत निर्यात दर भी अपेक्षाकृत अधिक है।

गैर-बासमती चावल निर्यात (अप्रैल–दिसंबर 2025)

क्षेत्रमात्रा (मीट्रिक टन)राशि (करोड़ रुपये)औसत दर (रुपये/मीट्रिक टन)राशि (मिलियन अमेरिकी डॉलर)औसत दर (अमेरिकी डॉलर/मीट्रिक टन)
मध्य पूर्व6,94,740.003,425.3849,304.49391.18563.06
अफ्रीका68,34,005.0022,490.6332,909.882,575.56376.87

गैर-बासमती चावल के मामले में अफ्रीका प्रमुख बाजार है, जहां मात्रा के आधार पर सर्वाधिक निर्यात किया गया।

कुल चावल निर्यात (अप्रैल–दिसंबर 2025)

क्षेत्रमात्रा (मीट्रिक टन)राशि (करोड़ रुपये)औसत दर (रुपये/मीट्रिक टन)राशि (मिलियन अमेरिकी डॉलर)औसत दर (अमेरिकी डॉलर/मीट्रिक टन)
मध्य पूर्व39,00,665.0027,196.7769,723.413,115.99798.84
अफ्रीका71,55,329.0024,865.9834,751.692,846.78397.85

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जहां अफ्रीका मात्रा के आधार पर बड़ा बाजार है, वहीं मध्य पूर्व उच्च औसत दरों के कारण मूल्य के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मध्य पूर्व के पाँच प्रमुख बासमती गंतव्य — सऊदी अरब, ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और यमन — भारत के कुल बासमती निर्यात का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। इनके आंकड़े इस प्रकार हैं:

बासमती चावल के शीर्ष 5 गंतव्य (अप्रैल–दिसंबर 2025)

देशमात्रा (मीट्रिक टन)राशि (करोड़ रुपये)औसत दर (रुपये/मीट्रिक टन)राशि (मिलियन अमेरिकी डॉलर)औसत दर (अमेरिकी डॉलर/मीट्रिक टन)
सऊदी अरब7,66,382.005,992.3078,189.45687.26896.75
ईरान6,81,436.004,639.1768,079.38533.51782.92
इराक5,69,374.004,147.9272,850.62476.15836.26
संयुक्त अरब अमीरात3,18,655.002,406.3475,515.37274.85862.52
यमन3,00,032.002,153.4671,774.28245.43818.00

पिछले एक माह में बासमती के थोक मूल्यों में 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। ईरान जैसे प्रमुख बाजार में अनिश्चितता के कारण आने वाले दिनों में कीमतों में और उतार-चढ़ाव संभव है।

महासंघ ने कहा है कि वह स्थिति पर लगातार निगरानी रखे हुए है तथा जिन निर्यातकों का माल मार्ग में है या गंतव्य बंदरगाहों पर लंबित है, उनके साथ संपर्क में है। परिस्थितियों के अनुसार आगे भी परामर्श जारी किए जाएंगे।

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