चावल और आलू सस्ते, प्याज-टमाटर की कीमतों से बिगड़ रहा रसोई का बजट
आवश्यक कृषि उत्पादों की खुदरा कीमतों में मिला-जुला रुख, अनाज और मोटे अनाज के दामों में साप्ताहिक गिरावट
24 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: चावल और आलू सस्ते, प्याज-टमाटर की कीमतों से बिगड़ रहा रसोई का बजट – देश में आवश्यक कृषि उत्पादों की अखिल भारतीय साप्ताहिक औसत खुदरा कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। 2 अक्टूबर 2026 तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जहां चावल और कुछ अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी से उपभोक्ताओं को राहत मिली है, वहीं प्याज और टमाटर जैसी प्रमुख सब्जियों की महंगाई आम लोगों के रसोई बजट पर दबाव बनाए हुए है। दालों और खाद्य तेलों की कीमतों में मामूली नरमी से भी उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिलने के संकेत हैं।
चावल की कीमत में गिरावट
अनाज श्रेणी में चावल की खुदरा कीमत 45.61 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई है। इसकी कीमत में पिछले सप्ताह की तुलना में 2.12 प्रतिशत और पिछले महीने के मुकाबले 1.38 प्रतिशत की गिरावट आई है। इससे दैनिक राशन पर खर्च करने वाले परिवारों को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, सालाना आधार पर चावल अभी भी 7.70 प्रतिशत महंगा है।
गेहूं की खुदरा कीमत 31.94 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। इसमें पिछले सप्ताह के मुकाबले 0.09 प्रतिशत की मामूली गिरावट रही। इस प्रकार गेहूं की कीमतों में फिलहाल अपेक्षाकृत स्थिरता दिखाई दे रही है।
ज्वार, बाजरा और रागी भी हुए सस्ते
मोटे अनाजों की कीमतों में भी साप्ताहिक आधार पर नरमी दर्ज की गई है। ज्वार की औसत खुदरा कीमत 44.86 रुपये प्रति किलोग्राम, बाजरे की 38.37 रुपये और रागी की 55.61 रुपये प्रति किलोग्राम रही। इन अनाजों की कीमतों में पिछले सप्ताह की तुलना में 0.29 प्रतिशत से लेकर 1.04 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
मोटे अनाजों की कीमतों में आई यह नरमी उन उपभोक्ताओं के लिए राहत दे सकती है, जो अपने भोजन में पारंपरिक अनाजों का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही, ये अनाज पोषण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं।
प्याज और टमाटर पर महंगाई का दबाव
एक ओर अनाज की कीमतों में गिरावट दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी ओर प्याज और टमाटर की कीमतों में तेजी आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा रही है। दैनिक भोजन में इन सब्जियों का नियमित इस्तेमाल होने के कारण इनके दाम बढ़ने का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है।
सब्जियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के पीछे मौसमी आवक, आपूर्ति व्यवस्था, परिवहन लागत और स्थानीय बाजारों की स्थिति जैसे कारक महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए बाजार में नियमित आपूर्ति बनाए रखना आवश्यक है।
उपभोक्ताओं को अभी पूरी राहत नहीं
खाद्य पदार्थों की कीमतों में अलग-अलग रुझान यह बताते हैं कि महंगाई का असर सभी उत्पादों पर एक जैसा नहीं है। चावल और मोटे अनाजों में गिरावट के बावजूद प्याज और टमाटर की महंगाई से मिलने वाली राहत सीमित हो सकती है। दालों और खाद्य तेलों में मामूली नरमी भी तभी व्यापक राहत में बदलेगी, जब यह रुझान आगे बना रहे।
आने वाले समय में खाद्य पदार्थों की कीमतों पर फसलों की आवक, मौसमी परिस्थितियों और आपूर्ति व्यवस्था का प्रभाव बना रहेगा। उपभोक्ताओं के लिए राहत की स्थिति तभी मजबूत होगी, जब आवश्यक खाद्य उत्पादों की कीमतों में स्थिरता आए और रोजमर्रा की जरूरतों पर होने वाला खर्च नियंत्रित रहे।
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