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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

खाद के इस्तेमाल में न करें देखा-देखी, स्वाइल हेल्थ कार्ड के आधार पर डालें उर्वरक; शिवराज सिंह चौहान ने दी किसानों को सलाह

24 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: खाद के इस्तेमाल में न करें देखा-देखी, स्वाइल हेल्थ कार्ड के आधार पर डालें उर्वरक; शिवराज सिंह चौहान ने दी किसानों को सलाह – किसान अगर बिना जरूरत खेतों में रासायनिक खाद का इस्तेमाल करते हैं, तो इससे खेती की लागत बढ़ने के साथ मिट्टी की उर्वरता पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए किसानों को मिट्टी की जरूरत के अनुसार ही उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरियाणा के करनाल जिले के तरावड़ी में आयोजित किसान चौपाल के दौरान किसानों को यह सलाह दी। उन्होंने कहा कि खाद के इस्तेमाल में दूसरे किसानों की देखा-देखी करने के बजाय मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) के आधार पर उर्वरकों की मात्रा तय करनी चाहिए।

तरावड़ी से ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरियाणा के ऐतिहासिक कस्बे तरावड़ी से राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर आयोजित किसान चौपाल में उन्होंने किसानों से सीधे संवाद किया और खेती से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के सम्मान, स्वाभिमान और हितों की रक्षा करना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है। चौहान ने कहा कि वे खुद को किसानों का सेवक और एक किसान मानते हैं। उनके मुताबिक, खेती में आधुनिक तकनीकों और पारंपरिक ज्ञान के बीच संतुलन बनाना जरूरी है, ताकि मिट्टी की सेहत सुरक्षित रहे और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सके।

जरूरत के मुताबिक ही करें खाद का इस्तेमाल

किसान चौपाल में रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित इस्तेमाल का मुद्दा उठाते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘खेत बचाओ अभियान’ का उद्देश्य खाद का विरोध करना नहीं, बल्कि उसके संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा देना है। उन्होंने किसानों को समझाया कि एक किसान को देखकर दूसरे किसान का उससे अधिक खाद डालना सही तरीका नहीं है। हर खेत की मिट्टी और उसमें मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए पहले मिट्टी की जांच करानी चाहिए और मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दी गई जानकारी के अनुसार ही उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि बिना जरूरत के खाद डालने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो सकती है। संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करने से खेती की लागत कम करने और मिट्टी को लंबे समय तक उपजाऊ बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

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एक एकड़ से शुरू करें प्राकृतिक खेती

केंद्रीय मंत्री ने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने अपने खेतों में प्राकृतिक खेती करने का अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस पद्धति में बेहतर परिणाम पाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से काम करना जरूरी है। उन्होंने जीवामृत, घनजीवामृत और बीजामृत जैसे प्राकृतिक कृषि उत्पादों को सही विधि, अनुपात और समय के अनुसार इस्तेमाल करने पर जोर दिया। चौहान ने सुझाव दिया कि जिन किसानों के पास तीन से पांच एकड़ जमीन है, वे शुरुआत में एक एकड़ में प्राकृतिक खेती अपनाकर इसकी विधि को अच्छी तरह समझें। इसके बाद अपने अनुभव और परिणामों के आधार पर इसका दायरा बढ़ा सकते हैं।

देसी गाय और बछिया पैदा करने वाली तकनीक पर चर्चा

किसान चौपाल के दौरान किसानों ने देसी गायों के संरक्षण, दूध के बेहतर बाजार मूल्य और बछिया पैदा करने में मदद करने वाली लिंग-वर्गीकृत वीर्य (Sex-sorted Semen) तकनीक से जुड़े सवाल भी उठाए। इस विषय पर मौजूद कृषि वैज्ञानिकों के साथ चर्चा की गई। कार्यक्रम में बताया गया कि ऐसी तकनीक को किसानों के लिए सस्ता और सुलभ बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती में गोबर और गोमूत्र की उपयोगिता तथा देसी गाय के दूध के उचित मूल्य जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।

पराली प्रबंधन के लिए हरियाणा के किसानों की सराहना

शिवराज सिंह चौहान ने हरियाणा में इस वर्ष पराली जलाने की घटनाओं में आई गिरावट और किसानों की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसानों ने पराली प्रबंधन और सुपर सीडर जैसी तकनीकों को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करने पर जोर दिया। पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों को भी नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए फसल अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन खेतों की सेहत बनाए रखने के लिए जरूरी है।

किसानों के सुझावों पर कार्रवाई का भरोसा

किसान चौपाल में हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, स्थानीय विधायक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI) के कृषि वैज्ञानिकों सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा दिलाया कि किसानों की समस्याओं, सुझावों और जरूरतों पर कृषि मंत्रालय की ओर से आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। ‘खेत बचाओ अभियान’ के माध्यम से किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण के अनुकूल कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है।

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