केंद्र सरकार ने किसानों के लिए अपग्रेडेड “एग्री वेलफेयर पोर्टल” लॉन्च किया, मोबाइल पर मिलेगी योजनाओं की पूरी जानकारी
24 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने किसानों के लिए अपग्रेडेड “एग्री वेलफेयर पोर्टल” लॉन्च किया, मोबाइल पर मिलेगी योजनाओं की पूरी जानकारी – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपग्रेडेड “एग्री वेलफेयर पोर्टल” का शुभारंभ किया है। इस पोर्टल के जरिए देशभर के किसान अब अपने मोबाइल फोन पर ही केंद्र सरकार की कृषि योजनाओं, सब्सिडी और वित्तीय सहायता से जुड़ी जानकारी पा सकेंगे।
मंत्री ने कहा कि तकनीक तभी अपना असली मकसद पूरा करती है जब वह खेत-खलिहान और गांव-गांव तक पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया विजन का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को किसानों के मोबाइल फोन के जरिए हर समय उन तक पहुंच में रहना चाहिए और बिचौलियों की भूमिका कम से कम होनी चाहिए।
योजनाओं तक एक ही जगह पहुंच
पोर्टल को एक ऐसे सिंगल-विंडो गेटवे के रूप में तैयार किया गया है जहां से किसान पीएम-किसान सम्मान निधि, एग्रीस्टैक और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी प्रमुख योजनाओं की पात्रता जांच सकेंगे, ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे और अपने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) की स्थिति भी देख सकेंगे।
अभी तक किसानों को अलग-अलग योजनाओं की जानकारी के लिए कई सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे या अलग-अलग वेबसाइटों पर जाना पड़ता था। हर पोर्टल पर अलग से पंजीकरण और दस्तावेज अपलोड करने की जरूरत पड़ती थी, जिससे खासकर कम पढ़े-लिखे और दूर-दराज के किसानों को परेशानी होती थी। नए पोर्टल से यह झंझट कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार पोर्टल पर किसानों को मौसम की जानकारी, वैज्ञानिक खेती से जुड़े सुझाव, बीज-खाद की उपलब्धता और मंडी भाव जैसी सुविधाएं भी एक ही जगह मिलेंगी। इसके अलावा यह प्लेटफॉर्म किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स), कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और कृषि क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप को भी एक डिजिटल मंच पर जोड़ेगा, ताकि जानकारी और संसाधन आपस में साझा हो सकें।
पोर्टल को खास तौर पर छोटे और सीमांत किसानों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें स्क्रीन-रीडर सपोर्ट, दिव्यांग उपयोगकर्ताओं के लिए सरल नेविगेशन और कमजोर इंटरनेट व बेसिक स्मार्टफोन पर भी आसानी से चलने लायक हल्का डिजाइन रखा गया है। भाषा भी जानबूझकर सरल रखी गई है ताकि गांव के आम किसान को भी समझने में दिक्कत न हो। पोर्टल को सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेइटीवाई) की डिजिटल ब्रांड पहचान नियमावली और सरकारी वेबसाइटों के दिशा-निर्देशों के मुताबिक तैयार किया गया है।
केवीके के जरिए किसानों को सिखाई जाएगी पोर्टल की जानकारी
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पोर्टल पर मौजूद जानकारी हमेशा सटीक और अद्यतन रहे। इसके साथ ही देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के जरिए एक विशेष प्रशिक्षण अभियान चलाया जाएगा, जिसमें किसानों को पोर्टल और अन्य डिजिटल कृषि उपकरणों के इस्तेमाल का तरीका सिखाया जाएगा।
कृषि मंत्रालय ने अभी पोर्टल पर पंजीकृत किसानों की संख्या, उपलब्ध योजनाओं की पूरी सूची या भाषाओं की संख्या जैसे आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं। मंत्रालय ने कहा है कि आने वाले दिनों में पोर्टल को लेकर और जानकारी साझा की जाएगी।
ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की सीमित पहुंच और डिजिटल साक्षरता की कमी को देखते हुए कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि केवीके स्तर पर प्रशिक्षण अभियान इस पोर्टल की सफलता के लिए अहम भूमिका निभाएगा। कई किसान संगठनों ने पहले भी सरकार से योजनाओं की जानकारी को एक जगह लाने की मांग की थी, क्योंकि अलग-अलग पोर्टलों पर बार-बार पंजीकरण और दस्तावेज अपलोड करने से किसानों को परेशानी होती थी। अब देखना यह होगा कि गांव स्तर पर पोर्टल का इस्तेमाल कितनी आसानी से हो पाता है, खासकर उन इलाकों में जहां इंटरनेट की गति धीमी रहती है।
डिजिटल कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि इस तरह के एकीकृत पोर्टल से सरकार को भी फायदा होता है, क्योंकि अलग-अलग विभागों के पास बिखरा हुआ डेटा एक जगह आने से योजनाओं की निगरानी और बेहतर नीति-निर्माण आसान हो जाता है। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि पोर्टल की असली परीक्षा तब होगी जब आने वाले महीनों में बड़ी संख्या में किसान इसका रोजमर्रा इस्तेमाल शुरू करेंगे और इसमें आने वाली तकनीकी दिक्कतों की शिकायतें सामने आएंगी। कृषि मंत्रालय ने संकेत दिया है कि किसानों से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर पोर्टल में आगे भी सुधार किए जाते रहेंगे।
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