अंडमान-निकोबार के पारंपरिक मछली उत्पादों को मिलेगा GI टैग, ICAR-CIFT देगा तकनीकी मदद
23 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: अंडमान-निकोबार के पारंपरिक मछली उत्पादों को मिलेगा GI टैग, ICAR-CIFT देगा तकनीकी मदद – अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पारंपरिक मछली उत्पादों को पहचान दिलाने और मत्स्य क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का केंद्रीय मत्स्य प्रौद्योगिकी संस्थान (CIFT), कोच्चि तकनीकी सहायता देगा। इसके तहत संस्थान दो पारंपरिक मछली उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग दिलाने की प्रक्रिया में सहयोग करेगा। साथ ही, मछली पकड़ने वाली नौकाओं के मानक डिजाइन तैयार करने में भी मदद करेगा। इस संबंध में ICAR-CIFT ने अंडमान और निकोबार प्रशासन के मत्स्य विभाग, श्री विजयपुरम के साथ दो परामर्श समझौते किए हैं। इस सहयोग का उद्देश्य पारंपरिक मछली उत्पादों को बढ़ावा देना, उनकी गुणवत्ता में सुधार करना और स्थानीय व जनजातीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसर बढ़ाना है।

दो पारंपरिक मछली उत्पादों को GI टैग दिलाने में मदद
इस सहयोग के तहत चिल्ड अंडमान कोरल ट्राउट (डॉलर फिश) और निकोबारी थोहारांगो (धुएं में पकाई और सुखाई गई मछली) को GI टैग दिलाने के लिए तकनीकी सहयोग दिया जाएगा। इसके लिए ICAR-CIFT इन उत्पादों के पोषण संबंधी गुणों की जांच करेगा और उनकी उपयोग अवधि यानी कितने समय तक उन्हें सुरक्षित रखा जा सकता है, इसका अध्ययन करेगा। संस्थान उत्पादों की सुरक्षा और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए मानक प्रक्रियाएं भी विकसित करेगा।
इसके अलावा, स्थानीय और जनजातीय मछली उत्पादकों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे पारंपरिक तरीके से मछली तैयार करने की प्रक्रियाओं को सुरक्षित रखने, उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर बनाने और बाजार तक उनकी पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे इन उत्पादों की व्यावसायिक संभावनाएं और मूल्य बढ़ाने का भी प्रयास किया जाएगा।
मछली पकड़ने वाली नौकाओं के 30 मानक डिजाइन तैयार होंगे
दूसरे समझौते के तहत ICAR-CIFT अलग-अलग आकार और श्रेणियों की मछली पकड़ने वाली नौकाओं के 30 मानकीकृत डिजाइन उपलब्ध कराएगा। इनमें मोटर से चलने वाली और मशीनीकृत नौकाएं शामिल होंगी। इन डिजाइनों के साथ संशोधित नक्शे, तकनीकी विवरण और अनुमानित लागत की जानकारी भी दी जाएगी। नौकाओं के निर्माण के लिए लकड़ी, फाइबर-प्रबलित प्लास्टिक (FRP), FRP की परत वाली लकड़ी और स्टील जैसी उपयुक्त सामग्रियों को ध्यान में रखा जाएगा। इससे केंद्र शासित प्रदेश की योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को नौकाओं के निर्माण में मदद मिलेगी। मानकीकृत डिजाइन और तकनीकी जानकारी मिलने से नौका निर्माण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिलेगी।
स्थानीय और जनजातीय समुदायों की आजीविका को मिलेगा बढ़ावा
इस सहयोग का प्रमुख उद्देश्य अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पारंपरिक मछली उत्पादों को प्रोत्साहित करना, स्थानीय और जनजातीय समुदायों की आजीविका के अवसर बढ़ाना तथा तकनीक आधारित टिकाऊ मत्स्य विकास को बढ़ावा देना है। समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान ICAR-CIFT के निदेशक डॉ. जॉर्ज निनान और अंडमान-निकोबार प्रशासन के मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक श्री नेस्नास ई.ए. के बीच हुआ।
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