केंद्र सरकार का “खेत बचाओ अभियान” 22 अक्टूबर से दूसरे चरण में, ग्यारह राज्य शामिल
22 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: केंद्र सरकार का “खेत बचाओ अभियान” 22 अक्टूबर से दूसरे चरण में, ग्यारह राज्य शामिल – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीते सप्ताह एक वर्चुअल बैठक में “खेत बचाओ अभियान” के अगले चरण की तैयारियों की समीक्षा की। मंत्रालय के मुताबिक यह अभियान 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक देश के ग्यारह राज्यों में चलाया जाएगा।
बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी के अलावा मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, उत्तराखंड, राजस्थान, असम, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, बिहार और महाराष्ट्र के कृषि मंत्री शामिल हुए। अभियान का मकसद किसानों के बीच मिट्टी की सेहत, संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाना है।
हर जिले में नोडल अधिकारी तैनात होंगे
मंत्रालय ने सभी राज्यों से कहा है कि अभियान को पूरी गंभीरता से लागू किया जाए ताकि इसका ठोस फायदा किसानों तक पहुंचे। जिला कलेक्टरों को आयोजन सुचारू रूप से कराने और राज्य व जिला दोनों स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और जिला प्रशासन की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। अभियान की शुरुआत मूल रूप से इसी साल जून में मध्य प्रदेश से हुई थी, जिसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में बढ़ाया जा रहा है।
भारत में मिट्टी स्वास्थ्य और संतुलित उर्वरक उपयोग को लेकर सरकार लंबे समय से किसानों को जागरूक करने का प्रयास करती रही है, क्योंकि लगातार असंतुलित उर्वरक इस्तेमाल से कई इलाकों में मिट्टी की उर्वरता घटने की शिकायतें मिलती रही हैं। खेत बचाओ अभियान को इसी कड़ी में एक और प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
उन्नत तकनीक और योजनाओं की जानकारी देना लक्ष्य
अधिकारियों के मुताबिक अभियान के दौरान किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों, संसाधनों के कुशल इस्तेमाल और टिकाऊ खेती के तरीकों के बारे में बताया जाएगा। साथ ही केंद्र सरकार की किसान-केंद्रित योजनाओं की जानकारी गांव-गांव पहुंचाने की योजना है।
बैठक में अभियान की मुख्य गतिविधियों, क्रियान्वयन रणनीति और जन-भागीदारी के लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। हालांकि मंत्रालय ने अब तक अभियान के लिए किसी निश्चित बजट या लक्षित किसान संख्या की सार्वजनिक घोषणा नहीं की है।
जून 2026 में शुरू हुए पहले चरण में देशभर से नौ लाख से ज्यादा किसानों ने हिस्सा लिया था। अब दूसरे चरण में इस दायरे को और बढ़ाने की तैयारी है, जिसमें राज्य सरकारों की भूमिका अहम रहेगी। राज्यों को यह भी कहा गया है कि अभियान की शुरुआत प्रभावी ढंग से हो और सभी ज़रूरी तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएं।
बैठक में इस बात पर खास जोर रहा कि अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि गांव स्तर पर किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद हो। इसके लिए राज्यों से कहा गया है कि वे कृषि विज्ञान केंद्रों और स्थानीय प्रशासन की मदद से गांव-गांव शिविर लगाएं, जहां किसान मिट्टी परीक्षण, उर्वरक की सही मात्रा और जल संरक्षण के तरीकों पर सवाल पूछ सकें।
मंत्रालय के मुताबिक अभियान के दूसरे चरण में हिस्सा लेने वाले सभी राज्यों को अपनी प्रगति रिपोर्ट नियमित अंतराल पर केंद्र को भेजनी होगी, ताकि अभियान के क्रियान्वयन की निगरानी की जा सके। किस राज्य में कितने शिविर लगे और कितने किसानों तक पहुंच बनी, इसका ब्योरा भी मांगा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार असंतुलित उर्वरक इस्तेमाल और मिट्टी की सेहत को नजरअंदाज करने से लंबी अवधि में उत्पादकता पर असर पड़ता है। ऐसे अभियान किसानों को समय रहते सही जानकारी देकर इस नुकसान को रोकने में मददगार साबित हो सकते हैं, बशर्ते इनका क्रियान्वयन ज़मीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से हो।
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