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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

आलू की नई किस्म कुफरी जामुनिया: 90 दिन में तैयार होती है फसल, 1 हेक्टेयर में 35 टन तक उपज

20 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: आलू की नई किस्म कुफरी जामुनिया: 90 दिन में तैयार होती है फसल, 1 हेक्टेयर में 35 टन तक उपज – आलू की खेती करने वाले किसानों के लिए कुफरी जामुनिया एक खास किस्म है। यह आलू अपने गहरे बैंगनी रंग, बेहतर पोषण और अच्छी उपज क्षमता के लिए जाना जाता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI) ने इस किस्म को विकसित किया है। इसमें सामान्य आलू की तुलना में विटामिन C, आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्व अधिक पाए जाते हैं। अनुशंसित खेती पद्धतियों के तहत इसकी उपज 32 से 35 टन प्रति हेक्टेयर तक मिल सकती है।

90 दिन के परीक्षण में 49 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज

कुफरी जामुनिया मध्यम अवधि में तैयार होने वाली आलू की किस्म है। इसके पौधे मध्यम ऊंचाई के होते हैं और इनकी पत्तियां अपेक्षाकृत घनी होती हैं। इसके कंद लंबे-अंडाकार आकार के होते हैं। इनकी त्वचा और गूदा दोनों गहरे बैंगनी रंग के होते हैं, जबकि कंदों की आंखें उथली होती हैं। प्रत्येक पौधे में आमतौर पर 10 से 12 मध्यम से बड़े आकार के आलू मिल सकते हैं।

अनुशंसित खेती पद्धतियों के तहत कुफरी जामुनिया से 32 से 35 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज मिल सकती है। संस्थान में किए गए परीक्षणों के दौरान 90 दिनों में इसकी उपज लगभग 49 टन प्रति हेक्टेयर तक दर्ज की गई। हालांकि, परीक्षण में मिली उपज और सामान्य खेती में मिलने वाली उपज अलग हो सकती है। इसकी कुल उपज का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा बाजार में बेचने योग्य कंदों का हो सकता है।

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आयरन, जिंक और विटामिन C से भरपूर है यह आलू

कुफरी जामुनिया की खासियत सिर्फ इसका बैंगनी रंग नहीं, बल्कि इसमें मौजूद पोषक तत्व भी हैं। इसमें एंथोसायनिन, कैरोटीनॉयड, विटामिन C, आयरन और जिंक पाए जाते हैं। एंथोसायनिन प्राकृतिक रंगद्रव्य हैं, जो इस आलू को बैंगनी रंग देते हैं और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से जुड़े हैं। उपलब्ध पोषण संबंधी आंकड़ों के अनुसार, कुफरी जामुनिया के गूदे में प्रति 100 ग्राम लगभग 42.75 मिलीग्राम विटामिन C पाया जाता है, जबकि सामान्य आलू में इसकी मात्रा करीब 23.15 मिलीग्राम बताई गई है। इसी तरह, कुफरी जामुनिया में प्रति 100 ग्राम लगभग 2.28 मिलीग्राम जिंक और 3.22 मिलीग्राम आयरन पाया जाता है। सामान्य आलू में जिंक की मात्रा लगभग 0.28 मिलीग्राम और आयरन की मात्रा 0.57 मिलीग्राम बताई गई है। इस तरह, पोषण के लिहाज से यह किस्म सामान्य आलू से अलग है।

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कुफरी जामुनिया के गूदे में एंथोसायनिन की मात्रा लगभग 42.05 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम और इसकी त्वचा में करीब 80.66 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम बताई गई है। इसके अलावा, इसमें कैरोटीनॉयड भी मौजूद हैं। पोषक तत्वों से भरपूर ऐसी फसलें लोगों के आहार की गुणवत्ता बेहतर बनाने और पोषण की कमी दूर करने के प्रयासों में योगदान दे सकती हैं।

उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त

कुफरी जामुनिया को उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बताया गया है। अलग-अलग स्थानों पर किए गए परीक्षणों में इसके प्रदर्शन की स्थिरता भी देखी गई है। यह मध्यम अवधि में तैयार होने वाली किस्म है और इसके कंदों में लगभग 6 से 8 सप्ताह की मध्यम सुप्तावस्था होती है। इसका मतलब है कि कटाई के बाद कंदों में तुरंत अंकुरण शुरू होने की आशंका अपेक्षाकृत कम रहती है। इस किस्म में भंडारण की अच्छी क्षमता भी बताई गई है। उचित भंडारण की स्थिति में कंदों के सड़ने और वजन घटने की समस्या कम हो सकती है। इससे कटाई के बाद आलू को सुरक्षित रखने और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

कई तरह के व्यंजन बनाने में हो सकता है इस्तेमाल

कुफरी जामुनिया का इस्तेमाल आलू की सामान्य किस्मों की तरह कई तरह के व्यंजन बनाने में किया जा सकता है। इससे सब्जी, पराठा, पूरी, रायता, हलवा, उपमा और सूप तैयार किए जा सकते हैं। इसके अलावा, इसका उपयोग डोसा और इडली के घोल के साथ-साथ बेकरी उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले आलू के आटे को तैयार करने में भी किया जा सकता है। इसके बैंगनी रंग और पोषण संबंधी विशेषताओं के कारण खाद्य उत्पादों में इसके इस्तेमाल की संभावनाएं हैं।

ICAR-CPRI ने विकसित की हैं आलू की रंगीन किस्में

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान ने पोषण संबंधी गुणों को ध्यान में रखते हुए आलू की कई रंगीन किस्में विकसित की हैं। इनमें कुफरी नीलकंठ, कुफरी माणिक और कुफरी जामुनिया शामिल हैं। कुफरी नीलकंठ को वर्ष 2018 में जारी किया गया था, जबकि कुफरी माणिक वर्ष 2021 में जारी हुई। कुफरी जामुनिया को वर्ष 2024 में जारी किया गया।

कुफरी नीलकंठ अपने बैंगनी रंग और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जानी जाती है। वहीं, कुफरी माणिक के कंद बाहर से गहरे लाल रंग के और अंदर से पीले होते हैं। कुफरी जामुनिया में विटामिन C, एंथोसायनिन, कैरोटीनॉयड, आयरन और जिंक की मौजूदगी इसे खास बनाती है। अच्छी उपज क्षमता, पोषण संबंधी गुणों और भंडारण की विशेषताओं के कारण यह किस्म किसानों और उपभोक्ताओं, दोनों के लिए उपयोगी हो सकती है।

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