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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

ICAR ने विकसित की धान की 7 नई जलवायु-सहिष्णु किस्में, 120 दिन में होंगी तैयार; 5-7 टन प्रति हेक्टेयर उपज क्षमता  

18 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: ICAR ने विकसित की धान की 7 नई जलवायु-सहिष्णु किस्में, 120 दिन में होंगी तैयार; 5-7 टन प्रति हेक्टेयर उपज क्षमता – नागालैंड में धान की खेती को अधिक उत्पादक और जलवायु के अनुकूल बनाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पूर्वोत्तर क्षेत्र अनुसंधान परिसर के नागालैंड केंद्र ने धान की 7 नई किस्मों का प्रदर्शन किया। इन किस्मों को राज्य की कृषि-जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इनकी खासियत कम अवधि में पकना, रोगों के प्रति सहनशीलता और प्रतिकूल मौसम में फसल को बेहतर ढंग से संभालने की क्षमता है।

115-120 दिन में तैयार होगी फसल

इन नई किस्मों की पकने की अवधि 115 से 120 दिन है। इनकी संभावित उपज क्षमता 5 से 7 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है। ये किस्में ब्लास्ट रोग के प्रति सहनशील हैं और नमी की कमी को भी मध्यम स्तर तक सहन कर सकती हैं। कम अवधि में तैयार होने के कारण इनसे किसानों को फसल प्रबंधन और खेती की उत्पादकता बेहतर करने में मदद मिल सकती है।

नागालैंड में धान की खेती के दौरान फसल की लंबी अवधि, नमी की कमी और रोगों व कीटों से जुड़ी चुनौतियां सामने आती हैं। नई किस्मों को इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है, ताकि स्थानीय परिस्थितियों में धान उत्पादन को बेहतर बनाया जा सके।

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नौ साल से अधिक के शोध के बाद विकसित की गईं किस्में

ICAR के नागालैंड केंद्र में आयोजित किसान प्रक्षेत्र दिवस के दौरान किसानों और कृषि अधिकारियों को इन किस्मों की विशेषताओं से परिचित कराया गया। केंद्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि इन किस्मों को विकसित करने के लिए नौ साल से अधिक समय तक शोध किया गया। इस दौरान लगभग 990 प्रजनन पंक्तियों का मूल्यांकन किया गया, जिनमें से अधिक उपज देने वाली और कम अवधि में तैयार होने वाली किस्मों की पहचान की गई।

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कार्यक्रम में सोविमा, हेवनी, चुमौकेदिमा, धंसिरिपार और सिंगरीजन क्षेत्रों से आए किसानों सहित कुल 56 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें कृषि विभाग के अधिकारी, ICAR के वैज्ञानिक और कर्मचारी तथा कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के अधिकारी भी शामिल रहे। प्रक्षेत्र भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने नई किस्मों की विशेषताओं और स्थानीय परिस्थितियों में उनकी उपयोगिता को समझा। कुछ किसानों ने पहले ही इन किस्मों में से कुछ की खेती की थी और अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में शामिल अन्य किसानों ने भी इन किस्मों को अपनाने में रुचि दिखाई।

किसानों तक तकनीक पहुंचाने पर जोर

नागालैंड कृषि विभाग की संयुक्त सचिव लिमानेंला ने किसानों को नई किस्में अपनाने और इनके बारे में अन्य किसानों तक जानकारी पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि कम अवधि में तैयार होने, बेहतर उपज क्षमता और प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने की विशेषताएं खेती की उत्पादकता बढ़ाने में उपयोगी हो सकती हैं। इससे फसल प्रणाली को बेहतर बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।

ICAR के क्षेत्रीय केंद्र के प्रमुख डॉ. एच. कलिता ने शोध के निष्कर्षों और नई कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्में खेती में संसाधनों के बेहतर उपयोग और लाभप्रदता बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। चुमौकेदिमा जिले की कृषि अधिकारी मोइनला पोंगेन ने भी नई किस्मों की सराहना करते हुए किसानों को इन्हें अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। वहीं, कृषि उपनिदेशक डेविड अवोमी ने अधिक उपज देने वाली और तनाव-सहनशील किस्मों को उत्पादन, किसानों की आय और आजीविका में सुधार के लिहाज से उपयोगी बताया।

अप्रैल 2026 में मिली थी जारी करने की मंजूरी

इन सात किस्मों को जारी करने की मंजूरी देने के लिए 21 अप्रैल 2026 को ICAR के नागालैंड केंद्र, मेडजिफेमा में राज्य बीज उपसमिति की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में कृषि विभाग की संयुक्त सचिव लिमानेंला और कृषि सलाहकार एम. हथुंग यंथन ने किस्मों को जारी करने की मंजूरी दी थी।

कृषि सलाहकार यंथन ने वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना करते हुए नई किस्मों को किसानों तक पहुंचाने और उन्हें अपनाने के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय पर जोर दिया। इन किस्मों के प्रदर्शन का उद्देश्य किसानों को नई तकनीक से परिचित कराना और नागालैंड में धान की खेती की उत्पादकता, जलवायु-सहनशीलता तथा किसानों की आजीविका को बेहतर बनाने के प्रयासों को आगे बढ़ाना है।

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