मध्य प्रदेश में कृषि यंत्रों पर 50% तक सब्सिडी, 13 अक्टूबर तक करें आवेदन
08 अक्टूबर 2026, भोपाल: मध्य प्रदेश में कृषि यंत्रों पर 50% तक सब्सिडी, 13 अक्टूबर तक करें आवेदन – मध्य प्रदेश में कृषि यंत्रों पर अनुदान पाने के लिए पात्र किसान 13 अक्टूबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। राज्य के किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने फर्टिलाइजर ब्रॉडकास्टर, बूम टाइप स्प्रेयर, स्वचालित रीपर और ट्रैक्टर चालित रीपर जैसे यंत्रों पर 40 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की घोषणा की है।
आवेदन की प्रक्रिया 3 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है और चुने गए किसानों के नाम 14 अक्टूबर को लॉटरी के माध्यम से तय किए जाएंगे।
किसे कितनी सब्सिडी
विभाग के मुताबिक लघु, सीमांत, महिला और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के किसानों को यंत्र की लागत पर 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। सामान्य वर्ग के किसानों के लिए यह सीमा 40 प्रतिशत रखी गई है।
योजना का मकसद छोटे और मझोले किसानों तक आधुनिक कृषि यंत्र पहुंचाना है, ताकि वे खेती की लागत घटा सकें और समय पर बुवाई-कटाई कर सकें। खासकर रबी सीजन की शुरुआत में बुवाई-पूर्व तैयारी वाले यंत्रों की मांग इस समय ज्यादा रहती है।
आवेदन के लिए जरूरी शर्तें
आवेदन के लिए किसान के पास एग्री-स्टैक फार्मर आईडी होना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा हर यंत्र के लिए तय धरोहर राशि का डिमांड ड्राफ्ट भी जमा करना होगा, जो चुने जाने के बाद यंत्र की कीमत में समायोजित हो जाता है या चयन न होने पर वापस कर दिया जाता है।
किसान राज्य सरकार के ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल पर आधार नंबर से लॉगिन करके आवेदन जमा कर सकते हैं। पोर्टल पर बैंक खाता, आधार और एग्री-स्टैक आईडी की जानकारी एक साथ अपडेट रखने की सलाह दी गई है, ताकि लॉटरी में चयन के बाद अनुदान राशि बिना रुकावट खाते में पहुंच सके।
आवेदन जमा करने के बाद किसान पोर्टल पर अपने आवेदन की स्थिति भी ऑनलाइन देख सकते हैं, जिससे उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर नहीं लगाना पड़ता।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बीते सीजन में भी इस तरह की योजनाओं में आवेदन की संख्या मांग से कहीं ज्यादा रही थी, इसलिए चयन के लिए लॉटरी प्रणाली अपनाई जाती है। जिन किसानों का चयन इस बार नहीं हो पाता, उनके आवेदन को अगले चरण के लिए स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ाने पर भी विचार किया जाता है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बूम टाइप स्प्रेयर और फर्टिलाइजर ब्रॉडकास्टर जैसे यंत्र दवा और खाद के छिड़काव में होने वाली बर्बादी को कम करते हैं, जिससे किसान की लागत पर सीधा असर पड़ता है। स्वचालित रीपर मजदूरों की कमी वाले इलाकों में कटाई के समय को काफी कम कर देता है, जो आज के दौर में खेती की एक बड़ी दिक्कत बन चुकी है।
राज्य में बीज, खाद और यंत्र तीनों पर मिलने वाली सब्सिडी अलग-अलग पोर्टल से जुड़ी है, इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे आवेदन से पहले अपने नजदीकी कृषि विस्तार अधिकारी से दस्तावेजों की पूरी सूची जरूर जांच लें। गलत या अधूरे दस्तावेज की वजह से कई बार आवेदन लॉटरी में शामिल होने से पहले ही रद्द हो जाते हैं, इसलिए विभाग किसानों से आवेदन की अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना जल्द प्रक्रिया पूरी करने की अपील कर रहा है।
आने वाले हफ्तों में कुछ और यंत्रों की श्रेणी के लिए भी इसी पोर्टल पर नए सिरे से आवेदन मंगाए जाने की योजना है, जिसकी तारीखों की घोषणा अलग से की जाएगी।
रबी सीजन में बुवाई, सिंचाई और छिड़काव से जुड़े यंत्रों की मांग हर साल अक्टूबर-नवंबर के दौरान बढ़ जाती है, इसलिए इस समय इस तरह की सब्सिडी योजनाओं पर किसानों की नजर खासतौर पर बनी रहती है। आवेदन के समय बैंक खाता या आधार नंबर में गड़बड़ी होने पर अनुदान राशि अटक सकती है, इसलिए सभी जानकारी ध्यान से भरना जरूरी है।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

