भारत-नीदरलैंड्स की कृषि साझेदारी नई ऊंचाई पर, बीज और बागवानी तकनीक पर बनेगी साझा कार्ययोजना
06 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: भारत-नीदरलैंड्स की कृषि साझेदारी नई ऊंचाई पर, बीज और बागवानी तकनीक पर बनेगी साझा कार्ययोजना – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और नीदरलैंड्स के कृषि राज्य सचिव सिल्वियो एर्केंस के बीच पिछले सप्ताह नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों ने कृषि सहयोग को नई दिशा देने पर सहमति जताई है। बैठक में बीज उत्पादन, बागवानी तकनीक और जलवायु के अनुकूल खेती के तरीकों को लेकर विस्तार से बातचीत हुई।
दोनों पक्षों ने तय किया कि बीज क्षेत्र में सहयोग के अवसर तलाशने के लिए एक अलग कार्ययोजना तैयार की जाएगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत अपने बीज उद्योग को आधुनिक बनाने और उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों के उत्पादन पर जोर दे रहा है।
भारत और नीदरलैंड्स के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग का सिलसिला पिछले कई वर्षों से चल रहा है और दोनों देशों के बीच हर साल संयुक्त कार्य समूह की बैठकें होती हैं। इस बार की बैठक को खास माना जा रहा है क्योंकि इसमें बीज क्षेत्र पर अलग से फोकस करने का फैसला लिया गया है, जो पहले की बैठकों में सिर्फ एक उप-विषय के तौर पर शामिल रहता था।
25 उत्कृष्टता केंद्रों पर हुई प्रगति की समीक्षा
बैठक में भारत और नीदरलैंड्स के बीच पहले से चल रहे 25 उत्कृष्टता केंद्रों (सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस) की प्रगति की भी समीक्षा की गई। ये केंद्र बागवानी और संरक्षित खेती यानी ग्रीनहाउस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे हैं।
इन केंद्रों के जरिए किसानों को आधुनिक नर्सरी प्रबंधन, पॉलीहाउस में सब्जी और फूलों की खेती, तथा पानी व खाद के सटीक इस्तेमाल जैसी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नीदरलैंड्स दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिन्होंने सीमित जमीन के बावजूद बागवानी निर्यात में बड़ा मुकाम हासिल किया है, इसलिए भारत इस साझेदारी को अपने बागवानी क्षेत्र के लिए अहम मान रहा है।
बातचीत के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI आधारित समाधानों पर भी चर्चा हुई, जिनसे किसानों को मिट्टी, मौसम और सिंचाई से जुड़े फैसले लेने में मदद मिल सकती है। नीदरलैंड्स के मंत्री ने भारत की कृषि प्रणाली को लेकर कहा कि उन्हें भारत का समग्र दृष्टिकोण पसंद है और ये समाधान डच कृषि प्रणाली के लिए भी दिलचस्प हो सकते हैं।
बीज और बागवानी कारोबार के लिए क्या रहेगा असर
भारत में बीज, नर्सरी और ग्रीनहाउस उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए यह साझेदारी तकनीक हस्तांतरण का नया रास्ता खोल सकती है। बीज क्षेत्र पर बनने वाली कार्ययोजना से यह भी साफ होगा कि दोनों देश उच्च उपज वाली सब्जी और फूलों की किस्मों के आदान-प्रदान पर किस तरह आगे बढ़ेंगे।
कृषि मंत्रालय के मुताबिक आने वाले महीनों में दोनों पक्षों के तकनीकी अधिकारियों की बैठकें होंगी, जिनमें बीज क्षेत्र की कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। बागवानी और पशुपालन क्षेत्र में भी सहयोग के नए प्रस्तावों पर काम जारी रहने की उम्मीद है।
भारत हर साल सब्जियों और फूलों की कई उन्नत किस्मों तथा ग्रीनहाउस उपकरणों का आयात करता है, खास तौर पर यूरोपीय देशों से। ऐसे में उत्कृष्टता केंद्रों के जरिए तकनीक भारत में ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से आयात पर निर्भरता कम हो सकती है और घरेलू बीज कंपनियों को भी नई किस्में विकसित करने में मदद मिल सकती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बीज क्षेत्र की कार्ययोजना समय पर तैयार होती है, तो इसका सीधा फायदा उन किसानों को मिलेगा जो सब्जी और फूलों की नकदी फसलों से अपनी आय बढ़ाना चाहते हैं।
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