गन्ना किसानों की मांगों पर केंद्र सरकार गंभीर, रमेश चंद की अध्यक्षता में बनी जांच समिति
19 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: गन्ना किसानों की मांगों पर केंद्र सरकार गंभीर, रमेश चंद की अध्यक्षता में बनी जांच समिति – कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसानों की लगातार शिकायतों के बाद केंद्र सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति का गठन कर दिया है। इस समिति की अध्यक्षता नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद करेंगे। समिति गन्ने के लाभकारी मूल्य, चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य और मिलों में गन्ना तौल जैसी शिकायतों की जांच करेगी।
यह फैसला केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ कर्नाटक-महाराष्ट्र के किसान प्रतिनिधियों की 12 अक्टूबर को दिल्ली में हुई बैठक के बाद लिया गया। बैठक में केंद्र ने एक सप्ताह के भीतर समिति बनाने की घोषणा की थी, और दो दिन बाद ही रमेश चंद के नाम पर मुहर लग गई।
दरअसल कर्नाटक के गन्ना किसान कई दिनों से सड़कों पर उतरे हुए थे। बेलगावी जिले में किसानों ने 13 और 14 अक्टूबर को कोग्नोली टोल प्लाजा पर कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा पर एनएच-48 को बाधित कर दिया था, जिससे पुणे-कोल्हापुर रूट पर यातायात प्रभावित हुआ। कर्नाटक राज्य रैयत संघ के नेता चुन्नप्पा पुजेरी ने दिल्ली बैठक के बाद कहा था कि केंद्रीय मंत्रियों के साथ चर्चा से गन्ने की कीमतों पर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ, इसलिए किसान इसे असफल मानते हैं। जोशी ने इस चर्चा को रचनात्मक बताते हुए किसानों से सड़कें जाम न करने की अपील की थी।
किसान संगठन गन्ने के लिए प्रति टन 5,500 रुपए का भाव, चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य 60 रुपए प्रति किलो, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने और कर्नाटक में बने इथेनॉल की सरकारी खरीद जैसी मांगें उठा रहे हैं। इन्हीं मांगों के बीच अब समिति का गठन हुआ है।
समिति किन मुद्दों की जांच करेगी
समिति में कृषि आयुक्त, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के संयुक्त सचिव (चीनी) और उपभोक्ता मामले विभाग के विधिक मेट्रोलॉजी के संयुक्त सचिव सदस्य होंगे। रमेश चंद ICAR-राष्ट्रीय कृषि आर्थिक एवं नीति अनुसंधान संस्थान के पूर्व निदेशक और 15वें वित्त आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं।
समिति को पांच प्रमुख बिंदुओं पर काम करना है। पहला, खेती की लागत देखते हुए गन्ने का लाभकारी मूल्य बढ़ाने की मांग की जांच। दूसरा, चीनी के मिल-गेट न्यूनतम विक्रय मूल्य में संशोधन की मांग, जिसमें उत्पादन लागत और मिलों की वित्तीय स्थिति भी देखी जाएगी।
तीसरा बिंदु है चीनी रिकवरी की जांच, रिपोर्टिंग और सत्यापन की व्यवस्था की समीक्षा। चौथा, मिलों में गन्ना तौलने की प्रक्रिया की जांच, जिसमें कैलिब्रेशन और निरीक्षण भी शामिल है। पांचवां, मशीन से काटे गए गन्ने के वजन में होने वाली कटौती और इससे किसानों के भुगतान पर पड़ने वाले असर का आकलन।
कब तक आएगी रिपोर्ट
समिति किसान प्रतिनिधियों, चीनी मिल संघों, राज्य सरकारों और विशेषज्ञों से बातचीत करेगी। सरकार के अनुसार समिति जितनी जल्दी संभव हो, अपनी सिफारिशें सौंपेगी। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी इन सिफारिशों पर विचार करेगा।
फिलहाल सरकार ने चीनी या गन्ने के दाम में किसी तत्काल बदलाव की घोषणा नहीं की है। किसान संगठनों का कहना है कि वे समिति के काम पर नजर रखेंगे और अगर जल्द नतीजा नहीं निकला तो आंदोलन फिर तेज किया जा सकता है। गन्ना उत्पादक राज्यों में यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि चीनी मिलों की रिकवरी दर और तौल की पारदर्शिता सीधे किसान के हाथ में आने वाले भुगतान से जुड़ी होती है।
केंद्र हर साल गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य यानी एफआरपी तय करता है, लेकिन कई राज्य सरकारें इससे ऊपर अपना राज्य परामर्शित मूल्य यानी एसएपी घोषित करती हैं। कर्नाटक में किसानों की मांग इसी एसएपी को लेकर है, जबकि महाराष्ट्र में तौल और रिकवरी दर की पारदर्शिता बड़ा मुद्दा रही है। पेराई सीजन शुरू होने के ठीक पहले यह विवाद बढ़ने से किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, इसलिए समिति के गठन को किसान संगठन सावधानी के साथ एक सकारात्मक शुरुआत मान रहे हैं।
उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र देश के सबसे बड़े गन्ना और चीनी उत्पादक राज्यों में शामिल हैं, जहां हर साल करोड़ों गन्ना किसान और मिल मजदूर इस फसल पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में रमेश चंद समिति की सिफारिशों का असर सिर्फ कर्नाटक-महाराष्ट्र तक सीमित न रहकर देश भर के गन्ना क्षेत्र की कीमत और भुगतान व्यवस्था पर पड़ सकता है।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture


