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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

केंद्र ने चीनी मिलों को त्योहारी सीजन में अक्टूबर उत्पादन की अतिरिक्त बिक्री की छूट दी

20 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: केंद्र ने चीनी मिलों को त्योहारी सीजन में अक्टूबर उत्पादन की अतिरिक्त बिक्री की छूट दी – त्योहारी सीजन में बाजार में चीनी की कोई कमी न हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को बड़ी राहत दी है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने सभी चीनी मिलों को अक्टूबर 2026 में बनी चीनी, अक्टूबर और नवंबर दोनों महीनों में अपने नियमित मासिक कोटे से अलग, अतिरिक्त मात्रा में बेचने की इजाजत दे दी है।

यह आदेश चीनी एवं वनस्पति तेल निदेशक अरविंद कुमार रावत की ओर से 16 अक्टूबर को जारी किया गया। आदेश के अनुसार अक्टूबर में बनी चीनी अब मिलों के सामान्य मासिक रिलीज कोटे में शामिल नहीं होगी, यानी मिलें अपने तय कोटे के ऊपर यह चीनी बाजार में उतार सकेंगी।

मंत्रालय ने उदाहरण देकर समझाया कि अगर किसी मिल ने अक्टूबर में 1,000 टन चीनी बनाई है, तो वह इस पूरी मात्रा को अक्टूबर या नवंबर में अपने तय कोटे से ऊपर अलग से बेच सकती है।

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दशहरा-दिवाली से पहले बढ़ी मांग

दशहरा, दिवाली और भाई दूज जैसे त्योहारों के दौरान मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। सरकार चाहती है कि इस दौरान बाजार में चीनी की तंगी न हो और दाम काबू में रहें।

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इस बार कई मिलों ने गन्ने की पेराई सामान्य समय से लगभग एक महीने पहले ही शुरू कर दी थी। महाराष्ट्र में इस सीजन की पेराई के लिए 15 अक्टूबर की तारीख तय की गई थी, जबकि कुछ मिलों ने इससे भी पहले पेराई शुरू कर दी। इससे अक्टूबर में उत्पादन ज्यादा हुआ है, जिसे बाजार में तेजी से खपाने के लिए यह छूट दी गई है।

खाद्य मंत्रालय हर पखवाड़े घरेलू बिक्री का कोटा तय करता है। अक्टूबर के पहले पखवाड़े के लिए यह कोटा 13 लाख टन और दूसरे पखवाड़े के लिए 14 लाख टन रखा गया था, यानी पूरे महीने के लिए कुल 27 लाख टन।

उद्योग ने किया स्वागत, किसानों के भुगतान पर भी असर की उम्मीद

अखिल भारतीय चीनी व्यापार संघ (एआईएसटीए) के अध्यक्ष प्रफुल्ल विठलानी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे चालू त्योहारी सीजन में घरेलू बाजार में सप्लाई काफी बढ़ेगी। उनके मुताबिक इससे देशभर में चीनी की उपलब्धता आसान रहेगी और थोक व फुटकर दोनों स्तर पर दाम नियंत्रण में रहने में मदद मिलेगी।

मिलों के लिए इसका मतलब है कि गन्ने से बनी चीनी तेजी से बिक सकेगी, जिससे नकदी प्रवाह बेहतर होगा। मिलों की बिक्री जितनी तेज होगी, किसानों को गन्ने के बकाया भुगतान का चक्र भी उतना ही तेज हो सकता है, क्योंकि ज्यादातर राज्यों में गन्ना मूल्य का भुगतान मिलों की चीनी बिक्री से मिलने वाली नकदी पर निर्भर करता है।

इससे पहले सितंबर में भी खाद्य मंत्रालय ने मिलों के लिए स्टॉक से जुड़े नियम सख्त किए थे, ताकि कोई मिल जरूरत से ज्यादा चीनी रोककर न रखे और बाजार में कृत्रिम तंगी न बने। उस समय मिलों को दलाल या बड़े खरीदार को बेची गई चीनी सात दिन के भीतर गोदाम से भेजने और हर शुक्रवार स्टॉक की जानकारी पोर्टल पर देने को कहा गया था।

चीनी उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि पेराई सीजन की शुरुआत में ही इतनी बड़ी छूट मिलना मिलों के लिए राहत की बात है, क्योंकि गोदामों में चीनी रखने की जगह और लागत दोनों सीमित होती हैं। आने वाले हफ्तों में त्योहारी मांग के साथ यह भी देखा जाएगा कि इस छूट से बाजार में चीनी के दाम वाकई स्थिर रहते हैं या नहीं।

भारत दुनिया में चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है, और घरेलू बाजार में इसकी कीमत का सीधा असर आम उपभोक्ता के साथ-साथ गन्ना किसानों की जेब पर भी पड़ता है। इसी वजह से खाद्य मंत्रालय हर महीने मिलों की बिक्री पर करीबी नजर रखता है और जरूरत के मुताबिक कोटे में बदलाव करता रहता है।

देश के कई हिस्सों में गन्ना किसानों की पुरानी शिकायत रही है कि मिलें समय पर पूरा भुगतान नहीं करतीं। मिलों का कहना है कि बिक्री की रफ्तार और नकदी प्रवाह ही तय करते हैं कि वे किसानों को कितनी जल्दी भुगतान कर पाएंगी, इसलिए अतिरिक्त बिक्री की छूट को किसानों के भुगतान से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्यों में पेराई सीजन अभी शुरुआती दौर में है। आने वाले महीनों में जैसे-जैसे पेराई रफ्तार पकड़ेगी, उत्पादन और बढ़ेगा, जिससे मिलों के लिए बिक्री की यह छूट और अहम हो जाएगी। कृषि क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि अगर मिलें इस मौके पर स्टॉक जल्दी निकाल पाईं, तो आगे के पेराई सीजन के लिए भी उनके पास बेहतर नकदी और जगह बची रहेगी।

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