मत्स्य कॉन्क्लेव 2026: एमपी में मछली पालन और निर्यात को बढ़ावा देने की तैयारी, भोपाल में जुटेंगे 1,000 से अधिक मत्स्य पालक
24 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: मत्स्य कॉन्क्लेव 2026: एमपी में मछली पालन और निर्यात को बढ़ावा देने की तैयारी, भोपाल में जुटेंगे 1,000 से अधिक मत्स्य पालक – मध्य प्रदेश में अंतर्देशीय मत्स्य पालन को बढ़ावा देने, इस क्षेत्र में निवेश के नए अवसर विकसित करने और मछली के निर्यात को मजबूत बनाने के उद्देश्य से 23 अक्टूबर 2026 को भोपाल में ‘मत्स्य निवेशक एवं निर्यातक कॉन्क्लेव 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। मध्य प्रदेश शासन के मत्स्य विभाग और भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग की ओर से आयोजित इस कॉन्क्लेव में निवेशक, निर्यातक, उद्यमी और प्रदेशभर से 1,000 से अधिक मत्स्य पालक शामिल होंगे।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में मछली उत्पादन को निवेश, प्रसंस्करण, शीत भंडारण, मूल्य संवर्धन और निर्यात बाजारों से जोड़ना है। इसके जरिए मत्स्य पालन क्षेत्र को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय पूरी मूल्य श्रृंखला के विकास पर जोर दिया जाएगा, ताकि मत्स्य पालकों और मछली किसानों को बाजार तक बेहतर पहुंच मिल सके और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो।
मत्स्य पालन में निवेश के नए अवसरों पर होगी चर्चा
कॉन्क्लेव में मत्स्य पालन क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने, वित्तीय सहायता तक पहुंच बढ़ाने, बाजार से जुड़ाव मजबूत करने और अंतर्देशीय मत्स्य पालन की पूरी मूल्य श्रृंखला में सहयोग बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसमें निवेशकों, निर्यातकों, सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), उद्यमियों, स्टार्टअप, प्रसंस्करण इकाइयों, वित्तीय संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। आयोजन का एक प्रमुख उद्देश्य मध्य प्रदेश जैसे अंतर्देशीय राज्य को निवेश और निर्यात से जुड़े अवसरों के साथ जोड़ना है, जिससे मत्स्य पालन क्षेत्र में कारोबार और रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकें।
जारी होंगे मध्य प्रदेश मत्स्य निवेश एवं निर्यात दिशानिर्देश 2026
कॉन्क्लेव के दौरान ‘मध्य प्रदेश मत्स्य निवेश एवं निर्यात दिशानिर्देश, 2026’ जारी किए जाएंगे। केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश को जलाशय मत्स्य पालन क्लस्टर के रूप में अधिसूचित किया है। प्रस्तावित दिशानिर्देशों का उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना और इससे जुड़ी गतिविधियों के विकास को सुविधाजनक बनाना है।
इसके तहत मछली बीज उत्पादन केंद्रों, मछली बीज एवं आहार, जलाशय और केज मत्स्य पालन, जलीय जीव स्वास्थ्य प्रबंधन, मछली प्रसंस्करण, शीत श्रृंखला, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स, मूल्य संवर्धन और बाजार विकास जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर जोर दिया जाएगा। कार्यक्रम में अंतर्देशीय राज्यों की निर्यात क्षमता से संबंधित मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) भी जारी की जाएंगी। इसके साथ ही एकीकृत केज कल्चर इकाइयों का वर्चुअल उद्घाटन भी किया जाएगा।
जलाशयों और अमृत सरोवरों के विकास को मिलेगा बढ़ावा
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह मध्य प्रदेश में जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास से संबंधित प्रशासनिक स्वीकृति पत्र सौंपेंगे। इस पहल का उद्देश्य जल संसाधनों की क्षमता का बेहतर उपयोग करते हुए मत्स्य पालन गतिविधियों को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल और मध्य प्रदेश के मत्स्य कल्याण एवं मत्स्य विकास मंत्री नारायण सिंह पंवार सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और संबंधित क्षेत्र के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।
देश के कुल मछली उत्पादन में अंतर्देशीय मत्स्य पालन की बड़ी हिस्सेदारी
भारत में मत्स्य पालन क्षेत्र का महत्व लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2024-25 में देश का कुल मछली उत्पादन 197.75 लाख टन रहा, जिसमें अंतर्देशीय मत्स्य पालन का योगदान 151.60 लाख टन था। यानी देश के कुल मछली उत्पादन का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अंतर्देशीय मत्स्य पालन से आया। वहीं, वर्ष 2025-26 में भारत का समुद्री खाद्य निर्यात 73,890 करोड़ रुपये के मूल्य तक पहुंचा। ये आंकड़े मत्स्य पालन और निर्यात क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं को दर्शाते हैं।
मध्य प्रदेश में लगभग 4.50 लाख हेक्टेयर जल क्षेत्र उपलब्ध है, जो अंतर्देशीय मत्स्य पालन के विकास की बड़ी संभावना प्रस्तुत करता है। कॉन्क्लेव के माध्यम से इस जल संसाधन का बेहतर उपयोग करने, निजी निवेश को प्रोत्साहित करने और मत्स्य पालन को बाजारोन्मुख बनाने पर जोर दिया जाएगा। इस आयोजन से प्रदेश में मत्स्य पालन की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने, उद्यमियों और निर्यातकों के लिए नए अवसर विकसित करने तथा मत्स्य पालकों और मछली किसानों की आय एवं आजीविका को बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
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