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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

अमेरिका में ‘भारत की बेटी’ का जलवा:  कृषि शोध के लिए अमीना नाजरीन ने जीता 500 डॉलर का ग्लोबल यूथ इंस्टीट्यूट अवार्ड  

25 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: अमेरिका में ‘भारत की बेटी’ का जलवा:  कृषि शोध के लिए अमीना नाजरीन ने जीता 500 डॉलर का ग्लोबल यूथ इंस्टीट्यूट अवार्ड – नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (एनएएएस), नई दिल्ली ने अमेरिका के आयोवा राज्य के डेस मोइनेस में आयोजित नॉर्मन ई. बोरलॉग इंटरनेशनल डायलॉग 2026 में भारत के कृषि अनुसंधान की उत्कृष्टता को प्रदर्शित किया। वर्ल्ड फूड प्राइज फाउंडेशन (डब्ल्यूएफपीएफ) का यह प्रतिष्ठित कार्यक्रम 20 से 22 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘बिफोर हंगर विन्स’ थी। इसमें भारत के सात हाई स्कूल विद्यार्थियों ने भाग लिया, जिनमें अमीना नाजरीन ए.एस. ने 500 अमेरिकी डॉलर का ग्लोबल यूथ इंस्टीट्यूट (जीवाईआई) अवार्ड जीता।

अकादमी की भागीदारी में एनएएएस और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के प्रमुख प्रकाशनों को प्रदर्शित करने के लिए एक विशेष प्रदर्शनी बूथ लगाया गया। इसके अलावा, ग्लोबल यूथ इंस्टीट्यूट के कार्यक्रम में भारतीय विद्यार्थियों की भागीदारी, कृषि उच्च शिक्षा पर विशेष गोलमेज चर्चा और एनएएएस तथा अमेरिका की कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीएएसटी) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी इस आयोजन के प्रमुख हिस्से रहे।

अमीना नाजरीन ने जीता 500 डॉलर का पुरस्कार

भारत के विभिन्न हिस्सों से आए सात हाई स्कूल विद्यार्थियों का चयन एनएएएस-डब्ल्यूएफपीएफ चयन प्रक्रिया के माध्यम से किया गया था। इन विद्यार्थियों ने ग्लोबल यूथ इंस्टीट्यूट (जीवाईआई) के कार्यक्रम में हिस्सा लिया और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इस कार्यक्रम से विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अन्य प्रतिभागियों के साथ जुड़ने और खाद्य सुरक्षा तथा टिकाऊ कृषि-खाद्य प्रणालियों पर अपने विचार साझा करने का अवसर मिला। इसी दौरान अमीना नाजरीन ए.एस. ने 500 अमेरिकी डॉलर की नकद राशि वाला जीवाईआई अवार्ड जीता। यह उपलब्धि एनएएएस और भारत के लिए गर्व का विषय रही। इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय युवा प्रतिभाओं की क्षमता प्रदर्शित हुई और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर युवाओं की भागीदारी को पहचान मिली।

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एनएएएस और आईसीएआर के प्रकाशनों का किया प्रदर्शन

कार्यक्रम में एनएएएस ने एक विशेष प्रदर्शनी बूथ के माध्यम से अकादमी और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के प्रमुख प्रकाशनों को प्रदर्शित किया। इस पहल के जरिए भारत के वैज्ञानिक योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने रखा गया। प्रदर्शनी बूथ ने शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और अन्य हितधारकों के साथ भारतीय कृषि अनुसंधान, वैज्ञानिक ज्ञान और नीतिगत दृष्टिकोणों को साझा करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान किया।

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कृषि उच्च शिक्षा में बदलाव पर हुई चर्चा

नॉर्मन ई. बोरलॉग इंटरनेशनल डायलॉग 2026 के साथ कृषि उच्च शिक्षा पर एक विशेष गोलमेज चर्चा भी आयोजित की गई। इसमें भारतीय कृषि समुदाय के विशेषज्ञों ने वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से कृषि शिक्षा में बदलाव लाने के मुद्दे पर विचार-विमर्श किया। इस बैठक को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज के अध्यक्ष, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने कृषि उच्च शिक्षा को नए सिरे से तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य के कृषि पेशेवरों को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि वे जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण, जैव विविधता के नुकसान और पौष्टिक एवं स्वस्थ भोजन की बढ़ती मांग जैसी वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सकें।

कृषि अनुसंधान और शिक्षा में सहयोग पर जोर

डॉ. जाट ने अपने संबोधन में केवल उत्पादन पर केंद्रित कृषि व्यवस्था से आगे बढ़कर एकीकृत कृषि-खाद्य प्रणाली और मूल्य-श्रृंखला (वैल्यू चेन) आधारित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने उद्योग की जरूरतों के अनुरूप मानव संसाधन तैयार करने के लिए शिक्षा जगत और उद्योग के बीच बेहतर सहयोग, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान के आदान-प्रदान और भारतीय कृषि विशेषज्ञों के प्रवासी समुदाय से जुड़ने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कृषि अनुसंधान एवं विकास की उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए नीतिगत संवाद को बढ़ावा देने की जरूरत भी बताई। साथ ही, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग को एक मंच पर लाने में नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज की भूमिका पर प्रकाश डाला।

एनएएएस और सीएएसटी के बीच हुआ एमओयू

कार्यक्रम की एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (एनएएएस) और अमेरिका की कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीएएसटी) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होना रहा। इस समझौते का उद्देश्य कृषि अनुसंधान, क्षमता विकास और ज्ञान के आदान-प्रदान में सहयोग के नए रास्ते खोलना है। इस साझेदारी से दोनों संस्थानों के बीच संबंध मजबूत होने और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

टिकाऊ कृषि और वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर जोर

युवा प्रतिभागियों को बधाई देते हुए और अकादमी की वैश्विक भागीदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि टिकाऊ कृषि और वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए नए और प्रभावी समाधान खोजने के उद्देश्य से युवा प्रतिभाओं को निखारना और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह के सामूहिक प्रयास कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे, विशेष रूप से ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों में।

अपने वैज्ञानिक प्रयासों, युवाओं की भागीदारी, शैक्षणिक चर्चाओं और संस्थागत साझेदारियों के माध्यम से नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज ने भारत की कृषि उत्कृष्टता को प्रदर्शित करने और एक मजबूत, टिकाऊ तथा खाद्य-सुरक्षित भविष्य के निर्माण में योगदान देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। 

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