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पशुपालन (Animal Husbandry)राज्य कृषि समाचार (State News)

कुत्तों से गाय-भैंसों में फैलता है रेबीज, ऐसे करें बचाव

लेखक: डॉ. निर्भय भावसार¹, डॉ. सलाम प्रबेक्स2, ¹एम.वी. एससी., प्रसार शिक्षा विभाग, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली, 2पीएच.डी., प्रसार शिक्षा विभाग, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली

22 अगस्त 2026, भोपाल: कुत्तों से गाय-भैंसों में फैलता है रेबीज, ऐसे करें बचाव – भारत रेबीज के लिए स्थानिक देश है, यानी यहां यह रोग लगातार पाया जाता है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, देश में हर साल लगभग 91 लाख पशु-काटने की घटनाएं होती हैं, जिनमें तीन-चौथाई से अधिक घटनाएं कुत्तों के काटने से जुड़ी होती हैं। यही संक्रमित कुत्ते गाय, भैंस और अन्य पशुओं के लिए भी रेबीज का प्रमुख स्रोत बन सकते हैं। जब कोई संक्रमित कुत्ता गाय या भैंस को काटता है, तो उसकी लार में मौजूद रेबीज का विषाणु घाव के माध्यम से पशु के शरीर में पहुंच जाता है और नसों के रास्ते मस्तिष्क तक जाकर गंभीर बीमारी पैदा करता है। भारत में गाय-भैंसों में रेबीज की राष्ट्रीय स्तर पर कोई निश्चित दर उपलब्ध नहीं है, लेकिन अलग-अलग अध्ययनों से पशुधन में इसके संक्रमण की गंभीरता का पता चलता है। उदाहरण के लिए, पंजाब में 2004 से 2014 के बीच प्रयोगशाला से पुष्ट 320 पशु रेबीज मामलों में 29.7% मामले भैंसों और 23.1% मामले गायों में पाए गए। इससे स्पष्ट है कि पशुधन को रेबीज से बचाने के लिए संक्रमित और आवारा कुत्तों से सुरक्षा तथा समय पर टीकाकरण और उपचार संबंधी सावधानियां बेहद जरूरी हैं।

गाय-बैलों में रेबीज का संक्रमण कैसे होता है?

गाय-बैलों में रेबीज मुख्य रूप से संक्रमित कुत्तों के काटने से फैलता है। इसके अलावा, जंगल या खुले क्षेत्रों में चरने वाले पशुओं को संक्रमित जंगली जानवरों के काटने से भी रेबीज हो सकता है। इनमें लोमड़ी, सियार, भेड़िया, जंगली कुत्ता, बंदर और नेवला जैसे जानवर शामिल हो सकते हैं। संक्रमित जानवर की लार में मौजूद रेबीज विषाणु काटने के घाव के माध्यम से पशु के शरीर में प्रवेश करता है और नसों के रास्ते मस्तिष्क तक पहुंचता है। इसलिए जंगल या खुले क्षेत्रों में चरने वाले पशुओं को आवारा कुत्तों और जंगली जानवरों से बचाना तथा किसी भी संदिग्ध जानवर के काटने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है।

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गाय-बैलों में रेबीज के प्रमुख लक्षण

गाय-बैलों में रेबीज होने पर शुरुआत में उनके व्यवहार और सामान्य गतिविधियों में अचानक बदलाव दिखाई दे सकता है। कई बार इसके लक्षण दूसरी तंत्रिका संबंधी बीमारियों जैसे दिखाई देते हैं, इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर रेबीज की पक्की पहचान करना मुश्किल हो सकता है।

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प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं–

  • अचानक बेचैनी या घबराहट होना
  • व्यवहार में बदलाव या असामान्य आक्रामकता
  • बार-बार रंभाना या असामान्य आवाज निकालना
  • मुंह से अत्यधिक लार निकलना
  • चारा और पानी निगलने में कठिनाई
  • मांसपेशियों में कंपन या झटके आना
  • लड़खड़ाकर चलना और शरीर का संतुलन बिगड़ना
  • कमजोरी बढ़ना और धीरे-धीरे लकवा होना
  • जमीन पर गिर जाना और उठने में असमर्थ होना
  • बीमारी बढ़ने पर बेहोशी और अंततः मृत्यु होना

ध्यान रखें: यदि गाय या बैल में अचानक इस तरह के तंत्रिका संबंधी लक्षण दिखाई दें, विशेषकर यदि उसे हाल ही में किसी कुत्ते या जंगली जानवर ने काटा हो, तो पशु को अलग रखें और तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।

गाय-बैलों में रेबीज से बचाव के आसान उपाय

1. कुत्तों का टीकाकरण कराएं- रेबीज को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका संक्रमित कुत्तों में बीमारी को रोकना है। इसलिए पालतू कुत्तों का समय पर रेबीज का टीका लगवाएं और आवारा कुत्तों के टीकाकरण में भी सहयोग करें।

2. पशुओं को आवारा कुत्तों से बचाएं-गाय, बैल और भैंस को रात में खुले में न छोड़ें। पशुशाला को इस तरह रखें कि आवारा कुत्ते आसानी से अंदर न आ सकें।

3. कुत्ते के काटने को नजरअंदाज न करें-यदि किसी गाय, बैल या भैंस को कुत्ते या किसी संदिग्ध जंगली जानवर ने काट लिया है, तो इसे मामूली चोट न समझें। तुरंत पशु चिकित्सक को सूचना दें और पशु को दूसरे पशुओं से अलग रखें।

4. संक्रमित पशु की लार से सावधान रहें-संदिग्ध रेबीज वाले पशु की लार को नंगे हाथों से न छुएं। पशु को संभालते समय दस्ताने और आवश्यक सुरक्षा उपकरण का उपयोग करें।

5. यदि इंसान को काट लिया जाए तो तुरंत इलाज लें-यदि किसी व्यक्ति को संदिग्ध पशु ने काटा या खरोंचा है, या उसकी लार किसी खुले घाव, आंख, नाक या मुंह के संपर्क में आई है, तो घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोएं और बिना देरी किए स्वास्थ्य केंद्र जाएं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार रेबीज का टीका और जरूरत पड़ने पर रेबीज इम्युनोग्लोब्युलिन दिया जाता है।

6. घरेलू नुस्खों पर भरोसा न करें-काटने के घाव पर मिर्च, तेल, मिट्टी, राख, जड़ी-बूटी या कोई अन्य घरेलू पदार्थ न लगाएं। इससे इलाज में देरी हो सकती है और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

निष्कर्ष

गाय, बैल और भैंसों में रेबीज के मामले कुत्तों की तुलना में कम दिखाई देते हैं, लेकिन यह एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जिसका संबंध सीधे मानव स्वास्थ्य से भी है। भारत में पशुधन में रेबीज के कई मामले संक्रमित कुत्तों के काटने से जुड़े पाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में चरने वाले पशुओं के कारण आवारा कुत्तों और संक्रमित जंगली जानवरों के संपर्क का खतरा बढ़ जाता है।

याद रखें रेबीज के लक्षण दिखाई देने के बाद यह बीमारी लगभग हमेशा जानलेवा होती है, लेकिन समय पर सावधानी और उचित चिकित्सा से इसे रोका जा सकता है। इसलिए किसी भी पशु को कुत्ते या संदिग्ध जंगली जानवर के काटने पर लापरवाही न करें और तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें।

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