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पशुपालन (Animal Husbandry)राज्य कृषि समाचार (State News)

5 एकड़ में धान के साथ मछली-मुर्गी पालन, बीजापुर के किसान ने अपनाया समन्वित खेती मॉडल; बढ़ी आमदनी

18 अगस्त 2026, रायपुर: 5 एकड़ में धान के साथ मछली-मुर्गी पालन, बीजापुर के किसान ने अपनाया समन्वित खेती मॉडल; बढ़ी आमदनी – खेती के साथ पशुपालन, मछली पालन और बागवानी जैसी गतिविधियों को जोड़कर किसान अपनी आमदनी के स्रोत बढ़ा सकते हैं और खेती से जुड़े जोखिम को कम कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के गंगालूर तहसील के ग्राम चेरपाल निवासी किसान राजैया पसपुल ने इसी सोच के साथ समन्वित कृषि पद्धति अपनाई है। करीब 5 एकड़ कृषि भूमि पर खेती के साथ उन्होंने मछली और मुर्गी पालन को भी जोड़ा है।

उन्नत किस्मों से कर रहे धान की खेती

राजैया खरीफ सीजन में करीब 5 एकड़ में धान की खेती करते हैं। वह 1001, महामाया और 1010 जैसी उन्नत धान किस्मों का उपयोग कर रहे हैं। कृषि विभाग की ओर से मिले बीज, खाद, माइक्रोन्यूट्रिएंट और अन्य सुविधाओं से उन्हें बेहतर उत्पादन के लिए सहयोग मिला है। सिंचाई के लिए उनके पास सौर पंप उपलब्ध है। इसके अलावा ट्रैक्टर और राइस मिल जैसी सुविधाओं से खेती से जुड़े काम आसान हुए हैं।

एक एकड़ में सरसों की फसल

रबी वर्ष 2025-26 में कृषि विभाग के मार्गदर्शन में राजैया ने एक एकड़ में सरसों की खेती का प्रदर्शन किया। इससे उन्हें करीब 200 किलोग्राम सरसों का उत्पादन मिला। धान के साथ दूसरी फसल को शामिल करने से खेती में विविधता आई और अतिरिक्त आय का अवसर भी मिला।

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खेती के साथ मछली और मुर्गी पालन

राजैया ने अपनी खेती को केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने समन्वित कृषि पद्धति के तहत मछली पालन और मुर्गी पालन को भी कृषि गतिविधियों से जोड़ा है। इससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो रहा है और परिवार के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार हुए हैं। इस मॉडल में खेती के साथ अलग-अलग गतिविधियों को जोड़ने से किसान किसी एक फसल पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहता। इससे खेती से होने वाली आमदनी को अधिक स्थिर बनाने में मदद मिलती है।

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सरकारी योजनाओं से मिला सहयोग

राजैया को कृषि विभाग के माध्यम से फेंसिंग, स्प्रिंकलर पाइप, किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, फसल बीमा और सौर सुजला योजना जैसी विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला है। इन सुविधाओं से उनकी सिंचाई व्यवस्था मजबूत हुई और खेती के काम पहले की तुलना में आसान हुए हैं।

दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा

राजैया का कहना है कि आधुनिक तकनीक अपनाने, कृषि विभाग से मार्गदर्शन लेने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने से खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। फसल उत्पादन के साथ मछली और मुर्गी पालन को जोड़कर उन्होंने अपनी खेती को समन्वित कृषि का रूप दिया है। उनकी पहल यह बताती है कि फसल विविधीकरण, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का बेहतर इस्तेमाल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उनका समन्वित खेती मॉडल बीजापुर के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।

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