पशुपालन (Animal Husbandry)राज्य कृषि समाचार (State News)

सितंबर-अक्टूबर में बकरी के बच्चे लेने की तैयारी, ठंड और मौसमी बीमारियों से बचाने में मिलेगी मदद

14 अगस्त 2026, भोपाल: सितंबर-अक्टूबर में बकरी के बच्चे लेने की तैयारी, ठंड और मौसमी बीमारियों से बचाने में मिलेगी मदद – बकरी पालन करने वाले किसानों के लिए प्रजनन का सही समय तय करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। बकरी के गर्भधारण और बच्चे के जन्म का समय यदि मौसम को ध्यान में रखकर तय किया जाए तो नवजात बच्चों को कई मौसमी बीमारियों और संक्रमण से बचाने में मदद मिल सकती है। इसी वजह से अब कई पशुपालक सितंबर-अक्टूबर में बकरी के बच्चे लेने की तैयारी करते हैं, ताकि दिसंबर-जनवरी की कड़ाके की ठंड आने तक बच्चे कुछ बड़े और मजबूत हो जाएं।

आने वाले सितंबर महीने में हल्की बारिश और नमी का मौसम रहता है। ऐसे में पशुपालकों को बकरी के प्रजनन की तैयारी पहले से कर लेनी चाहिए। बकरी पालकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि बकरी पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण दूध दे तथा उसका होने वाला बच्चा स्वस्थ रहे। इसके लिए प्रजनन के साथ बकरी के खान-पान, आवास और चराई व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

खुली जगह में चराना जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, चाहे फार्म में पांच बकरियां हों या सौ, उन्हें पर्याप्त खुली जगह मिलना जरूरी है। बकरियों को सामान्य तौर पर तीन तरीकों से पाला जाता है—खुले में चराना, खूंटे पर बांधकर रखना तथा चराने के साथ खूंटे पर रखना। गर्भवती और दूध देने वाली बकरियों के लिए संतुलित आहार के साथ पर्याप्त गतिविधि भी उनकी सेहत के लिए महत्वपूर्ण होती है।

गर्भधारण के समय बढ़ाएं खुराक

केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG), मथुरा के विशेषज्ञों के अनुसार, बकरी को गर्भित कराने की योजना बनाते समय ही उसके पोषण पर ध्यान देना चाहिए। सामान्य आहार के साथ हरे चारे और दाने की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाई जा सकती है। गर्भधारण से करीब दो सप्ताह पहले सामान्य खुराक में 100 से 200 ग्राम तक अतिरिक्त दाना दिया जा सकता है। वहीं बच्चे के जन्म से एक-दो सप्ताह पहले दाने की मात्रा जरूरत के अनुसार 300 से 400 ग्राम तक बढ़ाने की सलाह दी जाती है। बकरी को गुणवत्तापूर्ण हरा चारा देना भी जरूरी है।

दूध देने वाली बकरी को भी अतिरिक्त पोषण

दूध देने वाली बकरी को भी उसकी दूध उत्पादन क्षमता के अनुसार अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है। करीब एक लीटर दूध देने वाली बकरी को प्रतिदिन लगभग 300 ग्राम तक दाना दिया जा सकता है। दाना एक साथ देने के बजाय दिन में कम से कम दो बार देना बेहतर माना जाता है। इसके अलावा हरे और सूखे चारे को मिलाकर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

पानी की उपलब्धता भी लगातार बनी रहनी चाहिए। सामान्य मौसम में करीब 20 किलो वजन वाली बकरी को लगभग 700 मिलीलीटर पानी की जरूरत हो सकती है, जबकि गर्मी में पानी की आवश्यकता काफी बढ़ जाती है। हालांकि वास्तविक मात्रा मौसम, चारे, वजन, दूध उत्पादन और पशु की स्थिति के अनुसार बदल सकती है।

मौसम देखकर तय करें प्रजनन का समय

पशुपालन विशेषज्ञों के अनुसार अप्रैल से जून के बीच बकरियों में प्राकृतिक हीट की स्थिति अधिक देखने को मिलती है। इस दौरान पशुपालकों को सुबह-शाम बकरियों पर नजर रखनी चाहिए। इस अवधि में गर्भित हुई बकरियों से सितंबर से बच्चे मिलना शुरू हो सकते हैं।सितंबर-अक्टूबर में बच्चे मिलने का फायदा यह है कि दिसंबर-जनवरी की ठंड आने तक नवजात कुछ मजबूत हो जाते हैं। इसी तरह अक्टूबर-नवंबर में गर्भधारण कराने पर मार्च-अप्रैल में बच्चे मिल सकते हैं। इस समय जन्मे बच्चे कड़ाके की सर्दी से बच जाते हैं और गर्मी तथा बारिश के मौसम से पहले उनकी प्रतिरोधक क्षमता बेहतर विकसित हो सकती है।

इस तरह मौसम के अनुसार प्रजनन कैलेंडर अपनाने, संतुलित आहार देने, स्वच्छ शेड रखने और समय पर पशु स्वास्थ्य देखभाल करने से नवजात बच्चों की बीमारी और मृत्यु का जोखिम काफी कम किया जा सकता है। बकरी पालन में सही समय पर लिया गया यह छोटा-सा फैसला पशुपालक की लागत घटाने और मुनाफा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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