राजस्थान में पशु नस्ल सुधार की दिशा में बड़ा कदम
सुमेरपुर में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इंडीजीनस फार्म
200 बीघा में विकसित होगा अत्याधुनिक केंद्र, करीब 60 करोड़ रुपए होंगे खर्च
11 अगस्त 2026, पाली: राजस्थान में पशु नस्ल सुधार की दिशा में बड़ा कदम – पशुओं की नस्ल सुधार, संरक्षण और देशी पशु नस्लों को बढ़ावा देने की दिशा में राजस्थान सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। प्रदेश के पहले और देश के अनूठे ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इंडीजीनस फार्म’ के प्रशासनिक भवन के निर्माण कार्य का भूमि पूजन एवं शिलान्यास पाली जिले के सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र के साण्डेराव गांव में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया।
पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत की। राज्य सरकार की बजट घोषणा 2025-26 के तहत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के ड्रीम प्रोजेक्ट को अब धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
200 बीघा में विकसित होगा अत्याधुनिक सेंटर
करीब 200 बीघा भूमि में विकसित किए जाने वाले इस सेंटर पर लगभग 60 करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इंडीजिनस फार्म का उद्देश्य देशी पशु नस्लों के संरक्षण के साथ उनके नस्ल सुधार को वैज्ञानिक एवं आधुनिक तकनीक से जोड़ना है।
इस केंद्र के माध्यम से देशी नस्ल के पशुओं के संरक्षण, संवर्धन और गुणवत्तापूर्ण प्रजनन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही पशुपालकों को बेहतर नस्ल, वैज्ञानिक पशुपालन और आधुनिक तकनीकों से संबंधित जानकारी एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में भी यह केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पशुपालकों को मिलेगा लाभ
राजस्थान में बड़ी संख्या में पशुपालक पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से जुड़े हैं। ऐसे में देशी पशु नस्लों की गुणवत्ता में सुधार होने से पशुपालकों की उत्पादकता और आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है। सरकार की इस पहल से प्रदेश की पारंपरिक पशु नस्लों के संरक्षण के साथ उन्हें आधुनिक पशुपालन व्यवस्था से जोड़ने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

