भारतीय कृषि 2026: उत्पादन, किसान, निर्यात और संबद्ध क्षेत्रों के 10 प्रमुख आंकड़े
17 अगस्त 2026, नई दिल्ली: भारतीय कृषि 2026: उत्पादन, किसान, निर्यात और संबद्ध क्षेत्रों के 10 प्रमुख आंकड़े – भारत का कृषि और संबद्ध क्षेत्र बीते एक दशक में अधिक विविध और व्यापक ग्रामीण अर्थव्यवस्था का हिस्सा बना है। कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, खाद्य प्रसंस्करण, डिजिटल कृषि और कृषि निर्यात का दायरा भी बढ़ा है। अगस्त 2026 में जारी सरकारी आंकड़े कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र के सकल मूल्य वर्धन (GVA), खाद्यान्न और बागवानी उत्पादन, कृषि ऋण, बाजार बुनियादी ढांचे और किसान सहायता के साथ-साथ संबद्ध क्षेत्रों में विस्तार को दर्शाते हैं।
इन 10 प्रमुख आंकड़ों से 2026 में भारतीय कृषि की बदलती तस्वीर को समझा जा सकता है।
1. कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का GVA बढ़कर अनुमानित 52.08 लाख करोड़ रुपये
भारत के कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धन (GVA) 2014-15 में 20.94 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में अनुमानित 52.08 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
इसी अवधि में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग का बजट आवंटन भी बढ़ा है। यह 2013-14 में 27,663 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 1,40,528.78 करोड़ रुपये हो गया।
कृषि आज भी भारत में रोजगार और आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। देश के लगभग 46.1% कार्यबल की आजीविका कृषि से जुड़ी है। वहीं, पशुधन और मत्स्य क्षेत्र में लगभग 5-6% की स्थिर वृद्धि दर्ज की गई है।
2. खाद्यान्न उत्पादन 376.56 मिलियन टन पहुंचा
भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन 2013-14 में 265.05 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 376.56 मिलियन टन हो गया है। यह आंकड़ा तीसरे अग्रिम अनुमान पर आधारित है।
बागवानी उत्पादन भी इसी अवधि में 280.70 मिलियन टन से बढ़कर लगभग 377.78 मिलियन टन हो गया। तिलहन उत्पादन 2014-15 के 27.51 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 43.06 मिलियन टन हो गया है।
इससे पता चलता है कि भारतीय कृषि में वृद्धि केवल खाद्यान्न तक सीमित नहीं है। बागवानी और तिलहन भी कृषि उत्पादन के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
3. PM-KISAN के तहत 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक सीधे किसानों को
किसानों को प्रत्यक्ष आय सहायता देने वाली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) के तहत 23 किस्तों के माध्यम से किसानों के बैंक खातों में 4.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक सीधे हस्तांतरित किए जा चुके हैं।
23वीं किस्त में ही 9.49 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिला और 18,984 करोड़ रुपये से अधिक जारी किए गए।
फसल बीमा के दायरे में भी विस्तार हुआ है। 2016-17 में शुरू हुई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत अब तक 92.46 करोड़ से अधिक किसान आवेदन बीमित किए जा चुके हैं। दिसंबर 2025 तक 1.96 लाख करोड़ रुपये के दावों का भुगतान किया गया, जिससे लगभग 24.31 करोड़ किसानों को लाभ मिला।
4. किसान क्रेडिट कार्ड के तहत बकाया राशि 10.08 लाख करोड़ रुपये
कृषि क्षेत्र में संस्थागत ऋण की पहुंच भी बढ़ी है। 3 अगस्त 2026 तक 2025-26 में देशभर में 7.28 करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) खाते सक्रिय थे। किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत बकाया राशि 10.08 लाख करोड़ रुपये थी।
कृषि कार्यों और कार्यशील पूंजी के लिए औपचारिक ऋण की उपलब्धता किसान अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और KCC इस व्यवस्था का एक प्रमुख हिस्सा है।
5. 10,000 FPO और 1,656 मंडियां e-NAM से जुड़ीं
किसानों को बाजारों से जोड़ने और सामूहिक विपणन को बढ़ावा देने के लिए किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और डिजिटल कृषि बाजारों का विस्तार हुआ है। जुलाई 2026 तक देश में 10,000 किसान उत्पादक संगठन (FPO) पंजीकृत हो चुके थे।
प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के कंप्यूटरीकरण को भी आगे बढ़ाया गया है। 31 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 79,630 PACS के कंप्यूटरीकरण को मंजूरी दी गई है। इनमें से 63,707 PACS को 5 अगस्त 2026 तक राष्ट्रीय ERP आधारित सॉफ्टवेयर पर ऑनबोर्ड किया जा चुका था।
राष्ट्रीय कृषि बाजार यानी e-NAM से जून 2026 तक 1,656 मंडियां जुड़ चुकी थीं। प्लेटफॉर्म पर 1.89 करोड़ किसान और 2.78 लाख व्यापारीपंजीकृत थे।
कृषि भंडारण ढांचे में भी विस्तार हुआ है। जुलाई 2026 तक पिछले दस वर्षों में 12,353 भंडारण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनकी कुल भंडारण क्षमता 369.18 लाख मीट्रिक टन है।
6. कृषि निर्यात बढ़कर 54.70 अरब डॉलर
भारत के कृषि निर्यात का मूल्य 2014-15 में 32.08 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 54.70 अरब डॉलर हो गया। यह लगभग 70.5% की वृद्धिहै।
कृषि निर्यात में प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात की हिस्सेदारी 2014-15 में 13.7% से बढ़कर 2024-25 में 20.4% हो गई, यानी इसमें लगभग 49% की वृद्धि हुई।
यह बदलाव कृषि उत्पादों में मूल्यवर्धन की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है, जहां केवल कच्चे कृषि उत्पादों के बजाय प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात भी बढ़ रहा है।
7. 10.31 करोड़ से अधिक Farmer IDs बनाए गए
कृषि में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल अब बड़े स्तर पर हो रहा है। 3 अगस्त 2026 तक देश में 10.31 करोड़ से अधिक Farmer IDs बनाए जा चुके थे। रबी 2025-26 के दौरान 648 जिलों में डिजिटल क्रॉप सर्वे किया गया, जिसमें 31.3 करोड़ से अधिक प्लॉट शामिल किए गए।
कृषि सलाह और कीट निगरानी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग भी बढ़ा है। जुलाई 2026 तक नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम (NPSS) का इस्तेमाल 10,000 से अधिक एक्सटेंशन कार्यकर्ता कर रहे थे। यह प्रणाली 73 फसलों और 436 कीटों को कवर कर रही थी।
BharatVistaar प्लेटफॉर्म ने 3 लाख से अधिक किसानों तक पहुंच बनाई और 72 लाख से अधिक किसान प्रश्नों का समाधान किया।
8. दूध उत्पादन 248 मिलियन टन पहुंचा
भारतीय कृषि की तस्वीर अब केवल फसल उत्पादन से निर्धारित नहीं होती। डेयरी और पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना हुआ है और वैश्विक दूध उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी लगभग 25% है। देश का दूध उत्पादन 2014-15 में 146.31 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 248 मिलियन टन हो गया, यानी लगभग 70% वृद्धि।
2024-25 में औसत बोवाइन दूध उत्पादकता 2,251 किलोग्राम प्रति पशु प्रति वर्ष पहुंच गई, जबकि 2014-15 में यह 1,648 किलोग्राम थी।
अंडा उत्पादन भी 2014-15 के 78.48 अरब से बढ़कर 2024-25 में 149.11 अरब हो गया। इसी अवधि में मांस उत्पादन 6.69 मिलियन टन से बढ़कर 10.50 मिलियन टन हो गया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पशुधन क्षेत्र ने 2014-15 के बाद से 12.77% CAGR दर्ज किया है। 2026-27 के केंद्रीय बजट में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के लिए 6,153.46 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
9. मत्स्य उत्पादन 197.75 लाख टन पहुंचा
मत्स्य पालन भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि से जुड़े कारोबार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है।
भारत में मछली उत्पादन 2013-14 के 95.79 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 197.75 लाख टन हो गया। समुद्री खाद्य निर्यात भी 2013-14 के 3.64 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में लगभग 8.46 अरब डॉलर हो गया।
मत्स्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में भी विस्तार हुआ है। अप्रैल 2026 तक स्वीकृत गतिविधियों में 28,489 मछली परिवहन एवं हैंडलिंग इकाइयां, 775 कोल्ड स्टोरेज और आइस प्लांट, 1,394 लाइव फिश वेंडिंग यूनिट और 6,018 फिश कियोस्क शामिल थे।
मत्स्य क्षेत्र में संस्थागत ऋण की पहुंच भी बढ़ी है। 6.83 लाख KCC आवेदनों में से 6.77 लाख स्वीकार किए गए और 4.82 लाख आवेदन स्वीकृत हुए। KCC का लाभ 4.39 लाख मछुआरों तक पहुंचा।
10. खाद्य प्रसंस्करण क्षमता 34 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष
भारतीय कृषि में मूल्यवर्धन का महत्व बढ़ रहा है और खाद्य प्रसंस्करण इसका प्रमुख हिस्सा है।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय का बजट आवंटन 2014-15 में 785.86 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 4,064 करोड़ रुपये हो गया। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए Production Linked Incentive Scheme के तहत जून 2026 तक 3,271.44 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन वितरित किए जा चुके थे।
इस योजना के तहत हुए निवेश से 34 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष की खाद्य प्रसंस्करण क्षमता तैयार हुई है। PLI समर्थित उत्पादों की बिक्री FY2019-20 में 58,758 करोड़ रुपये से बढ़कर FY2025-26 में 1,08,854 करोड़ रुपये हो गई।
प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत जून 2026 तक 1,256 पोस्ट-हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोसेसिंग परियोजनाएं पूरी या चालू हो चुकी थीं। इन परियोजनाओं से 294.21 लाख टन प्रति वर्ष की प्रोसेसिंग एवं प्रिजर्वेशन क्षमता तैयार हुई और 9.16 लाख रोजगार अवसर पैदा हुए।
2026 में भारतीय कृषि की तस्वीर क्या बताती है?
इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय कृषि में बदलाव केवल उत्पादन बढ़ने तक सीमित नहीं है। कृषि अर्थव्यवस्था में उत्पादन, ऋण, बीमा, बाजार, भंडारण, प्रसंस्करण, निर्यात और डिजिटल तकनीक एक-दूसरे से तेजी से जुड़ रहे हैं।
खाद्यान्न, बागवानी और तिलहन उत्पादन में वृद्धि के साथ किसानों के लिए PM-KISAN, फसल बीमा और संस्थागत ऋण का विस्तार हुआ है। दूसरी ओर, FPO, e-NAM और भंडारण बुनियादी ढांचा किसानों को बाजार से जोड़ने की व्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं।
कृषि के साथ डेयरी, पशुपालन और मत्स्य पालन भी ग्रामीण आय के महत्वपूर्ण स्रोत बन रहे हैं। दूध, अंडा, मांस और मछली उत्पादन में वृद्धि के साथ इन क्षेत्रों में प्रसंस्करण, प्रजनन, पशु स्वास्थ्य और बाजार बुनियादी ढांचे पर भी निवेश बढ़ा है।
डिजिटल कृषि इस बदलाव की एक और महत्वपूर्ण परत है। 10.31 करोड़ से अधिक Farmer IDs, 31.3 करोड़ से अधिक प्लॉट को कवर करने वाला डिजिटल क्रॉप सर्वे, AI आधारित कीट निगरानी और डिजिटल किसान सलाह प्लेटफॉर्म इस बात के संकेत हैं कि डेटा और तकनीक कृषि समर्थन प्रणाली का हिस्सा बन रहे हैं।
इसलिए 2026 में भारतीय कृषि की कहानी केवल यह नहीं है कि देश कितना उत्पादन कर रहा है। बड़ी तस्वीर यह है कि खेत से बाजार, प्रसंस्करण और निर्यात तक पूरी कृषि मूल्य श्रृंखला का विस्तार हो रहा है।
आने वाले वर्षों में इस विस्तार का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि ये निवेश कृषि उत्पादकता, किसानों को मिलने वाले बाजार मूल्य, मूल्यवर्धन और ग्रामीण आय की स्थिरता में कितना सुधार करते हैं।
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