पशुपालन (Animal Husbandry)राज्य कृषि समाचार (State News)

दूध बढ़ाने के लिए सिर्फ नस्ल नहीं, पशु की खुराक भी जरूरी

01 सितंबर 2026, भोपाल: दूध बढ़ाने के लिए सिर्फ नस्ल नहीं, पशु की खुराक भी जरूरी – गाय-भैंस पालने वाले पशुपालकों के लिए दूध उत्पादन सबसे महत्वपूर्ण आय का स्रोत होता है। पशुपालक चाहते हैं कि पशु अधिक मात्रा में दूध दे और उसमें वसा व एसएनएफ की मात्रा भी अच्छी हो। हालांकि बेहतर दुग्ध उत्पादन केवल पशु की नस्ल पर निर्भर नहीं करता। संतुलित आहार, उचित प्रबंधन और पशु की सेहत भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पशु पोषण विशेषज्ञों के अनुसार बछड़े, वयस्क पशु, दूध देने वाले पशु और प्रजनन के लिए रखे गए सांड की खुराक अलग-अलग होती है। पशु को उसकी आवश्यकता के अनुसार चारा और पोषक तत्व देने से उसके स्वास्थ्य के साथ दुग्ध उत्पादन को भी बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

हरा और सूखा चारा जरूरी

सामान्य तौर पर एक दुधारू गाय-भैंस के आहार में पर्याप्त हरा और सूखा चारा शामिल होना चाहिए। उपलब्ध सलाह के अनुसार पशु को प्रतिदिन करीब 10 किलो हरा चारा और 5 किलो सूखा चारा दिया जा सकता है। हालांकि वास्तविक मात्रा पशु की नस्ल, वजन, उम्र, दूध उत्पादन और स्थानीय चारे की गुणवत्ता के अनुसार अलग हो सकती है। दूध उत्पादन घटने के पीछे मौसम में बदलाव, पोषण की कमी, बीमारी, तनाव और प्रबंधन में बदलाव जैसे कई कारण हो सकते हैं। इसलिए अचानक दूध कम होने पर केवल चारा बढ़ाने के बजाय पशु चिकित्सक या पशु पोषण विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

नस्ल सुधार से बढ़ सकती है उत्पादन क्षमता

दूध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में नस्ल सुधार भी महत्वपूर्ण है। आज कृत्रिम गर्भाधान और सेक्स-सॉर्टेड सीमेन जैसी तकनीकों के माध्यम से बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशु तैयार करने की कोशिश की जा रही है। सेक्स-सॉर्टेड सीमेन से मादा बछिया प्राप्त होने की संभावना बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा उच्च गुणवत्ता वाले पशुओं के प्रजनन कार्यक्रमों में भ्रूण स्थानांतरण और आईवीएफ जैसी उन्नत तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकारी और निजी स्तर पर कृत्रिम गर्भाधान सेवाएं उपलब्ध हैं और कई क्षेत्रों में प्रशिक्षित तकनीशियन किसानों के गांव या घर तक पहुंचकर यह सुविधा देते हैं।

पशुपालकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि अधिक दूध के लिए केवल नस्ल पर निर्भर न रहें। अच्छी नस्ल के साथ संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, स्वच्छता, समय पर टीकाकरण और नियमित स्वास्थ्य जांच पर ध्यान देने से ही पशु की उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture