राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

खाद सब्सिडी का पूरा हिसाब होगा डिजिटल, ई-बिल से खत्म होगी कागजी प्रक्रिया

31 अगस्त 2026, नई दिल्ली: खाद सब्सिडी का पूरा हिसाब होगा डिजिटल, ई-बिल से खत्म होगी कागजी प्रक्रिया – देश में उर्वरक सब्सिडी और खाद प्रबंधन व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने रविवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में ई-बिल प्रणाली का उद्घाटन किया। नई व्यवस्था से उर्वरक सब्सिडी के बिलों की प्रक्रिया सरल और एकीकृत होगी तथा कागजी बिलों की आवाजाही कम करने में मदद मिलेगी।

सरकार के अनुसार, इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (आईएफएमएस) अब केवल उर्वरक बिक्री का रिकॉर्ड रखने वाला मंच नहीं रह गया है। इसे उत्पादन, आयात, आपूर्ति, परिवहन, स्टॉक, किसान की खरीद और सब्सिडी भुगतान तक पूरी व्यवस्था को जोड़ने वाले डिजिटल नेटवर्क के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस प्रणाली से 14 करोड़ से अधिक आधार से जुड़े उर्वरक खरीदार, 2.5 लाख से अधिक खुदरा विक्रेता और सालाना करीब सात करोड़ मीट्रिक टन उर्वरक बिक्री जुड़ी हुई है। इसके माध्यम से करीब दो लाख करोड़ रुपये की वार्षिक उर्वरक सब्सिडी के प्रबंधन में भी सहायता मिलती है।

उत्पादन से किसान की खरीद तक निगरानी

राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र की तकनीकी सहायता से विकसित आईएफएमएस पर उर्वरक उत्पादन, आयात, वितरण, परिवहन, उपलब्ध स्टॉक और खुदरा बिक्री की जानकारी एकीकृत की जा रही है। इससे केंद्र से लेकर राज्य, जिला और खुदरा विक्रेता स्तर तक उर्वरक की उपलब्धता पर नजर रखना आसान होगा।

आंकड़ों के विश्लेषण के माध्यम से असामान्य खरीद, खपत में बदलाव और आपूर्ति से जुड़ी संभावित समस्याओं की पहचान भी की जा सकेगी। किसान, भूमि, फसल और उर्वरक के प्रकार के आधार पर खरीद के आंकड़ों का विश्लेषण करने से अलग-अलग क्षेत्रों में खाद की वास्तविक खपत का आकलन किया जा सकेगा।

मोबाइल से बुकिंग, क्यूआर कोड से खरीद

उर्वरक बिक्री के लिए विकसित किए जा रहे नए ढांचे में मोबाइल ऐप के माध्यम से किसान अपनी जरूरत दर्ज कर सकेंगे। एग्रीस्टैक पहचान के आधार पर भूमि और स्वामित्व संबंधी जानकारी का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद क्यूआर कोड आधारित बुकिंग तैयार होगी, जिसकी जानकारी उर्वरक बिक्री केंद्र के उपकरण पर उपलब्ध कराई जाएगी।

इस व्यवस्था से किसान की बताई गई खाद की जरूरत और वास्तविक खरीद का मिलान किया जा सकेगा। प्रति हेक्टेयर खपत, फसल और जोत के आकार के अनुसार उर्वरक उपयोग का विश्लेषण भी संभव होगा। उर्वरक ढोने वाले वाहनों की भी होगी निगरानी

सरकार उर्वरक की आपूर्ति श्रृंखला पर नजर रखने के लिए वाहन स्थान निगरानी प्रणाली (वीएलटीएस) को भी आईएफएमएस से जोड़ रही है। इससे उर्वरक की खेप के रवाना होने से लेकर अंतिम गंतव्य तक उसके आवागमन की निगरानी की जा सकेगी। देरी या असामान्य मार्ग की स्थिति का भी पता लगाने में मदद मिलेगी।

सब्सिडी भुगतान में पारदर्शिता बढ़ेगी

आईएफएमएस में दर्ज वास्तविक बिक्री के आधार पर उर्वरक सब्सिडी का भुगतान किया जाता है। 1 जनवरी 2026 से सब्सिडी बिलों की इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रिया, सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली और ई-बिल व्यवस्था के एकीकरण को आगे बढ़ाया गया है। इससे मैनुअल हस्तक्षेप कम करने, दावों और भुगतान की स्थिति पर नजर रखने तथा जांच और लेखा परीक्षण को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

सरकार का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था के विस्तार से उर्वरक की उपलब्धता, वितरण और सब्सिडी भुगतान की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ेगी। साथ ही, आंकड़ों के आधार पर खाद की वास्तविक जरूरत का आकलन कर भविष्य में आपूर्ति प्रबंधन को और बेहतर बनाया जा सकेगा।

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