राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

उपराष्ट्रपति कल करेंगे ‘मिशन रंगीन मछली 2031’ का विमोचन, अगत्ती में जुटेंगे मछुआरे और मत्स्य पालक

30 अगस्त 2026, नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति कल करेंगे ‘मिशन रंगीन मछली 2031’ का विमोचन, अगत्ती में जुटेंगे मछुआरे और मत्स्य पालक – मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से सोमवार, 31 अगस्त 2026 को लक्षद्वीप के अगत्ती में आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति ‘मिशन रंगीन मछली 2031’ का विमोचन करेंगे। यह सजावटी मत्स्य पालन के विकास के लिए तैयार की गई रणनीतिक कार्ययोजना है। कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल और लक्षद्वीप के प्रशासक श्री प्रफुल्ल खोड़ा पटेल मौजूद रहेंगे।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मछुआरे और मत्स्य पालक शामिल होंगे। इनमें महिला मछली पालक और महिला मछुआरों की भी भागीदारी रहेगी। इसके अलावा केंद्र और लक्षद्वीप सरकार के मत्स्य पालन विभागों, मत्स्य पालन क्लस्टर तथा संबंधित मंत्रालयों और विभागों के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। भारत के पास करीब 11,099 किलोमीटर लंबी तटरेखा, 22 लाख वर्ग किलोमीटर का अनन्य आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और करीब 53.1 लाख टन की अनुमानित समुद्री मत्स्य क्षमता है। इसके बावजूद समुद्री संसाधनों की पूरी क्षमता का अभी इस्तेमाल नहीं हो पाया है। सरकार का जोर अब सतत मत्स्य पालन, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने, समुद्री जलीय कृषि यानी मैरिकल्चर और नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर है।

इस मामले में लक्षद्वीप को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लक्षद्वीप के पास करीब 4 लाख वर्ग किलोमीटर का ईईजेड है, जो भारत के कुल ईईजेड का लगभग 17 प्रतिशत है। इसके अलावा यहां 4,200 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला लैगून भी है। इन समुद्री संसाधनों में उच्च मूल्य वाली मछलियों के दोहन, मैरिकल्चर के विस्तार और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा करने की काफी संभावनाएं हैं। मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास के लिए सरकार क्लस्टर आधारित व्यवस्था पर भी जोर दे रही है। इसी के तहत लक्षद्वीप को समुद्री शैवाल की खेती, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और बाजार से जोड़ने के लिए समर्पित समुद्री शैवाल क्लस्टर के रूप में अधिसूचित किया गया है। लक्षद्वीप के समुद्री क्षेत्र सजावटी मछलियों के लिए भी काफी समृद्ध हैं। इससे समुद्री पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए सजावटी मछली पालन, निर्यात और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने की संभावनाएं बनती हैं।

सजावटी मत्स्य पालन के लिए बनेगी एक समान व्यवस्था

आउटरीच कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ‘मिशन रंगीन मछली 2031’ का विमोचन होगा। इस कार्ययोजना का उद्देश्य देश में सजावटी मत्स्य पालन को वैज्ञानिक, व्यवस्थित और बेहतर गुणवत्ता वाला बनाना है। इसके तहत सजावटी मत्स्य पालन से जुड़ी पूरी मूल्य श्रृंखला के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन, जैव-सुरक्षा, गुणवत्ता और नियामक मानकों पर एक समान व्यवस्था तैयार की जाएगी। इसमें मछलियों के प्रजनन और पालन से लेकर हैचरी संचालन, उत्पादन, क्वारंटीन, स्वास्थ्य प्रबंधन, ट्रेसेबिलिटी, एक्वेरियम संचालन, मछलियों की हैंडलिंग, परिवहन और व्यापार जैसी प्रक्रियाओं को मानकीकृत करने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं यानी एसओपी तैयार की जाएंगी।इससे देशभर में सजावटी मत्स्य पालन से जुड़ी कार्यप्रणालियों में एकरूपता आएगी और बेहतर तरीकों को अपनाने में मदद मिलेगी। 

साथ ही मछली पालकों और अन्य हितधारकों की क्षमता बढ़ाने, उत्पादों की गुणवत्ता और जैव-सुरक्षा में सुधार करने तथा प्रमाणन और बाजार तक पहुंच आसान बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति मत्स्य पालन क्षेत्र के लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं के लाभ भी वितरित करेंगे। सरकार का मानना है कि इन पहलों से देश में सजावटी मत्स्य पालन क्षेत्र को अधिक व्यवस्थित और प्रतिस्पर्धी बनाने के साथ-साथ रोजगार, निर्यात और आजीविका के नए अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।

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