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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

कपास की बुवाई पिछले साल के आसपास, सितंबर की बारिश पर टिकी अब फसल की उम्मीद

28 अगस्त 2026, नई दिल्ली: पकपास की बुवाई पिछले साल के आसपास, सितंबर की बारिश पर टिकी अब फसल की उम्मीद – खरीफ सीजन की बुवाई अब लगभग पूरी होने की ओर है और देश में कपास का रकबा पिछले साल के आसपास ही बना हुआ है। 21 अगस्त तक देश में 108.45 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 108.73 लाख हेक्टेयर था। इस तरह इस साल कपास के रकबे में मामूली कमी दर्ज हुई है।

हालांकि, राज्यवार तस्वीर एक जैसी नहीं है। महाराष्ट्र और राजस्थान में कपास का क्षेत्र घटा है, लेकिन तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश में रकबा बढ़ने से राष्ट्रीय स्तर पर कमी की भरपाई काफी हद तक हो गई है। अब किसानों और कपास कारोबारियों की नजर सितंबर की बारिश पर टिकी है, क्योंकि आने वाले दिनों में मौसम फसल की उत्पादकता तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

महाराष्ट्र में मामूली गिरावट

महाराष्ट्र देश का प्रमुख कपास उत्पादक राज्य है। 21 अगस्त तक यहां 38.22 लाख हेक्टेयर में कपास बोई गई है, जबकि पिछले साल इसी समय 38.37 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी। यानी राज्य में रकबे में मामूली कमी आई है।

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राजस्थान में गिरावट अपेक्षाकृत अधिक रही। इस वर्ष 21 अगस्त तक राज्य में 5.38 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल यह क्षेत्र 6.44 लाख हेक्टेयर था। इस तरह राजस्थान में कपास का रकबा करीब 6 फीसदी घटा है।

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तेलंगाना में 7.28 फीसदी बढ़ा रकबा

दूसरी ओर तेलंगाना में किसानों ने इस बार कपास की खेती को अधिक प्राथमिकता दी है। राज्य में कपास का रकबा 7.28 फीसदी बढ़कर 19.50 लाख हेक्टेयर हो गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह क्षेत्र 18.18 लाख हेक्टेयर था।

कर्नाटक में भी कपास के रकबे में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यहां इस साल 7.76 लाख हेक्टेयर में कपास बोई गई है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 7.62 लाख हेक्टेयर था।
कुल मिलाकर देश में कपास की बुवाई का रकबा लगभग पिछले साल के स्तर पर है। अब फसल की वास्तविक स्थिति काफी हद तक सितंबर में होने वाली बारिश, खेतों में नमी और मौसम की अनुकूलता पर निर्भर करेगी। पर्याप्त बारिश हुई तो फसल को बढ़वार के लिए जरूरी नमी मिल सकती है, जबकि बारिश की कमी या प्रतिकूल मौसम से पैदावार प्रभावित होने का खतरा रहेगा।

ऐसे में किसानों के साथ कपास उद्योग की नजर भी आने वाले कुछ सप्ताह के मौसम पर बनी हुई है। रकबा भले स्थिर है, लेकिन उत्पादन की तस्वीर सितंबर के मौसम से साफ होगी।

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