बिहार में 86 कृषि यंत्रों पर 80 फीसदी तक अनुदान, 8 सितंबर से ऑनलाइन आवेदन शुरू
09 सितंबर 2026, हाजीपुर: बिहार में 86 कृषि यंत्रों पर 80 फीसदी तक अनुदान, 8 सितंबर से ऑनलाइन आवेदन शुरू – बिहार सरकार ने राज्य के किसानों के लिए कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत 86 तरह के कृषि यंत्रों और उपकरणों पर 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान देने की घोषणा की है। इसके लिए 8 सितंबर से राज्य कृषि विभाग के पोर्टल farmech.bihar.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन शुरू हो गए हैं। योजना का लाभ छोटे-सीमांत किसानों, महिला किसानों और किसान समूहों को प्राथमिकता के आधार पर दिया जाएगा।
राज्य स्तर पर इस योजना के लिए 236 करोड़ 58 लाख रुपये का बजट रखा गया है। वैशाली की जिला पदाधिकारी वर्षा सिंह ने कहा कि पात्र किसानों तक कल्याणकारी योजनाओं को पहुंचाना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है और उन्होंने अधिकारियों को पंचायत व प्रखंड स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया है।
किस यंत्र पर कितना अनुदान
योजना के तहत अलग-अलग श्रेणी के यंत्रों और केंद्रों पर अलग-अलग अनुदान सीमा तय की गई है। ड्रोन केंद्र स्थापित करने पर अधिकतम 5 लाख रुपये तक का अनुदान मिलेगा, जबकि कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए 4 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी। कृषि यंत्र बैंक बनाने पर 8 लाख रुपये और विशेष कस्टम हायरिंग सेंटर पर अधिकतम 12 लाख रुपये तक का अनुदान देय होगा।
चयन प्रक्रिया ऑनलाइन लॉटरी के जरिये होगी और चयनित किसानों को यंत्र खरीदने के लिए 15 दिन की समय-सीमा दी जाएगी। इस अवधि में यंत्र न खरीदने पर मौका अगले पात्र किसान को दे दिया जाएगा। अनुदान राशि यंत्र खरीदने और उसके सत्यापन के बाद सीधे किसान के बैंक खाते में डीबीटी के जरिये भेजी जाएगी।
आवेदन के लिए क्या करना होगा
इच्छुक किसानों को farmech.bihar.gov.in पोर्टल पर पंजीकरण कर आधार, बैंक खाता और जमीन से जुड़े दस्तावेज अपलोड करने होंगे। किसान अपनी सुविधा के अनुसार यंत्र या केंद्र की श्रेणी चुनकर आवेदन कर सकते हैं। जिला कृषि कार्यालय और प्रखंड कृषि पदाधिकारी कार्यालय में भी आवेदन को लेकर मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
कृषि विभाग के अनुसार व्यक्तिगत किसान अपनी जरूरत के हिसाब से किसी एक यंत्र के लिए आवेदन कर सकते हैं, जबकि समूह में आवेदन करने वाले किसानों को ड्रोन केंद्र, कस्टम हायरिंग सेंटर या यंत्र बैंक जैसी बड़ी इकाई स्थापित करने के लिए ऊंची अनुदान सीमा का लाभ मिलेगा। इससे अकेले महंगे यंत्र न खरीद पाने वाले छोटे किसान भी समूह बनाकर मशीनीकरण का फायदा उठा सकेंगे।
जिन किसानों का चयन लॉटरी में हो जाता है, उन्हें तय समय-सीमा के भीतर यंत्र की खरीद पूरी करनी होती है, जिसके बाद विभाग सत्यापन करता है और तभी अनुदान राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। जिला प्रशासन ने पंचायत व प्रखंड स्तर पर होने वाले जागरूकता अभियान में इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया है, ताकि पात्र किसान समय रहते आवेदन कर सकें।
बिहार में अधिकांश किसानों के पास एक से दो एकड़ तक की छोटी जोत है, जिसके चलते महंगे कृषि यंत्र अकेले खरीदना उनके लिए मुश्किल होता है। कस्टम हायरिंग सेंटर और यंत्र बैंक जैसी साझा सुविधाओं से आसपास के कई किसान मिलकर एक ही यंत्र का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे खेती की लागत घटती है और समय पर बुआई-कटाई संभव हो पाती है।
यह खबर क्यों मायने रखती है: बिहार जैसे राज्य में जहां जोत छोटी है, वहां ड्रोन, कस्टम हायरिंग सेंटर और यंत्र बैंक जैसी साझा सुविधाओं पर सब्सिडी छोटे किसानों तक मशीनीकरण पहुंचाने का सस्ता रास्ता बनती है। कृषि यंत्र निर्माताओं, डीलरों और कस्टम हायरिंग सेवा शुरू करने वाले उद्यमियों के लिए अगले कुछ महीनों में बिहार एक बड़ा बाजार बनकर उभर सकता है।
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